लखनऊ में दो दिवसीय राज्य स्तरीय एनएसएस सम्मेलन का शुभारंभ, विकसित भारत 2047 में युवाओं की भूमिका पर मंथन
लखनऊ में दो दिवसीय राज्य स्तरीय एनएसएस सम्मेलन का शुभारंभ, विकसित भारत 2047 में युवाओं की भूमिका पर मंथन
भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) क्षेत्रीय निदेशालय (उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड), लखनऊ के तत्वावधान में 19-20 मार्च 2026 को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में दो दिवसीय राज्य स्तरीय एनएसएस सम्मेलन का आयोजन शुरू हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और एनएसएस लक्ष्य गीत के साथ किया गया। उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय सेवा योजना निदेशालय, नई दिल्ली के प्रतिनिधि एवं युवा अधिकारी श्री कोमल सिंह ने कहा कि “मैं नहीं, तुम” का मूल मंत्र भले छोटा लगे, लेकिन इसका उद्देश्य अत्यंत व्यापक और प्रभावशाली है। उन्होंने बताया कि एनएसएस ने 40 हजार स्वयंसेवकों से बढ़कर आज 40 लाख स्वयंसेवकों तक का सफर तय किया है, जो देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने एनएसएस एलुमिनी के गठन और एनआईएस पोर्टल की शुरुआत की भी जानकारी दी, जहां एनएसएस से जुड़ी सभी गतिविधियों का डाटा उपलब्ध रहेगा। अध्यक्षीय उद्बोधन में लखनऊ विश्वविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अमरेंद्र कुमार ने कहा कि यह सम्मेलन एनएसएस के विकास को नई दिशा देगा। राज्य संपर्क अधिकारी डॉ. मंजू सिंह ने एनएसएस को एक जीवनशैली बताते हुए युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित होने का आह्वान किया। क्षेत्रीय निदेशक समरदीप सक्सेना ने बताया कि देश के केवल तीन राज्यों में इस प्रकार के आयोजन हो रहे हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है।
उद्घाटन सत्र के बाद तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ। प्रथम सत्र की अध्यक्षता माय भारत, उत्तर प्रदेश के राज्य निदेशक श्री अनिल सिंह ने की, जबकि डॉ. नीरज कुमार ने “माय भारत” पोर्टल की विस्तृत जानकारी देते हुए युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह पोर्टल 15 से 29 वर्ष के युवाओं को समाज सेवा, कौशल विकास और प्रशिक्षण से जोड़ने का माध्यम है। द्वितीय तकनीकी सत्र में सीक्रेट हार्ट डिग्री कॉलेज, सीतापुर के प्राचार्य डॉ. जॉन्सन जेवियर की अध्यक्षता में एनएसएस पुरस्कार प्राप्त युवा वक्ताओं—मोहित शर्मा, अंकुर मिश्रा, तनिषा त्रेहन और लक्ष्य—ने विकसित भारत 2047 में युवाओं की भूमिका, सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और नेतृत्व विकास जैसे विषयों पर विचार साझा किए। वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपनाने और वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान मजबूत करने पर बल दिया। तृतीय सत्र में पूर्व राज्य संपर्क अधिकारी डॉ. अंशुमाली शर्मा ने स्वयंसेवा को समाज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि एनएसएस न केवल सामाजिक बल्कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सशक्तिकरण का भी माध्यम है। लखनऊ विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी ने कार्यों के सामाजिक प्रभाव को समझने और बहुआयामी ज्ञान के विकास पर जोर दिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य एनएसएस के समक्ष चुनौतियों और उनके समाधान पर विचार-विमर्श, गुणवत्तापूर्ण गतिविधियों की समीक्षा तथा शिक्षण संस्थानों की भूमिका को सुदृढ़ करना है। साथ ही राष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना भी इसका लक्ष्य है।
दिन के अंतिम सत्र में साइबर सुरक्षा और साइबर क्राइम जागरूकता पर पूर्व डीआईजी श्री अरविंद चतुर्वेदी और डॉ. गौरव कुमार ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। इस अवसर पर “साइबर हाइजीन” पुस्तक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में युवा अधिकारी श्री राजेश तिवारी ने सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
