विश्व की सुंदरतम नगरी बनने की ओर अग्रसर अयोध्या वैश्विक पटल पर छा जाएगी अयोध्या

Nov 25, 2023 - 12:39
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विश्व की सुंदरतम नगरी बनने की ओर अग्रसर अयोध्या वैश्विक पटल पर छा जाएगी अयोध्या

मृत्युंजय दीक्षित

500 वर्षों के अथक संघर्ष के पश्चात नौ नवंबर 2020 को माननीय उच्चतम न्यायलय द्वारा अयोध्या पर राम मंदिर के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय देने के बाद, श्रीराम जन्मभूमि पर श्री रामलला के भव्य –दिव्य मंदिर का निर्माण कार्य तीव्र गति से सम्पूर्णता की दिशा में अग्रसर है ।

 मंदिर के भूतल का लगभग 95 प्रतिशत का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा आगामी 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों से भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन होना भी सुनिश्चित हो गया है। कुछ वर्ष पूर्व तक जो अयोध्या नगरी हिन्दुओं के संघर्ष की धरती थी जो आगामी 22 जनवरी 2024 को सर्व संतोषकारिणी नगरी बनने जा रही है।

 लंबे संघर्ष के बाद प्रभु श्रीराम लला अपने जन्मभूमि आवास में पधार रहे हैं और प्रत्येक सनातनी यह सोचकर हर्षित और प्रफुल्लित हो रहा है कि अयोध्या में श्रीरामलला के विराजमान हो जाने के बाद उनके सभी दुखों व चिंता का निवारण हो जाएगा। उत्तर प्रदेश ही नहीं संपूर्ण भारत में आनंद की बयार बह रही है और हो भी क्यों न हम सबके श्रीराम अपने घर आ रहे हैं।

यही कारण है कि अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार अयोध्या को अखिल विश्व की सुंदरतम नगरी बनाने के लिए अथक प्रयास कर रही है। एक समय था जब रामभक्त अयोध्या दर्शन करने जाते अवश्य थे किंतु हनुमानगढ़ी और कनक भवन के दर्शनों तक सीमित रह जाते थे और बहुत कम श्रद्धालु श्री रामजन्मभूमि के दर्शन करने के लिए जाते थे क्योंकि तम्बू में बैठे भगवान तक पहुंचना सरल नहीं था किन्तु उच्चतम न्यायालय का निर्णय आने के बाद परिवर्तन आया और 22 जनवरी 2024 के बाद परिस्थितियां पूरी तरह से बदलने जा रही है क्योंकि अब रामभक्तो व श्रद्धालुओं की प्रतीक्षा पूर्ण और धैर्य समाप्त हो रहा है।

भव्य श्रीरामलला मंदिर के उद्घाटन के पश्चात श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने वाली है, अयोध्या में उनके भव्य स्वागत, रहने -ठहरने व दिव्य दर्शन सुलभ करने के लिए व्यापक प्रबंध किये जा रहे हैं। अयोध्या व उसके आसपास के समस्त क्षेत्र को इस प्रकार से निर्मित किया जा रहा है कि श्रद्धालुओं को त्रेतायुग के समय का आभास हो और उस परिकल्पना को साकार करने के लिए मुख्यंमत्री योगी आदित्यनाथ जब से प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं तभी से जुटे हैं ।

विगत कई वर्षों से अयोध्या में भव्य दीपोत्सव का आयेजन किया जा रहा है जिसमें प्रभु श्रीराम माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ उसी प्रकार पुष्पक विमान से उतरते हैं जिस प्रकार वह त्रेता युग में उतरे थे। अयोध्या त्रेतायुग में जिस प्रकार प्रफृल्ल्ति व हर्षित हुई थी आगामी 22 जनवरी 2024 को अयोध्या व उसके आसपास के वातावरण को उसी प्रकार राममय करने की अभूतपूर्व तैयारी चल रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में अयोध्या को विश्व की सुंदरतम नगरी बनाने के लिए हर संभव व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।

