गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म रक्षा के लिए शीश दिया पर सिद्क न दिया-प्रोफेसर रामबाबू मिश्र ‘रत्नेश’
गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म रक्षा के लिए शीश दिया पर सिद्क न दिया-प्रोफेसर रामबाबू मिश्र
‘रत्नेश’ -गुरु गोविंद सिंह जन्मोत्सव विचार गोष्ठी कायमगंज/
फर्रुखाबाद। समय की मांग है कि राजनेताओं के बजाय बलिदानी गुरुओं एवं हुतात्मा क्रांतिकारियों के श्रद्धा स्थल हर प्रदेश की राजधानी में स्थापित किए जाएं। गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश उत्सव पर विश्व बंधु परिषद द्वारा कृष्णा प्रेस परिसर सधवाड़ा में आयोजित संगोष्ठी में प्रोफेसर रामबाबू मिश्र ‘रत्नेश’ ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म रक्षा के लिए शीश दिया पर सिद्क न दिया। उनके तेजस्वी पुत्र गुरु गोविंद सिंह ने सवा लाख से एक लडाऊ की पैज करके मृत्यु प्राय कौम में प्राण फूंके। राष्ट्रीय स्वाभिमान जगाया। प्रधानाचार्य अमरनाथ शुक्ला ने कहा कि वीर भूमि पंजाब और क्रांति भूमि बंगाल भारत माता की दो सशक्त भुजाएं हैं।
प्रधानाचार्य शिवकांत शुक्ला ने कहा कि विश्व इतिहास में ऐसे पिता कहां मिलेंगे जिन्होंने धर्म रक्षा के लिए क्रूर शासक द्वारा अपने किशोर पुत्रों को दीवार में चिनवाए जाने पर उफ नहीं की। गीतकार पवन बाथम ने कहा कि सिख गुरु संपूर्ण राष्ट्र के पूज्य संत हैं उन्हें तंग सीमाओं में बांधना अनुचित है। शिक्षक शिवकुमार दुबे ने कहा कि सिंध नरेश दाहिर, राजा सुहेल देव , महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह, वीर शिवाजी भारत की वीर परंपरा के प्रकाश स्तंभ है। युवा कवि अनुपम मिश्रा ने कहा— राष्ट् धर्म संस्कृति का बरकरार अस्तित्व गुरुओं के बलिदान का इसमें बड़ा महत्व छात्रकवि यशवर्धन ने कहा— वाहेगुरु जी फ़तेह कह चरणों में रख शीश गुरु गोविंद सिंह का ले अमृत आशीष गोष्ठी में सत्यम दुबे ,वीएस तिवारी ,जेपी दुबे,आदि ने कहा कि जो देश अपने क्रांतिकारियों को भूल जाता है वह कभी अखंड नहीं रहता।