ढाका की अदालत ने शेख हसीना को दी मौत की सज़ा, भारत के सामने बड़ा कूटनीतिक संकट

Nov 18, 2025 - 09:58
Updated: 6 months ago
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ढाका की अदालत ने शेख हसीना को दी मौत की सज़ा, भारत के सामने बड़ा कूटनीतिक संकट

ढाका की अदालत ने शेख हसीना को दी मौत की सज़ा, भारत के सामने बड़ा कूटनीतिक संकट

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, जो अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं, अब अपनी जान के फैसले के लिए दिल्ली की कूटनीति पर निर्भर हो गई हैं। ढाका की International Crimes Tribunal-1 (ICT-1) ने उन्हें क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी के आरोपों में मौत की सज़ा सुनाई है। अदालत का आरोप है कि 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर सैन्य अभियान का आदेश हसीना ने दिया था।

 ■ 2024 का छात्र आंदोलन:

सरकार का पतन और हसीना का पलायन आरक्षण नीति सुधारों के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन 48 घंटे में देशव्यापी बगावत बन गया। 1,200 से 1,400 लोगों की मौत, 20,000 घायल, 8,000 से अधिक गिरफ्तारियां और 23 दिन का सोशल मीडिया ब्लैकआउट दर्ज किया गया। स्थिति बिगड़ने पर सरकार गिर गई, सेना तटस्थ हो गई और शेख हसीना देश छोड़कर भारत पहुंच गईं। भारत ने उन्हें सुरक्षा और गोपनीय ठिकाना उपलब्ध कराया।

■ ICT-1 का फैसला अदालत ने तीन आरोपों के आधार पर सज़ा सुनाई: 1. प्रदर्शनकारियों पर हवाई हमले की मंज़ूरी 2. शहरी इलाकों में एयर-टार्गेटिंग ऑपरेशन 3. मानवाधिकारों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन अभियोजन ने एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग पेश की, जिसे अदालत ने निर्णायक माना।

 ■ हसीना की प्रतिक्रिया भारत में रह रहीं हसीना ने फैसले को राजनीतिक प्रतिशोध बताया और कहा कि यह अवामी लीग को राजनीति से हटाने की कोशिश है। उन्होंने ICT-1 की वैधता मानने से भी इनकार कर दिया। ---

★ भारत पर कानूनी स्थिति

■ क्या भारत में ढाका की मौत की सज़ा लागू होती है? नहीं। भारत किसी विदेशी अदालत के फैसले को तब तक नहीं मानता जब तक भारतीय अदालत उसकी समीक्षा करके उसे स्वीकार न करे। 

■ क्या भारत उन्हें बांग्लादेश को सौंप सकता है? भारत–बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि मौजूद है, लेकिन भारत के कानून के तीन सुरक्षा फ़िल्टर प्रत्यर्पण रोक सकते हैं: 1. राजनीतिक प्रतिशोध का खतरा 2. निष्पक्ष ट्रायल का अभाव 3. मौत की सज़ा का जोखिम इन स्थितियों में भारत कानूनी रूप से प्रत्यर्पण अस्वीकार कर सकता है।

■ क्या UN भारत पर दबाव डाल सकता है? नहीं। ICT-1 एक घरेलू अदालत है। इसके फैसलों को लागू कराने का अधिकार UN, ICC या ICJ के पास नहीं है। ---

 ★ भारत के संभावित विकल्प 1. Silent Asylum मॉडल: भारत चुप्पी साध सकता है और कानूनी समीक्षा के नाम पर मामला लंबा खींच सकता है। 2. मानवाधिकार आधार: भारत स्पष्ट रूप से कह सकता है कि मौत की सज़ा और राजनीतिक प्रतिशोध को देखते हुए प्रत्यर्पण संभव नहीं है। 3. कंडीशनल एक्स्ट्राडिशन: भारत यह शर्त रख सकता है कि बांग्लादेश मौत की सज़ा हटाए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष सुनवाई का आश्वासन दे। ---

 ★ अगर भारत ने सौंप दिया तो प्रभाव बांग्लादेश में भारत-विरोधी माहौल बढ़ सकता है। अवामी लीग के समर्थकों में नाराज़गी और संभावित हिंसा की आशंका। भारत पर पड़ोसी देशों की राजनीति में हस्तक्षेप का आरोप लग सकता है।

★ अगर भारत ने नहीं सौंपा तो प्रभाव सीमा व्यापार और सुरक्षा सहयोग प्रभावित हो सकता है। बांग्लादेश चीन की ओर और अधिक झुक सकता है, जो भारत के लिए बड़ा भू-राजनीतिक खतरा है।

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