Farrukhabad News : 10 साल पहले मरे व्यक्ति पर पुलिस ने ठोंक दिया मुकदमा

Farrukhabad News : 10 साल पहले मरे व्यक्ति पर पुलिस ने ठोंक दिया मुकदमा

Mar 17, 2026 - 21:57
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Farrukhabad News : 10 साल पहले मरे व्यक्ति पर पुलिस ने ठोंक दिया मुकदमा

10 साल पहले मरे व्यक्ति पर पुलिस ने ठोंक दिया मुकदमा

फर्रुखाबाद। कानून के रखवालों की ऐसी लापरवाही शायद ही पहले देखी गई हो। थाना राजेपुर पुलिस ने हद पार करते हुए एक ऐसे व्यक्ति को भी आरोपी बना दिया, जिसकी मौत को पूरे 10 साल बीत चुके हैं। यह घटना न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पूरे सिस्टम की गंभीर पोल खोलती है। मामला 13 मार्च की शाम का है, जब अनुज पुत्र राजकुमार निवासी गांधी ने मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी का आरोप लगाते हुए तहरीर दी। तहरीर में राममूर्ति, विजय, अभिषेक और विनोद को नामजद किया गया। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने बिना एक पल गंवाए मुकदमा दर्ज कर लिया, लेकिन यह जानने की जरूरत तक नहीं समझी कि जिन पर आरोप लगाया जा रहा है, वे जीवित भी हैं या नहीं।

मृतक को बना दिया आरोपी, पुलिस बनी मजाक का पात्र जांच की सच्चाई तब सामने आई जब पता चला कि आरोपी बनाए गए विनोद की मौत वर्ष 2016 में ही हो चुकी है। यानी पुलिस ने एक “मृत व्यक्ति” पर भी मुकदमा ठोक दिया। यह घटना साफ दिखाती है कि थाने में किस तरह आंख बंद करके मुकदमे लिखे जा रहे हैं। क्या अब बिना जांच के ही लोगों को आरोपी बना देना ही पुलिस का काम रह गया है? स्थानीय लोगों में आक्रोश, उठे कड़े सवाल इलाके के लोगों में इस घटना को लेकर जबरदस्त नाराजगी है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस इतनी ही लापरवाह रही, तो किसी को भी फर्जी मुकदमे में फंसाना बेहद आसान हो जाएगा। परिजनों का आरोप: साजिश के तहत फंसाया जा रहा परिवार मृतक विनोद के परिजनों ने इस पूरे मामले को साजिश बताया है। उनका कहना है कि पैसे के विवाद में जानबूझकर परिवार को निशाना बनाया जा रहा है और पुलिस बिना जांच किए इसमें साथ दे रही है।

कानून के जानकारों ने उठाए गंभीर सवाल विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी मृत व्यक्ति को आरोपी बनाना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था का मजाक उड़ाने जैसा है। ऐसे मामलों में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस की सफाई—जांच में सामने आएगी सच्चाई थाना प्रभारी ने सफाई देते हुए कहा कि मुकदमा शिकायतकर्ता की तहरीर के आधार पर दर्ज किया गया है और जांच के दौरान सही तथ्य सामने लाए जाएंगे। लेकिन बड़ा सवाल यही है: जब जिंदा और मृत में फर्क करने की भी जांच नहीं हो रही, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?

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