विधवा को मिला सुखद दांपत्य जीवन

Feb 24, 2024 - 18:30
 0  110
विधवा को मिला सुखद दांपत्य जीवन
Follow:

कहानी ★★★

विधवा को मिला सुखद दांपत्य जीवन

जनवरी का महीना था । शीत ऋतु की ठंडी हवाओं का प्रकोप अब भी चल रहा था। नरेंद्र घर का सामान लेने के लिए गांव से बाजारा आया हुआ था ।गुरुवार के दिन बाजार बंदी के कारण बाजार में सन्नाटाछाया हुआ था । पूरा बाजार बंद था। जब नरेंद्र गांव लौटने को था तभी बरसात होने लगी । मजबूरी में नरेंद्र को अपने साथ पढ़ने वाले ब्रज होटल के मालिक सुरेंद्र की टीन के नीचे रुकना पड़ा ।

ब्रजहोटलमालिकसुरेंद्र होटलको बंद किए हुए होटल के हाल में पलंग पर लेट हये थे और उपन्यास पढ़ रहे थे। जब होटल के मालिकने नरेंद्र को टीन के नीचे खड़ा देखा तो नरेंद्र को अंदर बुला लिया और अपने पास पलंग पर बिठा लिया । नरेंद्र पलंग पर बैठ ही ना पाया था कि आकाश में मेघ गर्जना के साथ और जोर से मूसलाधार वर्षा होने लगी।

बरसात से बचने के लिए एक 26 वर्षीय सुंदर नौजवान युवती छतरी लगाए हुए होटल की टीन के नीचे बने हुए तंदूर के पासआकर खड़ी हो गई ।युवती के अंदर आते हैं 5'-6 मनचले नौजवान लड़के भी होटल की टीन के नीचे जहां युवती खड़ी हुई थी वहां आकर खड़े हो गए ।अब धीरे-धीरे शाम होने लगीथी।बरसात भी धीरे-धीरे भयंकर रौद्र रूप धारण कररही थी। ठंडी हवाओं के साथआकाशी बिजली भयंकर रुप से कड़कनेलगी थी ।

मौसम की भयंकरिता को देखकर युवती जब डररही थी। तभी पास खड़ेलड़कों मे से एक लड़के ने युवती के हाथ से छतरी को लेकर तंदूर के ढक्कन के ऊपर रखदी और युवती का हाथ पकड़ कर उसे छेड़ने लगा। युवती की पीठ छाती पर हाथ फेरने लगा ।जब युवती लड़कों की गंदी छेड़छाड़ हरकतों से बहुत परेशान हो गई तो युवती ने साहस बटोरते हुए कहा -तुम्हें शर्म नहीं आती है। क्या तुम्हारे घर पर बहनेनहीं है ?

जब युवती यह सब बातें कह रही थी तो होटल के मालिक ने जब यह सबबातेंसुनी तो होटल मालिक ने बाहर आकर लड़कों कोफटकार लगाई और युवती से बोला- बेटी घबराओ नहीं होटल के अंदर आकर बैठ जाओ । मौसम ठीक होते ही हम तुम्हारे घर तुम्हें सुरक्षित रूप से पहुंचा दूंगा। डरती हुई युवती होटल के अंदर जाकर एक पलंग पर बैठ गई। तभी बिजली की हो रही रोशनी में नरेंद्र ने युवती को देखा और चौक कर बोला -अरे !सुधा तुम यहां ।

नरेंद्र पूरी बात भी नहीं कह पाया था ।होटल मालिक ने बताया - युवती टीन के नीचे बाहर खड़ी थी और 3 लड़के इस बिचारी को छेड़ रहे थे ।नरेंद्र होटल मालिक से बोला -यह मेरे साथ एम मे पढ़ने वाली सुधा है ।कॉलेज के वार्षिक उत्सव में राम विवाह ड्रामा मे यह सीता बनी थी और मैं राम बना था। होटल मालिक हंसा और बोला- तब तो अच्छे जोड़ी थी ।नरेंद्र बोला- ड्रामा की बातें ड्रामा ही तक सीमित होती है।एम परीक्षा के बाद यह अपने घर चली गई। मैं अपने घर चला आया। आज अचानक भेंट हो रही है। ना यह मेरे घर का पता जानती है ।ना मैं उसके घर का पता जानता हूं।

