बाबा साहेब का बहु-आयामी व्यक्तित्व आधुनिक भारत के निर्माण का घोषणापत्र है: सृजन साहित्य संवाद

Apr 29, 2026 - 18:18
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बाबा साहेब का बहु-आयामी व्यक्तित्व आधुनिक भारत के निर्माण का घोषणापत्र है: सृजन साहित्य संवाद
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बाबा साहेब का बहु-आयामी व्यक्तित्व आधुनिक भारत के निर्माण का घोषणापत्र है: सृजन साहित्य संवाद ​

नई दिल्ली | (सब का सपना) सृजन साहित्य संवाद द्वारा 'दलित हिस्ट्री मंथ' के अंतर्गत आयोजित 27,28,29 अप्रैल, तीन दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम दिन 'बाबा साहेब का बहु-आयामी व्यक्तित्व' विषय पर गहन वैचारिक विमर्श हुआ। फेसबुक लाइव के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विद्वानों ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के उन पहलुओं को रेखांकित किया, जो राष्ट्र निर्माण की मुख्य धारा के आधार स्तंभ हैं। कार्यक्रम की संयोजिका और सुप्रसिद्ध लेखिका अनिता भारती ने चर्चा का सूत्रपात करते हुए बाबा साहेब के महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए गए क्रांतिकारी कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "बाबा साहेब ने न केवल महिलाओं को कानूनी अधिकार दिए, बल्कि हिंदू कोड बिल के माध्यम से उनके व्यक्तित्व की गरिमा और स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया। वे मानते थे कि समाज की प्रगति का पैमाना महिलाओं की प्रगति है।"

 मुख्य वक्ता एडवोकेट सचिन धींगिया ने बाबा साहेब के विधिक एवं संवैधानिक पक्ष पर बात रखते हुए कहा कि अंबेडकर का कानून केवल सजा देने का विधान नहीं, बल्कि न्याय और समता स्थापित करने का एक जीवंत दस्तावेज है। वहीं, प्रिया गोस्वामी ने उनके पत्रकारिता वाले पक्ष को उजागर करते हुए बताया कि बाबा साहेब ने 'मूकनायक' और 'बहिष्कृत भारत' के माध्यम से पत्रकारिता को समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज और प्रतिरोध का माध्यम बनाया। ​'गांव के लोग' पत्रिका के संपादक रामजी यादव ने बाबा साहेब के सामाजिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का सामाजिक दर्शन जातिगत दीवारों को तोड़कर एक ऐसे लोकतंत्र की स्थापना करना था, जहाँ बंधुत्व का भाव सर्वोपरि हो। प्रसिद्ध आलोचक जयप्रकाश फ़ाकिर ने बाबा साहेब के आर्थिक पक्ष पर अपना वक्तव्य रखते हुए स्पष्ट किया कि वे केवल एक सामाजिक सुधारक नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि के अर्थशास्त्री थे। भारतीय मुद्रा की समस्याओं से लेकर कृषि और श्रम सुधारों तक, उनका आर्थिक दृष्टिकोण आज भी भारत के विकास की दिशा तय करने में सक्षम है।

भारत मे बौद्ध धर्म के परिप्रेक्ष्य पर चर्चा करते हुए भिक्खुनी विजया मैत्रीय ने बाबा साहेब और बौद्ध धम्म के अंतर्संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने धम्म के रूप में एक ऐसा नैतिक मार्ग प्रदान किया, जो मनुष्य को मानसिक गुलामी से मुक्त कर समानता और करुणा की ओर ले जाता है। संगोष्ठी के अंत में यह निष्कर्ष निकला कि बाबा साहेब का व्यक्तित्व किसी एक परिभाषा में नहीं समाता। वे एक साथ कानूनविद्, अर्थशास्त्री, पत्रकार और समाज सुधारक थे। सफ़ल आयोजन के लिए सृजन साहित्य संवाद ने सभी वक्ताओं और इस आयोजन में तकनीकी सहयोग करने वाली टीम जिसमें एन प्रीति बौद्ध, सूक्ष्म क्याला ,पावेल सिंह, शांतम सिंह, राजीव आर सिंह व विशेष रूप से प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार आर.एस. आघात का आभार व्यक्त किया गया ।