PK-ममता! I-PAC पर ED का सबसे बड़ा खुलासा

Jan 11, 2026 - 10:02
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PK-ममता! I-PAC पर ED का सबसे बड़ा खुलासा

हिंदुस्तान की राजनीति में 'चुनाव' और 'पैसा' दो ऐसे पहलू हैं जिनका रिश्ता बहुत पुराना है, लेकिन जब यह पैसा कोयले की तस्करी से आए और हवाला के रास्तों से होते हुए बड़े चुनावी रणनीतिकारों के दफ्तर तक पहुँचे, तो मामला बेहद गंभीर हो जाता है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने एक ऐसा धमाका किया है जिसने पश्चिम बंगाल से लेकर गोवा तक के सियासी गलियारों में तहलका मचा दिया है।

दावा किया जा रहा है कि चुनावी मैनेजमेंट करने वाली मशहूर संस्था I-PAC के गोवा ऑपरेशंस के लिए करोड़ों रुपये की फंडिंग की गई थी और यह पैसा किसी व्यापार से नहीं, बल्कि बंगाल की 'काली डायरी' यानी कोयला तस्करी से निकला था। आखिर कैसे छह अलग-अलग हाथों से गुजरते हुए यह रकम गोवा पहुँची? और कौन है वो 'मुन्ना' जिसने इस पूरे नेटवर्क को मुमकिन बनाया? ED की चार्जशीट और जांच में जो कड़ियां सामने आई हैं, वे किसी सस्पेंस एवं फिल्म जैसी हैं। एजेंसी का दावा है कि करीब 20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को छह अलग-अलग स्तरों पर घुमाया गया ताकि पुलिस या जांच एजेंसियों को इसकी कानो-कान खबर न हो। इस खेल की शुरुआत दिल्ली की एक फाइनेंस कंपनी के पूर्व निदेशक से हुई, जिसने 'मुन्ना' नाम के एक बिचौलिए से संपर्क किया। इसके बाद मुन्ना ने कोलकाता के एक हवाला मैनेजर को काम सौंपा, जिसने स्वीकार किया है कि उसने 2021-22 के दौरान गोवा में नकद डिलीवरी करवाई थी।

यह पैसा सीधे I-PAC को न देकर एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के कर्मचारी को दिया गया, जो उस समय गोवा विधानसभा चुनाव के लिए कैंपेन संभाल रही थी। इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू इस पैसे का स्रोत है। ED के मुताबिक, अनूप माजी के नेतृत्व वाले एक सिंडिकेट ने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की खदानों से अवैध रूप से कोयला निकाला। यह चोरी का कोयला बंगाल और झारखंड की फैक्ट्रियों में नकद बेचा गया। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने कुल 2,742 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। इसी काली कमाई का एक हिस्सा राजनीतिक फंडिंग और चुनावी मैनेजमेंट में इस्तेमाल किया गया। आसनसोल के भामुरिया इलाके में एक गुप्त दफ्तर बनाया गया था, जहाँ सिंडिकेट के सदस्य सारा कैश इकट्ठा करते थे और फिर उसे हवाला नेटवर्क के जरिए सफेद करने या चुनाव में खपाने के लिए भेजते थे। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद ED ने एक्शन मोड में आते हुए 8 जनवरी को दिल्ली और कोलकाता में 10 अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।

जांच की आंच I-PAC के सह-संस्थापक और निदेशक प्रतीक जैन तक पहुँच गई है। कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके आवास पर भी तलाशी ली गई। ED ने हाईकोर्ट को बताया है कि जब यह लेनदेन हो रहा था, तब प्रतीक जैन ही गोवा में चुनावी कंसल्टेंसी का सारा काम देख रहे थे। हालांकि, अभी अदालत में इन आरोपों का परीक्षण होना बाकी है, लेकिन ED ने साफ कर दिया है कि वह राजनीतिक फंडिंग के इस 'मनी ट्रेल' की तह तक जाकर रहेगी। यह मामला न केवल चुनावी शुचिता पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे अंडरवर्ल्ड और तस्करी का पैसा लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रहा है।