पढ़ाई के समय हम दोनों साथ साथ रहे यह पढ़ने लिखने में बहुत होशियार लड़की थी। जब नरेंद्र होटल मालिक से यह सब बातें कह रहा था ।तभी युवती ने अपना मोबाइल अपने पर्स से निकालते हुए नरेंद्र से बोली- मैं अपने जीजा जी को फोन कर रही हूं और उन्हें बता रही हूं ।मैं बरसात के कारण बृज होटल में बैठी हुई हूं।मुझे आकर ले जाओ। अब तुम इतनी रात खराब मौसम में अपने घर तक कैसे जाओगे।नरेंद्र बोला -यह होटल मालिक मेरा अच्छा दोस्त है । इसीलिए रात इसी होटल में गुजार लूंगा । आप अपने जीजा जी के साथ चली जाइए ।मेरी चिंता मत करिए ।सुधा हंसी और मुस्कुराते हुए बोली -मैं आपकी चिंता क्यों नहीं करूंगी ।मैं तो आपके ड्रामा की सीता हूं।मेरे जीजा जी आते ही होंगे। आप मेरे साथ चलिए ।

जीजा जी सुबह आपको आपके घर पर छोड़ आएंगे। सुधा जब यह सब बातें कह रही थी। तभी होटल के बाहर एक इंपाला गाड़ी हॉर्न बजाते हुए आकर रुकी। गाड़ी की आवाज सुनते ही सुधा नरेंद्र से बोली -मेरे जीजा जी आ गए हैं ।अब आप मेरे साथ चलिए ।मेरा इतना अनुरोध मान लीजिए। सुधा यह कह ही रही थी। तभी सुधा के जीजा जी होटल के अंदर आकर सुधा से बोले- तुम्हें तुम्हारी जीजी ने बहुत मना किया था कि तुम सब्जी लेने मत जाओ ।

जब जीजा जी आ जाएंगे। तब सब्जी जीजा जी खुद लाएं गे। लेकिन तुम नहीं मानी और यहां मुसीबत में फंस गई। तुमने फोन पर भी मुझे नहीं बताया ।हम लोग बहुत चिंतित थे ।सुधा जीजा जी से बोली -यह नरेंद्र मेरे साथ कॉलेज में पढ़ते रहे हैं ।इनके दोस्त होटल मालिक ने आज मेरी बहुत रक्षा की है। जब मुझे तीन लड़के छेड़ रहे थे तो होटल मालिक ने मुझेबचयाऔर तसल्ली दी ।

जीजा जी आप नरेंद्र जी से कहिए कि यह मेरे साथ चलें और सुबह आप इनके घर पर पहुंचा दें । सुधा की बात सुनकर सुधा के जीजा नरेंद्र से बोले- संकोच छोड़िए मेरे साथ चलिए ।सुधा और सुधा की जीजा के बहुत बार अनुरोध करने पर नरेंद्र उनके साथ चल दिया। सुधा के जीजा के घर पर नरेंद्र की खूब खातिरदारी की गई। सभी ने साथ साथ बैठ कर खानाखाया। जीजाजी सोने के लिए अपने कमरे में चले गए। एक कमरे में नरेंद्र की चारपाई लगा दी गई और नरेंद्र उस चारपाई पर जाकर सोने लगा तभी सुधा और सुधा की बड़ी बहन शकुंतला नरेंद्र के कमरे में आकर कुर्सियों पर बैठ गई ।

सुधा की बड़ी बहन नरेंद्र से बोली- यह आपकी अक्सर चर्चा करती रही है। आज भी आपके साथ ड्रामा की फोटो सुधा के पास रखी हुई है ।उसी ड्रामा की फोटोने इसके जीवन में भूचाल ला दिया था । इसछोटी सी उम्र में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था।पिताजी ने काफी दहेज देकर इसकी शादी एक एडवोकेट महेंद्र से कर दी थी ।पति पत्नी दोनों का दांपत्य जीवन बड़ी खुशी से कट रहा था। तभी सुधाके साथ पढ़ने वाले एक लड़के ने महेंद्र एडवोकेट के कार्यालय में जाकर तुम्हारे ड्रामा की फोटो उन्हें देकर मेरी बहन के दांपत्य जीवन में आग लगा दी।

