एटा के स्कूलों की किताबों की एक ही दुकान पर बिक्री, अभिभावकों को पूरा सेट खरीदना होगा, मोटी कमाई का हो रहा है खेल

एटा के स्कूलों की किताबों की एक ही दुकान पर बिक्री, अभिभावकों को पूरा सेट खरीदना होगा, मोटी कमाई का हो रहा है खेल

Apr 05, 2025 - 08:23
Updated: 1 year ago
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एटा के स्कूलों की किताबों की एक ही दुकान पर बिक्री, अभिभावकों को पूरा सेट खरीदना होगा, मोटी कमाई का हो रहा है खेल

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एटा के स्कूलों की किताबों की एक ही दुकान पर बिक्री, अभिभावकों को पूरा सेट खरीदना होगा, मोटी कमाई का हो रहा है खेल

एटा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई हलचल मची हुई है। अब जिले के अधिकांश स्कूलों में पढ़ने वाली किताबें एक ही दुकान से मिल रही हैं। यह दुकान जिले के अभिभावकों के लिए समस्या का कारण बन चुकी है। सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को अब पूरे किताबों का सेट एक ही दुकान से खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, जिले के विभिन्न सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए किताबों का पूरा सेट अब एक ही दुकान से बेचा जा रहा है। पहले ये किताबें अलग-अलग जगहों पर उपलब्ध होती थीं, लेकिन अब इनकी बिक्री का अधिकार एक ही दुकान को दे दिया गया है। इससे स्कूलों में पढ़ाई के लिए आवश्यक किताबें खरीदने की प्रक्रिया को सरल बनाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसका उल्टा असर अभिभावकों पर पड़ा है।

अभिभावकों का कहना है कि किताबों के पूरे सेट को खरीदने के लिए उन्हें अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। पहले जहां बच्चों को सिर्फ कुछ किताबें ही खरीदनी पड़ती थीं, अब उन्हें किताबों का पूरा सेट एक साथ खरीदना पड़ता है। इस सेट में सभी विषयों की किताबें, नोटबुक्स, और अन्य शैक्षिक सामग्री शामिल होती है, जिससे अभिभावकों को एक साथ हजारों रुपये का खर्च उठाना पड़ रहा है। अगर किसी बच्चे की एक या दो किताब की जरूरत है तो ये दुकानदार सेट से खोलकर किताब नही देते, कहते हैं पूरा सेट लेना पड़ेगा? 2 किताबों के लिए वो हजारो रुपये ख़र्च करता है? बाहरी शिक्षा नीति ! अर्थशास्त्रियों और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम कई कारणों से अभिभावकों के लिए आर्थिक बोझ बढ़ा सकता है। एक ही दुकान से किताबों की बिक्री के कारण प्रतिस्पर्धा कम हो गई है, और दुकानें अभिभावकों से अधिक पैसे ले रही हैं। इसके अलावा, जब किताबों का एक सेट एक ही दुकान से लिया जाता है, तो अभिभावक उस पर कोई और विकल्प नहीं चुन सकते, जिससे उनके पास किफायती विकल्प कम हो जाते हैं। इसके बावजूद, दुकान मालिकों का कहना है कि उन्होंने यह कदम बच्चों के लिए एक समान और बेहतर शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए उठाया है। उनका कहना है कि स्कूलों के पाठ्यक्रम में बदलाव के कारण किताबों का सेट पहले से ज्यादा महंगा हो गया है, लेकिन इसे एक ही जगह से उपलब्ध कराने से बच्चों को कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन दुकानदार ऊँचे दाम में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं जो स्कूलों की मिलीभगत का नतीजा है। स्कूलों की लाख़ों की कमाई से अगर थोड़ा बहुत अपने आकाओं को चढ़ावा चढ़ा देने से उन पर कार्यवाही नहीं करते।

अभिभावकों ने इस निर्णय को लेकर जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की है। उनका कहना है कि यदि यह स्थिति इसी तरह जारी रही, तो वे बच्चों की पढ़ाई के लिए आवश्यक किताबों को नहीं खरीद पाएंगे। जिले के का शिक्षा विभाग इस मामले को कब लेगा गंभीरता से हर साल यही सबाल उठता है। अंत में, यह सवाल उठता है कि क्या यह कदम बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में सहायक साबित होगा, या यह केवल व्यापारिक फायदे के लिए उठाया गया एक कदम है, जिससे अभिभावकों का आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। जिले के शिक्षाविदों और प्रशासन को इस मुद्दे पर ध्यान देना होगा ताकि किसी भी बच्चे की पढ़ाई में कोई रुकावट न आए।

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SuragBureau

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