कहानी - भूत कोठी के भूतों की पीड़ा

Sep 28, 2024 - 15:59
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कहानी -  भूत कोठी के भूतों की  पीड़ा

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कहानी - भूत कोठी के भूतों की पीड़ा

पुरानी संस्कृति सभ्यता और आज की संस्कृति सभ्यता में बहुत अंतर है। पुरानी पीढ़ी के बुजुर्ग पुरानी संस्कृति सभ्यता मे आगंतुक का मान सम्मान करने में अपनात्व प्रेम श्रद्धा भाव होता था ।तब उसमें कोई स्वार्थ भावना दिखावा नहीं होता था । लेकिन आज की संस्कृति सभ्यता में आगुंतक का मान सम्मान स्वार्थ की भावना पर आधारित होता है।

120 वर्ष से अधिक उम्र की बूढी मां ने आकर मुझे जगा दिया और बोली --बेटा माधवगढ की भूत कोठी को देखने नहीं जाओगे ।दैनिक दिनचर्या से निपटकर आ जाओ। बेसन की गरम-गरम पकौड़ी का नाश्ता करके भूत कोठी को देखने चलेंगे । लौट कर आकर भोजन करेंगे ।मैं जल्दी से दैनिक दिनचर्या निपट कर आ गया और बुढी मां का बनाया गया नाश्ता बड़े प्रेम से किया। इसके बाद बूढी मां साथ भूत कोठी पर पहुंचा और वहां बड़े-बड़े कमरे बड़े हॉल को देखा । हाल में लगे हुए पुराने राजा महाराजा जमीदार कैप्टन आदि के चित्रों को देखा और बुढी मां के द्वारा उन चित्रों की जानकारी ली ।

भूत कोठी से लौटते वक्त बूढी मां से कहा-- यदि योगी सरकार भूत कोठी का अधिग्रहण कर ले तो इस भूत कोठी में संस्कृत हिंदी का अच्छा विश्वविद्यालय खुल सकता है ।जिसमें प्राचीनसंस्कृति सभ्यता हिंदू संस्कृति का अन्वेषण खोज का कार्य हो सकता है। जब छात्र-छात्राओं में संस्कृत भाषाका अच्छा ज्ञान होगा तो प्राचीन ग्रंथो के द्वारा औषधि विज्ञान शास्त्र विज्ञान अविष्कार आदि की तमाम खोजो के कार्य हो सकेंगे ।

लखनऊ अलीगढ़ आगरा मे तमाम प्राचीन इमारतें कोठी महल बेकार पड़े हुए हैं । योगी सरकार को इनका अदिग्रहण करना चाहिए। जिस से इन इमारत में स्कूल कॉलेज अस्पताल अनाथालय खोले जा सके। बफ बोर्ड तमाम तमाम इमारत को घेरे हुए हैं। इनका अधिग्रहण करने के लिए सरकार को कानून बनना चाहिए । मेरी बातों पर बूढी मां ने सहमत दी और कहा-अब शीघ्र योगी सरकार को इस संबंध में कानून बनना चाहिए। दोपहर के बाद मैं और बुढी मां भूत कोठी से लौट आए। लेकिन मुझे वहां कोई भी भूत प्रेत नहीं दिखाई दिया। भूत कोठी में भूत प्रेत देखने की मेरी इच्छा बनी ही रही। मैं यह सोचता ही रहा इन आलीशान कोठियो प्राचीन इमारतें पर अवैध कब्जा करने के लिए कांग्रेस सपा शासन काल में कितने लोगों की निर्मम हत्या हुई है ।यही मृत आत्माएं भूत प्रेत बन गई है,।

भोजन आदिग्रहण कराने के बाद बूढी मां ने मेरी चारपाई बिस्तर भूत कोठी के सामने टीन के नीचे लगा दिए और कुछ हटकर अपनी तथा बूढ़े काका के बिस्तर लगा लिए। रात के 11:00 रहे थे। भूत कोठी में प्रेत आत्माओ के विषय में सोते हुए मैं गहरी नींद में सो गया ।अचानक मेरी नींद खुल गई। मैंने देखा भूत कोठी के दरवाजे पर दो जवान औरते चार लड़किया खड़ी है और आपस में मेरी ओर इशारा करके बातें कर रही है। मैंने गौर से उनको देखा और सोच- इतनी रात गए यह जवान औरत औरलड़कियां भूत कोठी दरवाजे पर क्यों खड़ी है ? जब जिज्ञासा ज्यादा बड़ी तो मैं अपनी चारपाई से उठ कर उन जवानऔरत लड़कियों के पास पहुंचा गया और कहा इतनी रात गए भूत कोठी के दरवाजे पर क्या कर रही हो?

