ज्ञान बनाम विवेक

Oct 13, 2023 - 14:28
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ज्ञान बनाम विवेक

ज्ञान बनाम विवेक कुँए का मेंढक यही सोचता हैं की दुनिया उतनी ही बड़ी ही और वह दुनिया के चक्कर लगा आया।यह उसके ज्ञान का अभाव हैं दुनिया तो बहुत बड़ी हैं एक से एक ज्ञानी, योग्य, धानाड्य यहाँ पर हैं फिर में ही क्यों किस बात का मेरा किस बात का , यह अहंकार की टंकार से विनय विवेक नम्रता की विदाई हो जाती हैं और क्रोध की परिणिति। ज्ञानी ज्ञान का अहं और तेजी दिखाता है जबकि विवेकशील सब तर्क ठण्डे दिमाग से ही देता है । यह जानने के लिए कि क्या ग़लत है क्या है सही। ज्ञानी प्रायः अपने ज्ञान की अकड़ में अड़ जाता है । जबकि इसके विपरीत विवेकशील कभी किसी बात की पकड़ में नहीं अड़ता हैं ।इंसान स्कूली शिक्षा के साथ - साथ जीवन मूल्यों और विशेषकर व्यवहारिक ज्ञान सीखे।जीवन मे किस प्रकार इसका समावेश हो और कैसे हम अपने जीवन को ढाल सके यह बहुत अधिक आवश्यक हैं।यह केवल हमारे जीवन में आयोजनात्मक नही प्रयोजनात्मक हो,मूलभूत सारगर्भित शिक्षा जीवन में उतरें।ताकि जीवन की जटिल परिस्थितियाँ एवं सभी समस्याओं का समाधान हम कर सके ।एक ऐसा ज्ञान-गुण-शिक्षा जो कभी किताबों में नही बल्कि जीवन व्यवहार में घर-परिवार - पाठशाला- दोस्तों-रिश्तों आदि से मिला और मिला तो ऐसा मिला की ताउम्र निभा सके इतना जीवन में रचा बसा सके। यही कहेंगे सारांश में कि ज्ञानी तो भिड़ जाता है अपने सीखे ज्ञान को येन-केन-प्रकारेण सही साबित करने में। जबकि विवेकशील असली सच क्या है, यह जानने में आगे बढ़ जाता है ।इस बहस में यदि उसे दूसरे का दृष्टिकोण सही लगता है तो वह उसे सही से स्वीकारने में जरा भी नहीं हिचकिचाता हैं । ज्ञान बनाम विवेक दोनों में मूलभूत यही अन्तर है । प्रदीप छाजेड़ ( बोरावड़)

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