22 जनवरी के बाद देश व विदेशों से लाखों की संख्या में रामभक्त अयोध्या पहुंचने वाले हैं इस बात को ध्यान में रखते हुए और अयोध्या को विश्व स्तर की धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करने के लिए करीब 3 हजार करोड़ रुपए लागत की विभिन्न अवस्थापना परियोजनाओं पर काम चल रहा है। अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के नाम पर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन रहा है और संभावना व्यक्त की जा रही है कि आगामी दिसंबर माह में उड़ानें भी प्रारंभ हो जायेंगी।

वंदेभारत ट्रेन लखनऊ से अयोध्या के बीच चली है और करीब आधा दर्जन अन्य रेल गाड़ियाँ अयोध्या से होकर जाने लगी हैं। अयोध्या से रामेश्वरम तक सीधी रेलगाड़ी चलाई गई है। अयोध्या का बदलाव दिखाने के लिए रेलवे स्टेशन को भव्य बनाया जा रहा है। पर्यटन विभाग अयोध्या को जोड़ने वाले सुल्तानपुर, बस्ती, गोंडा, अंबेडकरनगर और रायबरेली हाईवे पर बड़े द्वारों का निर्माण कर रहा है।

अयोध्या व आसपास के जिलों व कस्बों में भारी संख्या में होटलों आदि का निर्माण कार्य चल रहा है। तीर्थ यात्रियों को आकर्षित करने के लिए कई योजनाएं - अयोध्या में बाहर आने वाले तीर्थयात्री केवल अयोध्या मंदिर दर्शन तक ही सीमित न रह जाएं इसलिए तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं पर भी कार्य चल रहा है। पंचकोसी, चौदह कोसी तथा चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित धार्मिक स्थलों का भी सुंदरीकरण किया जा रहा है।

सरयू नदी में विहार के साथ मंदिरों के दर्शन के लिए क्रूज सेवा और रोमांचक वाटर स्पोर्टस सेवा भी प्रारंभ हो गई है। साथ ही अभी कई और योजनाएं प्रारंभ होने वाली हैं। भविष्य की दृष्टि से अयोध्या का दिव्य एवं नव्य विकास करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संकल्पवान है। मुख्यमंत्री का दायित्व सँभालने के साथ से ही वे अयोध्या पर विशेष ध्यान दे रहे हैं और प्रायः अयोध्या आकर सांधु -संतों का आशीर्वाद के लेने के साथ ही साथ विकास हेतु उनका परामर्श भी लेते हैं । 2017 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी जी अपने प्रथम कार्यकाल में 46 बार अयोध्या पहुंचे और इस कार्यकाल में भी उनका आगमन निरंतर हो रहा है।

वो अयोध्या सम्बन्धी प्रत्येक कार्य पर स्वयं दृष्टि रखते हैं। योगी जी के नेतृत्व में अयोध्या में हर वर्ष दीपोत्सव का आयोजन होने से अयोध्या को एक नयी पहचान मिली है। हर वर्ष दीपों की संख्या गिनीज़ बुक में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ती है। 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व इस बार भी अयोध्या में अयोजित भव्य दीपोत्सव ने एक नया रिकार्ड बना दिया है और अयोध्या की अनुपम छटा बिखर रही है । अयोध्या में विकास की गति को और तीव्र करने के लिए नौ नवंबर 2023 को अयोध्या में रामलला के दरबार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसने एक नया इतिहास रचा।

कैबिनेट बैठक के पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व प्रदेश सरकार के सभी मंत्री रामलला के दरबार पहुंचे और उनके प्रति अपनी आस्था प्रकट की। कैबिनेट ने हनुमानगढ़ी में भी हनुमान जी के दर्शन किये और पूजा की। हनुमानगढ़ी में महंत धर्मदास , महंत संतरामदस आदि ने सभी अभिनंदन किया और उसके बाद मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अप सभी के आशीर्वाद से अयोध्या विश्व की सबसे सुंदरतम नगरी बनेगी। अयोध्या तीर्थ विकास परिषद का गठन- अयोध्या में आयोजित बैठक में अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद व देवी पाटन धाम तीर्थ विकास परिषद के गठन को स्वीकृति दी गयी ।