खड़ी जवान औरत हंसी और बोली --तुम मेरे पास से चले जाओ। हम लोगों के असली रूप को देखकर तुम डर जाओगे। मैं कुछ मनचले लड़कों सेक्स बलात्कार करने वाले लोगों का शिकार करके अपनी भूखमिटाकर आ रही हू। अब भूख नहीं रही । मैं प्रेत आत्मा हू। मैं केवल मनचले लड़कों तथा कामी नेताओं का ही शिकार करती हूं।। मैं उस जवान औरत की बात को सुनकर डर गया और वहां से जाने वाला ही था। तभी जवान औरत बोली --तुम कहानीकार हो ।भूत कोठी की तुमने कहानी लिखी है। मैं तुम्हारा अहित नहीं करूंगी। बस एक बात जरूर कहूंगी।

--भूत कोठिया मे भूत प्रेत तब तक समाप्त नहीं होगेजब तक मनचले कुकर्मी नेताऑ और उनकी संतानो को अपराध करने पर उनको गोली मारने का कानून नहीं बनेगा। जो नेता ऐसे अपराधियों का संरक्षण करते हैं उनको भी जेल में डालने के कानून बने। आजकल लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी जी अपराधियों को तत्काल गोली मारने के आदेश दे रहे हैं ।उनके मकान विध्वंस करके उन्हें भयभीत करने की जो कार्रवाई हो रही है। उसे कोर्ट कचहरी से राजनीतिक नेता वोट की राजनीति के कारण रोक लगवा देते हैं और उन्हें खुला समर्थन देते हैं ।नारी जाति की सुरक्षा के लिए नेता गढ़ मंचों पर खूब भाषण करते है लेकिन चुनाव जीतने के लिए अपराधियों को खुला संरक्षण देते हैं।लेकिन जनता भी ऐसे नेताओं को अपना वोट देकर चुनाव में उनकी जीत सुनिश्चित कर देती है।

पास खड़ी कैप्टन की बहन कल्पना बोली --जमीदार के इसारे पर दरोगा द्वारा मुझ पर हैवानियत बरती गई और मुझे आत्महत्या करने पड़ी ।मेरा बदला लेने के लिए मेरे भाई कैप्टन को डकैत बनना पड़ा। तभी पास खड़ी भूतन मीरा बोल उठी --मुगल सल्तनत अंग्रेजी राज कांग्रेस के समय जोर जुल्म से बदला लेने के लिए मलिखान सिंह मानसिंह जाने कितने लोगों को डकैत बनना पड़ा आज योगी के राज में जब सख्त कानून बना रहे हैं तो उनका विरोध बोटर्की राजनीति के कारण हो रहा है ।क्या तुम इन बातों को लिख सकोगे ?आज जरूरत है सच्चाई का समर्थन करने वाले लेखक पत्रकारों को सामने आना चाहिए । मैं उन लड़कियों और जवान औरत को आश्वासन देकर चल दिया कोई लिखे या ना लिखें लेकिन मेरीलेखनी इस संबंध के लेखन के लिए चलती रहेगी ।

वरिष्ठ निर्भीक पत्रकार लेखक ठाकुर जयचंद भदोरिया ने मुझसे ऐसे सत्य लेखन की अपेक्षा की है। मैं इतना कहकर भूत कोठी से चल दिया और अपनी चारपाई पर जाकर लेट गया। भूत कोठी के भूतों की पीड़ा पर गंभीरता से सोचने लगा और उस पर विचार करने लगा लगा।

बृज किशोर सक्सेना किशोर इटावी कचहरी रोड मैनपुरी

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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