गुण ख़रीदे नहीं जा सकते

Sep 3, 2023 - 10:56
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गुण ख़रीदे नहीं जा सकते
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गुण ख़रीदे नहीं जा सकते

माना कि दुनिया में पैसे से बहुत कुछ खरीदा जा सकता हैं परन्तु गुण को कोई खरीद ले पैसों से ऐसा हो नहीं सकता हैं ।

क्योंकि वह तो परस्परता, सद्व्यवहार और सात्विक आचरण आदि के उच्च गुणों के अनुकरण से पाया जा सकता है। इंसान वही हैं जो इंसान से प्यार करता है । मन में जिसके हर पल दया का संचार होता हैं । सहयोग-सेवा के लिए हर पल तैयार रहता है ।

असली मानव कहलाने का वही हक़दार है ।अपने विशुद्ध स्वभाव से हट कर न बनें हम मानव से दानव इस कटु सत्य से ध्यान हमारा हटे नहीं ।हमें अपनी आत्मा पर जो गरूर का पर्दा पड़ा हुआ है उसे हटाने की भरपूर कोशिश गुणों के विकास से करनी है।इंसानियत हमारी जिंदा रहें तो हम जिंदा है,बिना इसके हम में और मुर्दा में कोई अंतर नहीं बल्कि उससे भी बदतर है।

हम चेते अब तो।जब जागे ,तभी सवेरा।व्यक्ति और समाज की चिंतनीय स्थिति का समाधान है इंसानियत।अमीरी और गरीबी की भेदरेखा को मिटाने वाला हथियार है इंसानियत।शरीरधारी इंसान तो आयुष्य सम्पन्न होने पर मरता है लेकिन इंसानियत हमेशा जिंदा रहती है तीनों काल में।हम इंसानियत पर हैवानियत को हावी होने का मौका नहीं दें अपने विवेक से ।यहीं सर्वोत्तम है।

क्योंकि गुणों का अपना मूल्य व्यवहार हैं ।एक दूसरे के प्रति सही से आदर - सत्कार, सुन्दर तौर तरीक़े जीवन के , परस्परता के सलीके , अपने लिए दूसरों द्वारा आदर-सन्मान , उच्च चरित्र आधारित बहुमान ,व्यावहारिक बुद्धि, आचरण की शुद्धि , इमानदारी, सत्यनिष्ठा व स्वयं की अर्जित प्रतिष्ठा आदि है न कि पैसों का इन सबमें आधार।तभी तो कहा है कि गुण पैसे से नहीं ख़रीदे जा सकते हैं । प्रदीप छाजेड़ ( बोरावड़)

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