जिन्दगी की हकीकत

Jun 05, 2024 - 07:41
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जिन्दगी की हकीकत

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जिन्दगी की हकीकत

आज के समय में मैंने यह देखा , समझा अनुभव किया है कि अक्सर मानव कुछ भी करने से पहले कहते हैं कि लोग क्या बोलेंगे ? दूसरे क्या सोचेंगे ? आदि - आदि आदतन इस चिन्ता से ग्रस्त हैं । कहते है कि दुनिया चढ़ते हुए को भी हँसती है व उतरते हुए को भी हँसती है । यह सबसे बड़ा रोग है लोग क्या कहेंगे ।

सबसे प्रधान कर्म है, जब मजदूरी में श्रम है, तो परिश्रम में कैसी शर्म है ।श्रम करने में शर्म क्यों?कोई काम छोटा बड़ा नही होता, बल्कि हमारा नजिरया जिस कारण हम श्रम को करने में शर्म महसूस करते है | असल मेंये बात, झिझक, नाम, मान लोग क्या कहेगे से आता है | लोग क्या कहेंगे इसी उधेडबुन में हम अपना जीने का तरीका क्यों बदलें , दुनिया से डरकर जिया तो जीने का मकसद व्यर्थ हो जाएगा ।

अपना आत्मविश्वास व आध्यात्मिक तौर तरीके से जिऐं फिर लोग क्या कहेंगे परवाह नहीं ।लोग क्या कहेंगे इस जुमले की तरफ ध्यान मत दीजिये |जब तक सांस है टकराव मिलता रहेगा| जब तक रिश्ते हैं घाव मिलता रहेगा|पीठ पीछे जो बोलते हैं, उन्हें पीछे ही रहने दो| लोग क्या कहते है क्या करते है इस बात की नकल मत करो, हमें जो करना है उसी दिशा में अपने चरणों व कदमों को धरो ।

हमें क्या करना है इस बात का चिंतन अपने विवेक से करना है, अपने जीवन के हर कार्य का निर्णय लेने में किसी से नहीं डरना है ।जो स्वस्थता, मस्तता व व्यस्तता के साथ - साथ आत्मस्त्तता का अभ्यासी होता है, वही इस दुनियां में सबका विश्वासी होता है । अगर हमारे कर्म, भावना और रास्ता आदि सही है तो गैरों से भी लगाव मिलता रहेगा ।

इसीलिए मन की भी सुनें व सकारात्मकता से आगे बढते रहें तो सफलता निश्चित मिलेगी ।इसलिये अगर हमे जिन्दगी में कुछ खास करना है तो अपनी यह बनाई हुई यह कारावास रूपी सोच त्यागे । प्रदीप छाजेड़

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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