Farrukhabad News : फसल बीमा योजना में 68 लाख का घोटाला, बैंक प्रबंधकों और बीमा कर्मियों पर FIR दर्ज

Dec 29, 2025 - 20:53
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Farrukhabad News : फसल बीमा योजना में 68 लाख का घोटाला, बैंक प्रबंधकों और बीमा कर्मियों पर FIR दर्ज

फसल बीमा योजना में 68 लाख का घोटाला, बैंक प्रबंधकों और बीमा कर्मियों पर FIR दर्ज ।

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जाँच में लगभग 68.03 लाख रुपये की भारी अनियमितता पाई गई है, जहाँ बिना जमीन वाले (भूमिहीन) लोगों को भी लाखों का क्लेम बाँट दिया गया। इस मामले में जिला प्रशासन की सख्ती के बाद 9 बैंक मैनेजरों, बीमा कंपनी के 3 प्रतिनिधियों और 32 अज्ञात किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वर्ष 2024 के रबी सीजन के दौरान जिले के 8,849 किसानों का बीमा किया गया था। फसल नुकसान के मुआवजे के तौर पर 232 किसानों को कुल 2.28 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। भुगतान में धांधली की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने उन किसानों की जाँच के लिए एक समिति गठित की, जिन्हें 1 लाख रुपये से अधिक का क्लेम मिला था।

जाँच समिति (जिसमें नायब तहसीलदार और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल थे) ने पाया कि कई लाभार्थियों के पास खेती के लिए जमीन ही नहीं थी, फिर भी उन्हें बीमा राशि का भुगतान किया गया। अमृतपुर तहसील: यहाँ के बलीपट्टी रानी गाँव में 15 लाभार्थियों में से 14 के पास कोई जमीन नहीं थी, फिर भी उन्हें 24.89 लाख रुपये का भुगतान हुआ। गलत गणना: एक मामले में मात्र 0.026 हेक्टेयर जमीन वाले किसान को नियमानुसार 2,228 रुपये मिलने चाहिए थे, लेकिन उसे 2.57 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया। कुल घोटाला: जाँच में कुल 68,03,631 रुपये का भुगतान नियमों के विरुद्ध पाया गया। इनके खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा उप कृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्रा की तहरीर पर जहानगंज और अमृतपुर थानों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं: बैंक प्रबंधक: बैंक ऑफ इंडिया (मोहम्मदाबाद, राजलमई, गनीपुर जोगपुर, मदनपुर), एसबीआई (मदनपुर), आर्यावर्त बैंक (गांधी, अमृतपुर) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक व कर्मचारी। बीमा कंपनी (HDFC ERGO): कंपनी के प्रतिनिधि अरुण कुमार, प्रवीण पाल और विकास कुमार सहित अन्य कर्मचारी।किसान: बंथलशाहपुर के 11 नामजद किसान और 32 अज्ञात किसान।

उप कृषि निदेशक ने स्पष्ट किया है कि यह सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और योजना के नियमों का खुला उल्लंघन है। वर्तमान में पुलिस और कृषि विभाग इस मामले की विस्तृत जाँच कर रहे हैं ताकि घोटाले की पूरी गहराई और इसमें शामिल अन्य चेहरों का पता लगाया जा सके।