कायमगंज तहसील में भ्रष्टाचार के विरोध में अधिवक्ताओं का बहिष्कार, हड़ताल की चेतावनी

Apr 22, 2026 - 07:53
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कायमगंज तहसील में भ्रष्टाचार के विरोध में अधिवक्ताओं का बहिष्कार, हड़ताल की चेतावनी
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कायमगंज तहसील में भ्रष्टाचार के विरोध में अधिवक्ताओं का बहिष्कार, हड़ताल की चेतावनी

कायमगंज। रेवेन्यू बार एसोसिएशन कायमगंज के समस्त अधिवक्ताओं ने 13 नवंबर 2025 को आयोजित बैठक में तहसील कायमगंज में बढ़ते भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और पीठासीन अधिकारियों की कार्यशैली के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर निर्णय लिया गया कि समस्याओं के समाधान तक अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे और न्यायालयों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसील प्रशासन द्वारा उनसे किसी भी प्रकार की संवाद प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है, जिससे समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि उपजिलाधिकारी पर तानाशाही रवैया अपनाने, कंप्यूटराइज्ड केस लिस्ट जारी न करने और अधिवक्ताओं पर दबाव बनाने के आरोप लगाए।

साथ ही तहसीलदार और अन्य अधिकारियों पर कथित रूप से दलालों के माध्यम से मामलों में हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के भी आरोप लगाए गए। बैठक में निर्णय लिया गया कि एक ज्ञापन के माध्यम से शासन और जिलाधिकारी को सभी समस्याओं से अवगत कराया जाएगा। चेतावनी दी गई कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो अधिवक्ता अनिश्चितकालीन हड़ताल और धरना प्रदर्शन करेंगे। अधिवक्ताओं ने तहसील स्तर की कई समस्याओं को बिंदुवार रखते हुए कहा कि रियल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण में गड़बड़ी, बिना रिश्वत कार्य न होना, पूर्व आदेशों का अनुपालन न होना, भूमिधरों की श्रेणी में संशोधन न होना, मृत खातेदारों की विरासत दर्ज न होना जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। इसके अलावा न्यायालयों में सुनवाई प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। अधिवक्ताओं का आरोप है कि केवल चुनिंदा फाइलों पर सुनवाई होती है, जबकि अन्य मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखा जाता है।

कई पत्रावलियां पोर्टल पर दर्ज ही नहीं की जातीं, जिससे वादकारियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। मेडबंदी से संबंधित मामलों में भी नियमों की अनदेखी, राजस्व निरीक्षकों द्वारा समय पर आख्या न देना और कार्यालय में बैठकर फाइलों का निस्तारण करने जैसे आरोप लगाए गए। अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि पूर्व में भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित कर्मियों को पुनः उसी क्षेत्र में तैनात किया जा रहा है, जिससे मनमानी और बढ़ रही है। अधिवक्ताओं ने मांग की कि इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि शासन की मंशा के अनुरूप जनता को न्याय मिल सके। अन्यथा की स्थिति में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।