पति और जेठ को मारकर आई हूँ, लाश उठवा लो, पिस्टल लेकर थाने पहुँची महिला

पति और जेठ को मारकर आई हूँ, लाश उठवा लो, पिस्टल लेकर थाने पहुँची महिला

Aug 13, 2025 - 08:38
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पति और जेठ को मारकर आई हूँ, लाश उठवा लो, पिस्टल लेकर थाने पहुँची महिला
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सीहोर । मध्य प्रदेश घरेलू हिंसा और पारिवारिक संपत्ति विवाद का दुखद अंत एक दोहरे हत्याकांड में हुआ, जब एक महिला ने अपने पति और जेठ की गोली मारकर हत्या कर दी। महिला ने अपराध में इस्तेमाल हथियार के साथ स्थानीय थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण किया और पुलिस के सामने अपना अपराध स्वीकार किया। 35 वर्षीय सविता, जो एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है, ने पुलिस को बताया कि वर्षों से घरेलू हिंसा और जमीन को लेकर चल रहे तनाव ने उसे यह कठोर कदम उठाने को मजबूर कर दिया। महिला का दावा है कि उसका पति और जेठ मिलकर उसे लगातार प्रताड़ित कर रहे थे और बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल रहे थे।

★ 5 करोड़ की जमीन बनी विवाद की जड़** पुलिस जांच में यह सामने आया है कि फोरलेन हाईवे पर स्थित लगभग 5 करोड़ रुपये मूल्य की पारिवारिक जमीन को लेकर महिला का अपने जेठ दिनेश और पति राधेश्याम से लंबे समय से विवाद चल रहा था। महिला ने आरोप लगाया कि जेठ इस जमीन को हथियाना चाहता था, और पति, उसके प्रभाव में आकर आए दिन मारपीट करता था। घटना के दिन भी कथित तौर पर महिला के साथ गाली-गलौज और मारपीट हुई, जिसके बाद उसने घर में रखी पिस्टल से पहले जेठ और फिर पति को गोली मार दी।

★ समाज को झकझोरने वाली घटना, कई सवाल भी खड़े हुए** यह घटना न केवल एक पारिवारिक त्रासदी है, बल्कि यह सवाल भी खड़े करती है कि एक शिक्षित महिला, जो समाज की सेवा में लगी थी, किस हद तक प्रताड़ना से गुजर रही थी कि उसने इतना बड़ा कदम उठाया। वहीं मृतकों के परिजनों ने इस पर संदेह जताया है और मांग की है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो, यह जानने के लिए कि हथियार कहां से आया और विवाद की जड़ कितनी गहरी थी।

★पुलिस की कार्रवाई और जांच जारी** एडिशनल एसपी नीतीश भार्गव ने बताया कि “यह मामला घरेलू तनाव और जमीन विवाद का प्रतीत होता है। महिला ने थाने में हथियार सहित आत्मसमर्पण कर दिया है। एफएसएल की टीम मौके पर जांच कर रही है, और सभी साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। कानूनी कार्रवाई जारी है।”

✍️ इस घटना से क्या सीखें?**

 * **घरेलू हिंसा को कभी नजरअंदाज न करें।** यह सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक और भावनात्मक पीड़ा भी होती है।

* **संवाद और मध्यस्थता का रास्ता अपनाएं।** कानून और परामर्श से कई झगड़े सुलझ सकते हैं।

* **हथियार की पहुंच पर रोक जरूरी है।** घरेलू विवादों में हथियारों की मौजूदगी त्रासदी का कारण बन सकती है।

 * **समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए सजगता ज़रूरी है।