एटा में अलाव सिर्फ फोटो सेशन तक सिमटे, ज़मीनी हकीकत में ठंड से जूझते लोग
एटा में अलाव सिर्फ फोटो सेशन तक सिमटे, ज़मीनी हकीकत में ठंड से जूझते लोग
एटा में अलाव सिर्फ फोटो सेशन तक सिमटे, ज़मीनी हकीकत में ठंड से जूझते लोग
एटा। कड़ाके की ठंड में गरीबों और बेसहारा लोगों को राहत देने के लिए जलाए जाने वाले अलाव एटा में सिर्फ कागज़ों और फोटो सेशन तक ही सीमित रह गए हैं। जमीनी सच्चाई यह है कि जिन स्थानों पर अलाव जलने चाहिए थे, वहां सिर्फ सूखी लकड़ियां और पेड़ों की जड़ें पड़ी हुई हैं, लेकिन आग नदारद है। बस स्टैंड क्षेत्र का हाल बेहद चिंताजनक है। यहां रैन बसेरे के ठीक सामने पेड़ों की जड़ें और लकड़ियां तो रख दी गई हैं, लेकिन उनमें कभी आग जलाई ही नहीं गई। रात के समय ठंड से कांपते राहगीर, मजदूर और बेसहारा लोग इन्हीं लकड़ियों को देख कर मायूस लौट जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका और संबंधित विभागों ने केवल फोटो खिंचवाने के लिए चुनिंदा जगहों पर कुछ समय के लिए अलाव जलवाए, जिसके बाद सब कुछ ठंडा पड़ गया। सूत्रों की मानें तो अलाव जलाने के नाम पर भारी बजट निकाला गया है, लेकिन उसका उपयोग ज़मीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता। यही नहीं, कई स्थानों पर अलाव जलने की फर्जी रिपोर्ट भी तैयार कर दी गई, ताकि कागज़ों में सब कुछ सही दिखाया जा सके। यह पूरा मामला जबरदस्त और भयंकर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस लापरवाही और भ्रष्टाचार पर नाराज़गी जताई है।
उनका कहना है कि अगर समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो ठंड से होने वाली बीमारियों और मौतों की जिम्मेदारी प्रशासन को लेनी होगी। अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और नगर निकाय के अधिकारी इस खुले भ्रष्टाचार पर आंखें मूंदे रहेंगे, या फिर ठंड में ठिठुरते गरीबों को वास्तविक राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। एटा की जनता जवाब चाहती है।