अयोध्या कैबिनेट में शुक तीर्थक्षेत्र विकास परिषद के गठन का भी ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। ज्ञातव्य है कि अयोध्या के समग्र विकास के लिए पहले से ही केंद्र व राज्य सरकार के सहयोग से 30,500 करोड़ रुपये की कुल 178 परियोजनाएँ चल रही हैं। बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि अयोध्या के समग्र विकास के लिए अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद के गठन का निर्णय लिया गया है। यहां आने वाले करोड़़ों श्रद्धालुओं को उच्च स्तरीय पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ ही परंपरा और संस्कृति के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए आवश्यक नीतियां अब तीर्थ परिषद ही बनायेगा।

बलरामपुर जिले में स्थित देवीपाटन के भी समग्र विकास के लिए देवी पाटन धाम तीर्थ विकास परिषद व मुजफ्फरनगर के शुक तीर्थ धाम के विकास के लिए शुक तीर्थ धाम विकास परिषद के गठन का निर्णय लिया गया है। सभी विकास परिषद अपने -अपने क्षेत्रों में किसी भी परियोजना व विकास के प्रस्ताव में परामर्श व मार्गदर्शन करेंगे। बलरामपुर जनपद की अयोध्या से दूरी सड़क मार्ग से मात्र 90 किलोमीटर है यहाँ स्थित माँ पाटेश्वरी धाम एक महत्वपूर्ण तीर्थ है जहां नेपाल के श्रद्धालु भी आते हैं।

भारत मंदिर संग्रहालय बनाने का निर्णय - योगी सरकार ने अयोध्या की तहसील सदर के ग्राम माझा जमधरा की नजूल की 25 एकड़ भूमि पर्यटन विभाग को उपलब्ध करते हुए यहां भारतीय मंदिर वास्तुकला संग्रहालय का निर्माण कराने का निर्णय लिया है जिससे अयोध्या दर्शन के लिए आने वाले लोग भारत के वास्तु के बारे में भी जान सकेंगे। अलग -अलग कालखंड में किस- किस प्रकार के मंदिर बने, उन मंदिरो के इतिहास को इस संग्रहालय के माध्यम से सामने रखा जा सके इसके लिए प्रस्ताव पारित किया गया है। अयोध्या शोध संस्थान को विस्तार देते हुए अंतरराष्ट्रीय शोष संस्थान का स्तर दिये जाने का भी निर्णय हुआ है।

इससे विश्व में रामकथा साहित्य पर अध्ययन एवं शोध हो सकेंगे। वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक आदान- प्रदान के क्रम में उन देशों की रामलीला का मंचन अयोध्या में सांस्कृतिक प्रचार- प्रसार की दृष्टि से किया जाएगा। ध्यातव्य है कि श्रीराम के आदर्शों एवं व्यक्तित्व पर आधारित रामलीला विश्व के 40 देशों में आयोजित होती है। संस्थान के द्वारा शोध किये गये साहित्य को कम मूल्य पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए विदेश के विश्वविद्यालयों एवं संस्थाओं से समझौता किया जाएगा। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ विकास परिषद का अध्यक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बनाया जाएगा।

योगी सरकार ने 2019 में प्रयागराज में अपनी कैबिनेट की बैठक बुलाई थी उसके बाद दिव्य व भव्य कुंभ मेले का सफल आयोजन हो सका था। यह बात तो अब तय हो गई है कि आगामी दिनों में अयोध्या नगरी विश्व के मानचित्र पर अपनी महती उपस्थिति दिखाने में सफल रहेगी । दिव्य एवं भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हो जाने के बाद अयोध्या नगरी वैश्विक पटल पर छा जाएगी।

सत्य तो यह है कि अयोध्या नगरी आज अपनी पौराणिक आभा के अनुरूप सज संवर रही है। विकस के नये प्रतिमान गढ़ रही है। अयोध्या दीपोत्सव आज नये भारत की विशिष्ट पहचान बन गया है। परिक्रमा पथ हो या प्राचीन कुंड मार्ग हो या फिर मठ मंदिर, नव्य अयोध्या में चहुँ ओर भव्यता-दिव्यता दृष्टिगोचर हो रही है और हो भी क्यों ना, हमारे प्रभु श्रीराम अपने मंदिर में विराजने आ रहे हैं।

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