अमेरिका–ईरान तनाव बढ़ा: पानी की सप्लाई पर खतरा, खाड़ी देशों में संकट की आशंका
अमेरिका–ईरान तनाव बढ़ा: पानी की सप्लाई पर खतरा, खाड़ी देशों में संकट की आशंका
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब खाड़ी क्षेत्र में एक नए और खतरनाक मोड़ की आशंका पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ, तो वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा। ईरान की सेना ने स्पष्ट किया है कि संभावित हमलों में ऊर्जा, आईटी और विशेष रूप से डिसैलिनेशन (समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले) प्लांट्स शामिल हो सकते हैं। इससे क्षेत्र में पानी की आपूर्ति पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
■ पानी की सप्लाई पर बड़ा खतरा
खाड़ी देशों—जैसे Saudi Arabia, Kuwait, Oman और United Arab Emirates—की बड़ी आबादी पीने के पानी के लिए डिसैलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर है। * सऊदी अरब लगभग 70% * कुवैत करीब 90% * ओमान 86% * यूएई भी बड़े पैमाने पर इन प्लांट्स पर निर्भर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन प्लांट्स पर हमला होता है, तो कुछ ही दिनों में बड़े शहरों में पानी की भारी किल्लत हो सकती है।
■ इन्फ्रास्ट्रक्चर वॉर का खतरा
तनाव के बीच हमले अब पारंपरिक सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर बुनियादी ढांचे तक पहुंच सकते हैं। तेल और गैस संयंत्रों पर पहले से हो रहे हमलों के बाद अब पानी जैसी मूलभूत जरूरत पर खतरा बढ़ गया है।
■ पुरानी चेतावनी फिर चर्चा में
रिपोर्ट्स के अनुसार, Central Intelligence Agency (CIA) ने 1983 में ही चेतावनी दी थी कि यदि डिसैलिनेशन प्लांट्स को निशाना बनाया गया, तो क्षेत्र में अराजकता फैल सकती है और लोग बड़े पैमाने पर पलायन करने को मजबूर हो सकते हैं।
■ पर्यावरणीय और मानवीय संकट की आशंका
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे हमलों से न केवल पानी की आपूर्ति बाधित होगी, बल्कि प्लांट्स से निकलने वाले रसायनों के कारण समुद्री जीवन और पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। हालांकि, अब तक बड़े स्तर पर इन प्लांट्स को निशाना नहीं बनाया गया है। इसे रणनीतिक संयम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पानी जैसी बुनियादी जरूरत पर हमला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर प्रतिक्रिया और निंदा का कारण बन सकता है। अगर यह टकराव ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर वॉर’ में बदलता है, तो इसका असर केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पानी जैसी जीवनदायिनी जरूरत पर भी संकट खड़ा कर सकता है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में मानवीय आपदा की स्थिति पैदा हो सकती है।