सोना बोल रहा है, चांदी चिल्ला रही है !
सोना बोल रहा है, चांदी चिल्ला रही है!
देश मे चांदी ने इतिहास रच दिया। MCX पर चांदी की कीमतें पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो आंकड़े को पार किया था। हैरानी की बात यह है कि चांदी को 3 लाख से 4 लाख रुपये तक पहुंचने में मात्र 10 दिनों का समय लगा। इस असाधारण तेजी के बीच एक नई रिपोर्ट ने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सोने और चांदी की मौजूदा चाल दो अलग-अलग कहानियां बयां कर रही हैं। सोने की बढ़ती कीमतें वैश्विक आर्थिक तनाव और भू-राजनीतिक जोखिमों (War etc.) की ओर इशारा करती हैं, जबकि चांदी की यह मांग से ज्यादा सट्टेबाजी का परिणाम लग रही है। क्या चांदी में आ सकती है बड़ी गिरावट? रिपोर्ट के अनुसार, चांदी की मौजूदा स्थिति काफी जटिल है। इसकी कीमतें सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ती मांग के साथ-साथ सट्टेबाजी से संचालित हो रही हैं। ऐतिहासिक डेटा का हवाला देते हुए रिपोर्ट चेतावनी देती है कि: गिरावट का जोखिम: सट्टेबाजी के चरम पर पहुंचने के बाद चांदी में अक्सर 40% से 55% तक की भारी गिरावट देखी गई है। रिकवरी में वक्त: सोने की तुलना में चांदी को गिरावट से उबरने में कई साल लग सकते हैं।
अस्थिरता: चांदी का मार्केट स्ट्रक्चर सोने के मुकाबले कमजोर है, जिससे इसमें तेज उलटफेर (Reverse Trend) का खतरा बना रहता है। निवेश रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि सोना पोर्टफोलियो के लिए एक 'इंश्योरेंस' की तरह है जो महंगाई और शेयर बाजार की उथल-पुथल में आपकी सुरक्षा करता है। वहीं, चांदी में मौजूदा तेजी जितनी आकर्षक है, उतनी ही अस्थिर भी। रिपोर्ट का सुझाव है कि निवेशकों को चांदी की इस तूफानी तेजी में बहने के बजाय समझदारी से री-पोजीशनिंग करनी चाहिए।