अयोध्या से मोदी का 33 साल का अनूठा सफर: 1991 की पहली यात्रा से लेकर 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण तक—एक संकल्प कैसे बना इतिहास

Nov 25, 2025 - 20:08
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अयोध्या से मोदी का 33 साल का अनूठा सफर: 1991 की पहली यात्रा से लेकर 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण तक—एक संकल्प कैसे बना इतिहास

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अयोध्या से मोदी का 33 साल का अनूठा सफर: 1991 की पहली यात्रा से लेकर 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण तक—एक संकल्प कैसे बना इतिहास

अयोध्या अयोध्या आज उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रही है, जिसका संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन दशक पहले लिया था। 1991 में जब वे पहली बार अयोध्या आए थे, तब उन्होंने कहा था—“जब राम मंदिर बनेगा, तब फिर आऊंगा।” उस समय न तो केंद्र में भाजपा की सत्ता का कोई संकेत था, न ही राम मंदिर निर्माण की कल्पना संभव लगती थी। लेकिन 33 वर्षों के लम्बे राजनीतिक और आध्यात्मिक सफर के बाद वही नरेंद्र मोदी आज राम मंदिर की पूर्णता के प्रतीक धर्मध्वजा का आरोहण करने के लिए अयोध्या में मौजूद हैं।

? 2014 से 2019 तक—‘केवल चुनावी एजेंडा’ कहकर घेरा गया प्रधानमंत्री बनने के बाद 2014 से 2019 तक विपक्ष से अक्सर यह तंज सुनने को मिलता था कि राम मंदिर केवल भाजपा का चुनावी मुद्दा है। आलोचक कहते रहे— “प्रधानमंत्री बनकर भी मोदी अयोध्या नहीं जाते, मंदिर में प्रवेश नहीं करते।” लेकिन 5 अगस्त 2019 को रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की आधारशिला रखने के लिए वे अयोध्या पहुंचे, और इसके बाद अयोध्या आने का क्रम लगातार बढ़ता गया। पिछले छह वर्षों में यह उनकी छठवीं यात्रा है।

? रामलला के प्रति अनुराग—योजनाओं की सौगात के साथ प्रधानमंत्री मोदी अयोध्या के लिए केवल दौरे नहीं करते रहे, बल्कि उन्होंने करोड़ों की विकास परियोजनाओं का उपहार देकर यह साबित किया कि उनका अनुराग केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि विकासात्मक भी है। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद भी यह आशंका जताई गई थी कि अयोध्या का विकास रुक जाएगा, लेकिन प्रधानमंत्री और भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने योजनाओं की गति धीमी नहीं होने दी। पांच प्रमुख चरण—मोदी की अयोध्या यात्राएँ - 5 अगस्त 2019 – मंदिर निर्माण का शिलान्यास - 23 अक्टूबर 2022 – दीपोत्सव में शामिल होने अयोध्या आगमन - 30 दिसंबर 2023 – हज़ारों करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण - 22 जनवरी 2024 – रामलला की प्राण प्रतिष्ठा - 5 मई 2024 – लोकसभा चुनाव के दौरान रोड शो - 25 नवंबर 2025 – धर्मध्वजा का ऐतिहासिक ध्वजारोहण

 ? अयोध्या और मोदी का 33 साल पुराना रिश्ता नरेंद्र मोदी का अयोध्या से जुड़ाव 1990 की रथयात्रा के समय से है। लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा में वे संयोजक के रूप में जुड़े थे। हालांकि 23 अक्टूबर 1990 को रथयात्रा बिहार के समस्तीपुर में रोक दी गई थी, जिसके कारण वे आडवाणी के साथ अयोध्या पहुंच नहीं सके। 18 जनवरी 1991 को वे मुरली मनोहर जोशी के साथ पहली बार अयोध्या आए। इसके बाद 29 साल, 7 महीने, 13 दिन तक वे अयोध्या नहीं आए।

? 2024–25: इतिहास बदलने वाले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की ही नेतृत्व अवधि में— ✔ श्रीराम जन्मभूमि विवाद का फैसला आया ✔ मंदिर निर्माण का द्वार खुला ✔ शिलान्यास हुआ ✔ प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई ✔ और अब मंदिर “पूर्ण” माना जाएगा, धर्मध्वजा के आरोहण के बाद उनका संकल्प, जो 1991 में एक युवा कार्यकर्ता ने लिया था, आज अभिजीत मुहूर्त में साकार होने जा रहा है।

? रामविवाह के मंगल वातावरण में ध्वजारोहण 25 नवंबर को जब वे राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा फहराएँगे, तब अयोध्या रामविवाह के पावन वातावरण से गुंजायमान होगी। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि— “एक संकल्प का पूर्णत्व, राजनीति से परे आस्था का चरम और भारत की सनातन परंपरा की नई शुरुआत” के रूप में देखा जा रहा है।

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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