फतेहपुर सीकरी में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग डाटा से प्रदूषण नियंत्रण की पहल, जल संचय पर भी जोर

Feb 23, 2026 - 10:25
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फतेहपुर सीकरी में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग डाटा से प्रदूषण नियंत्रण की पहल, जल संचय पर भी जोर

फतेहपुर सीकरी में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग डाटा से प्रदूषण नियंत्रण की पहल, जल संचय पर भी जोर

फतेहपुर सीकरी (आगरा)। आदर्श नगर पालिका परिषद क्षेत्र में वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए ठोस पहल शुरू हो गई है। फतेहपुर सीकरी में वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र (Air Quality Monitoring Station) स्थापित किया गया है, जिसके डाटा का उपयोग कर धूल कणों को नियंत्रित करने की रणनीति तैयार की जाएगी। यह केंद्र NPCL KP2 इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन के पास स्थित है। हालांकि, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है, लेकिन आगरा कार्यालय द्वारा इसकी देखरेख की जा रही है। ग्रीष्म ऋतु शुरू होने से पहले ही क्षेत्र में PM2.5 और PM10 में मिट्टी व रेत के कणों की मात्रा बढ़ने लगती है। अप्रैल से मानसून तक थार मरुस्थल से आने वाली धूल भरी हवाओं के कारण AQI ‘बहुत खराब’ या ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाता है।

इसका प्रभाव आगरा महानगर सहित ताज ट्रिपेजियम जोन पर भी पड़ता है। नगर पालिका परिषद की चेयरपर्सन श्रीमती शबनम इस्लाम ने बताया कि फतेहपुर सीकरी धूल भरी हवाओं का प्रवेश द्वार है। अब मॉनिटरिंग केंद्र के डाटा के आधार पर इन्हें स्थानीय स्तर पर ही नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष भर नमी की कमी और वातावरण में शुष्कता प्रदूषण को बढ़ावा देती है। श्रीमती शबनम ने कहा कि मौजूदा पर्यावरणीय स्थिति में क्षेत्र के जलाशयों, तालाबों और पोखरों में मानसूनी जल का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि तेरह मोरी बांध की मरम्मत और पुनः संचालन के लिए ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी के अध्यक्ष को पत्र भेजा गया है। यदि मानसून का पानी बांध में संचित होने लगे तो प्रदूषण में स्वाभाविक कमी आएगी। नगर पालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन ने कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन का उपयोग किया जा रहा है। प्रमुख चौराहों पर फव्वारे भी लगाए गए हैं। प्रयास यह है कि स्थिति गंभीर होने से पहले ही नियंत्रण कर लिया जाए।

डाबर गांव के पूर्व प्रधान एवं भाजपा नेता धर्म सिंह महुरा ने कहा कि गंगाजल पाइपलाइन योजना पर कार्य शुरू हो चुका है, परंतु यह जल केवल पेयजल के लिए होगा। वास्तविक आवश्यकता भूजल स्तर सुधार की है, जो तालाबों, पोखरों और तेरह मोरी बांध को पुनर्जीवित कर ही संभव है। सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के जनरल सेक्रेटरी अनिल शर्मा ने कहा कि मानसून कालीन जल संचय ही क्षेत्र में जल संकट का स्थायी समाधान है। खेती और पशुपालन के लिए भूजल स्तर का सुधार अत्यंत आवश्यक है। प्रतिनिधिमंडल में अनिल शर्मा, राजीव सक्सेना और असलम सलीमी शामिल रहे।