मेरी बहन के चरित्र पर संदेह करके बकील ने मेरीबहन को छोड़ने का नोटिस दे दिया।जब मेरी बहन और इनके पति का मुकदमा चल रहा था। उसी समय एक मार्ग दुर्घटना में उनके पति वकील साहब की मौतहो गई और मेरी बहन विधवा हो गई। बहन के ससुरारी जनों ने इसको अपने पास रखने के लिए मना कर दिया।इसकोमैं अपने पास ले आई हू और वकालत पढ़ा रही हूं। जिससे अपनी जिंदगी अच्छी तरह से काट सकें। इस विधवा सेशादीकरनेकोअब कौन तैयार होगा ? झूठे कलंक की चर्चाएं अखबारों में खूब उछाली गई थी ।

जब सुधा की बड़ी बहन सुधा की दर्द भरी कहानी सुना कर कुर्सी से उठकर जाने लगी तो नरेंद्र उठ कर अपनी चारपाई पर बैठ गया और कुर्सी से उठकर जाते हुई सुधा और सुधा की बहन रोक कर सुधा की बहन से बोला - मैंने एमए. करके डॉक्टरी की पढ़ाई करके एक अच्छा डॉक्टर बन गया और गांव में बहुत बड़ा अस्पताल खोल लिया है ।मेरे पिताजी ब्लाक प्रमुख समाजसेवी है। सादा जीवन उच्च विचार के व्यक्ति है। उन्हीं के आदर्शों को जीवित रखने के लिए मैंने गांव में अस्पताल खुला है ।

मोदी योगी के आदर्श को लेकर समाज सेवा के लिए आज तक मैंने शादी नहीं की है।सुधा की दर्द भरी कहानी सुनकर मैं राम का आदर्श पालन करके सुधा को सीता के रूप में स्वीकार करना चाहता हूं ।क्या आप और सुधा की मुझे स्वीकृति मिलेगी? नरेंद्र की बात को सुनकर सुधा की बड़ी बहन बोली -अगर हम लोग तैयार भी हो जाएंगे तो क्या तुम्हारे पिताजी मानेंगे ?सुधा की बड़ी बहन की बात को सुनकर नरेंद्र बड़ी जोर सेहंसा और बोला -रात के 12 बजे है ।सोते हुएपिताजी को जगा रहा हूं। उनका निर्णय भी अभी आपको पता चल जाए गा। नरेंद्र ने अपना मोबाइल ऑन किया और पिताजी से मिलाया ।

उधर से आवाज आई --तुम कहां हो ?हमें तुम्हारी बहुत चिंता हो रही थी। तुम्हें खबर करना चाहिए कि तुम कहां हो ?नरेंद्र ने कहा -हम ठीक हू जो लड़की मेरे साथ ड्रामा में सीता बनी थी। आज अचानक उससे भेंट हो गई। मैं उसी के घर पर हूं ।उस तस्वीर के कारण जो मेरे साथ सुधा सीता बनी थी उसके पति ने उसके चरित्र पर संदेह करके उसे छोड़ दिया ।जब पति पत्नीकामुकदमा चल रहा था तो पति की मार्ग दुर्घटना में एक दिन मौत होगयी। मेरी सुधा सीता विधवा हो गई ।पिताजी मैने राम के आदर्श का पालन करते हुए विधवा सीता सुधा से शादी करना चाहता हूं।

क्या आप स्वीकार करेंगे ?पिता की उधर से आवाज आई- बेटा !तुमने निर्णय अच्छा लिया है ।मैं इस निर्णय को स्वीकार करता हूं ।अगर लड़की वाले स्वीकार करें तो तुम कल ही उस लड़की के पूरे परिवार को लेकर गांव आ जाओ ।मैं धूमधाम से तुम्हारी शादी उस निर्दोष विधवा सीता से करूंगा ।विधवा को भी जीने का अधिकार होता है ।नरेंद्र के पिताजी की बात सुनकर सुधा और सुधा की बहन इतनी खुश हुई कि उन्होंने सुधा जी के जीजा के कमरे में आकर उन्हें जगा दिया और सुधा की बड़ी बहन ने पूरी बात अपने पति को विस्तार से बता दी ।

सुबह का सुनहरा सूरज निकल रहा था और धरती पर अपनी किरणों के द्वारा प्रकाश फैला रहा था । नरेंद्र और सुधा का पूरा परिवार इंपाला गाड़ी में बैठा हुआनरेंद्र के गांव पहुंच गया ।गाव मे पहुचने के बाद विधवा सुधा के साथ नरेंद्र की धूमधाम से शादी हुई और सुधा ने एक सुखद दांपत्य जीवन फिर पा लिया।

बृज किशोर सक्सेना किशोर इटावी कचहरी रोड मैनपुरी