आखिर अलमारी का ताला तुड़वाने से क्यों कतरा रहे हैं अधिकारी ?

Dec 30, 2025 - 21:14
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आखिर अलमारी का ताला तुड़वाने से क्यों कतरा रहे हैं अधिकारी ?

आखिर अलमारी का ताला तुड़वाने से क्यों कतरा रहे हैं अधिकारी ?

 फर्रुखाबाद। जनपद के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय मोहम्मदाबाद में संविदा पर तैनात रहे सहायक लेखाकार विवेक कुमार के मामले में अधिकारी कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। अभद्र व्यवहार की लगातार शिकायतों और अधिकारियों की आख्या के आधार पर कार्यदायी संस्था ने अगस्त माह में ही उसकी संविदा समाप्त कर दी थी। इसके बाद से विवेक कुमार कार्यालय नहीं आया, लेकिन उसके कब्जे वाली अलमारी में कार्यालय के कई अहम दस्तावेज, चेक बुक और आवश्यक अभिलेख आज भी बंद पड़े हैं। हैरानी की बात यह है किसंविदा समाप्त हुए लगभग पांच माह बीत चुके हैं, इसके बावजूद अब तक अलमारी का ताला नहीं खुलवाया जा सका है।

अलमारी बंद होने के कारण कार्यालय के कई जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। भुगतान, लेखा-जोखा और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगातार बाधा आ रही है, जिससे न केवल कर्मचारियों को परेशानी हो रही है, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी मोहम्मदाबाद ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय को एक-दो नहीं, बल्कि दर्जन भर से अधिक पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया। बावजूद इसके, उच्च स्तर से कोई ठोस निर्णय या निर्देश जारी नहीं किए गए।खंड शिक्षा अधिकारी ने नवागंतुक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह के जनपद में कार्यभार ग्रहण करने के बाद भी इस मामले की विस्तृत जानकारी दी थी। इसके अलावा बीच में एक बार फिर मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया गया। दो दिन पूर्व ही खंड शिक्षा अधिकारी ने जिलाबेसिक शिक्षा अधिकारी के व्हाट्सएप पर भी संबंधित पत्र और जानकारी साझा की, लेकिन उसके बाद भी अलमारी खुलवाने अथवा दस्तावेज सुरक्षित कराने को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। इस पूरे मामले ने विभागीय लापरवाही और निर्णयहीनता को उजागर कर दिया है।

सवाल यह उठ रहा है कि जब संविदा समाप्त हो चुकी है और संबंधित व्यक्ति कार्यालय से नाता तोड़ चुका है, तो फिर सरकारी दस्तावेजों को सुरक्षित करने में देरी क्यों की जा रही है। अधिकारी कार्रवाई से क्यों कतरा रहे हैं, यह समझ से परे है। यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो इससे न केवल विभागीय कार्य और अधिक प्रभावित होंगे, बल्कि भविष्य में किसी बड़े नुकसान की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।