कायमगंज का कन्टूरी वाला पोस्ता लड्डू – 74 साल पुरानी मिठास का सफ़र
कायमगंज का कन्टूरी वाला पोस्ता लड्डू – 74 साल पुरानी मिठास का सफ़र
कायमगंज की तंग गलियों में, जिसे लोग आज भी “गांजा भांग वाली गली” के नाम से जानते हैं, वहीं किसी कोने में एक साधारण-सी दुकान है — **कन्टूरी स्वीट्स**। दिखने में सादी, पर ज़ायके में ऐसी कि फर्रुखाबाद, एटा, मैनपुरी और कन्नौज तक नाम लिया जाता है इसका। करीब **1950 में कन्टूरी लाल गुप्ता** ने इस दुकान की नींव रखी थी। तब से लेकर अब तक चार पीढ़ियाँ मिलकर वही परंपरा निभा रही हैं। दुकान की पहचान सिर्फ एक चीज़ से है — **देसी घी का पोस्ता लड्डू**। इस लड्डू की खासियत सिर्फ उसके स्वाद में नहीं, बल्कि बनाने के ढंग में है।
ताज़े दूध की कढ़ाई से निकली मलाई, देसी घी में भुना गोंद, काजू और मगज का हल्का फ्राई होना — और ऊपर से पोस्ते की सधी हुई भुनाई। जब इसमें देसी भूरा (खांड) मिलती है तो पूरा मिश्रण जैसे खुशबू और मिठास का त्योहार बन जाता है। हर लड्डू करीब **70 से 80 ग्राम** का होता है, और सर्दियों में इसकी मांग सबसे ज़्यादा रहती है। लोग कहते हैं कि “कायमगंज का जाड़ा और कन्टूरी का पोस्ता लड्डू” — दोनों का मज़ा साथ ही आता है। सालों पुरानी ये दुकान किसी बड़े बोर्ड या चमक-धमक से नहीं, बल्कि अपने स्वाद और भरोसे से ज़िंदा है। यही इसकी असली पहचान है।