फर्रुखाबाद में टेंडर घोटाला, सीएमएसडी स्टोर में नियमों को ताक पर रखकर लाखों-करोड़ों की निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल

Apr 27, 2026 - 20:37
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फर्रुखाबाद में टेंडर घोटाला, सीएमएसडी स्टोर में नियमों को ताक पर रखकर लाखों-करोड़ों की निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल
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फर्रुखाबाद में टेंडर घोटाला, सीएमएसडी स्टोर में नियमों को ताक पर रखकर लाखों-करोड़ों की निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल

फर्रुखाबाद/जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय के अंतर्गत संचालित सीएमएसडी स्टोर एक बार फिर विवादों में घिर गया है। यहां टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं और नियमों के खुलेआम उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, 17 अप्रैल 2026 को स्टोर प्रभारी को पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया गया था। यह आदेश उसी दिन दोपहर करीब 3 बजे रजिस्टर्ड भी कर दिया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद संबंधित अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उसी दिन रात 8:47 बजे टेंडर प्रक्रिया कराई। आरोप है कि इस प्रक्रिया में बाहरी जनपदों के ठेकेदारों के माध्यम से वाहनों की निविदाएं डलवाई गईं, जो न सिर्फ संदिग्ध है बल्कि विभागीय नियमों के भी खिलाफ बताई जा रही है। इतना ही नहीं, 20 अप्रैल को मानव संसाधन से जुड़ी एक और निविदा जारी कर दी गई, जिससे पूरे मामले पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं।

शिकायतकर्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह पूरी प्रक्रिया कुछ खास ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से की गई। मामले में करोड़ों रुपये के संभावित घोटाले की आशंका जताई जा रही है। इस पूरे प्रकरण को लेकर जिलाधिकारी को भी प्रार्थना पत्र सौंपा गया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। प्रशासन की चुप्पी से मामला और भी संदेह के घेरे में आ गया है। अब शिकायतकर्ता ने मामला उच्च स्तर तक पहुंचाते हुए महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा, लखनऊ से जांच की मांग की है।

 साथ ही संबंधित टेंडरों को निरस्त करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की गई है। मामले ने तूल पकड़ा, जांच की मांग तेज स्वास्थ्य विभाग से जुड़े इस गंभीर प्रकरण ने जिले में हलचल मचा दी है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल विभागीय लापरवाही बल्कि बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का मामला भी बन सकता है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हैं।