फूलन देवी को गांव में सबके सामने निर्वस्त्र घुमाया था, ऐसा लिया बदला कि CM को देना पड़ गया स्तीफा

Jul 30, 2023 - 11:17
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फूलन देवी को गांव में सबके सामने निर्वस्त्र घुमाया था, ऐसा लिया बदला कि CM को देना पड़ गया स्तीफा

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 Fulan devi :  सियासत का ऐसा नाम है जिनकी मौत के 22 साल बाद भी अहमियत कम नहीं हुई है। निषाद पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के विकास राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार संजय निषाद ने उनकी हत्या की सीबीाई जांच करवाने की मांग की है।

 11 साल की उम्र से ही बागी तेवर दिखाने वाली और 38 साल की उम्र में गोली का शिकार हुईं फूलन देवी ने कुछ ही साल की सियासत में अपना नाम बना लिया। आइए जानते हैं उस 'दस्यु रानी' की कहानी जिसपर फिल्म बनी तो इसे देखकर लोगों के आंसू निकल आए।

घर से ही शुरू हुई थी हक की लड़ाई 10 अगस्त 1963 को यूपी के जालौन जिले के गोरहा गांव में एक गरीब परिवार में फूलन देवी का जन्म हुआ था। पिता का जब निधन हो गया तो फूलन के चाचा ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया और हक जताना शुरू कर दिया। इसके बाद फूलन देवी छोटी सी उम्र में ही अपनी जमीन लेने पर अड़ गईं और खेत के बीचो बीच धरने पर बैठ गई। इसके बाद उनके परिवार के ही लोगों ने पिटाई की और उसका ध्यान देना बंद कर दिया।

11 साल की ही उम्र में जबरदस्ती फूलन की शादी 35 साल के पुत्तीलाल मल्लाह से कर दी गई। फूलन का पति बहुत ही क्रूर था। अकसर फूलन को पीटता था। आखिरकर एक दिन इस नरक से फूलन भाग निकलीं। बीहड़ में गुजर हुई जिंदगी पति को छोड़ने के बाद जब फूलन अपने पैतृक गांव वापस गईं तो वहां उनको किसी ने भाव नहीं दिया। किसी ने अपनापन नहीं दिखाया। घरवाले भी अनाड़ियों जैसा व्यवहार करते थे।

बात-बात पर हाथापाई होने लगती थी। एक दिन तंग आकर फूलन ने घर छोड़ दिया और बीहड़ों का रुख कर लिया। यहीं फूलन डकैतों की हत्थे चढ़ गईं और सरदार बाबू गुज्जर ने उन्हें अपने साथ रख लिया। कहीं और आसरा ना मिलने की वजह से यह फूलन की मजबूरी थी। वहां बाबू गुज्जर फूलन से रेप करता था और कैदियों की तरह रखता था। प्यार भी लंबे समय तक नहीं टिका गुज्जर के साथ रहने के दौरान फूलन देवी के साथ गैंगरेप भी हुआ।

उसी गैंग का एक सदस्य विक्रम मल्लाह शायद फूलन से प्रेम कर बैठा था। उसे यह सब अच्छा नहीं लगता था इसलिए फूलन को बचाने का फैसला कर लिया। एक दिन विक्रम ने गुज्जर को गोली मार दी और फिर फूलन के साथ रहने लगा। लेकिन यह बात ठाकुरों को नागवार गुजरी और जेल से छूटकर आए श्रीराम लाला और लाला ठाकुर ने विक्रम मल्लाह की हत्या कर दी।

इसके बाद फूलन का अपहरण कर लिया गया और बेहमई गांव लाया गया। गांव में निर्वस्त्र कर कराई थी परेड फूलन के पीछे ठाकुर गैंग हाथ धोकर पड़ गया। कहा जाता है कि बेहमई गांव में फूलन के साथ गैंगरेप किया गया और निर्वस्त्र करके पूरे गांव में घुमाया गया। यह सब फिल्म में दिखाया गया है हालांकि इसकी सच्चाई की पुष्टि नहीं की गई है। इतना तो हर हाल में शक था कि फूलन तीन हफ्ते तक गांव में ठाकुरों के कब्जे में थीं। वहां से फूलन किसी तरह भाग निकलीं।

इसके बाद फूलन और अंगार बन गईं और डाकुओं वाली वर्दी भी पहन ली। 22 लोगों को कतार में खड़े करके भून डाला बेहमई गांव में हुई बेज्जती को फूलन भुला नहीं पा रही थीं। उन्होंने विक्रम सिंह गैंग के एक डाकू मान सिंह की मदद से अपना गैंग खड़ा कर दिया और फिर एक दिन बेहमई गांव पहुंच गईं।

 उन्होंने 22 ठाकुरों को उनके घर से निकाला और फिर वहीं ले गईं जहां उन्हें निर्वस्त्र कर घुमाया गया था। कहा जाता है कि फूलन ने सबको कतार में खड़ा किया और अपने साथ बदतमीजी करने वालों का पता पूछा। आखिरकार सबकतो घुटनों के बल बैठाया और एक तरफ से गोली मार दी। फूलन पर रखा गया इनाम इस घटना के बाद फूलन को देश तो क्या दुनिया जानने लगी।

केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी। वहीं उत्तर प्रदेश में वीपी सिंह की सरकार थी। मीडिया फूलन देवी को बैंडिट क्वीन के नाम से पुकारने लगा। पुलिस ने फूलन पर इनाम रखा पर दो साल तक वह हत्थे नहीं चढ़ीं। बेहमई में हुए नरसंहार की वजह से मुख्यमंत्री वीपी सिंह को इस्तीफा तक देना पड़ गया।

दो साल तक खाक छानने के बाद भी पुलिस फूलन देवी को गिरफ्तार नहीं कर पाई। आखिरकार तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने भिंड के एसपी राजेंद्र चतुर्वेदी को फूलन देवी से सरेंडर करवाने की जिम्मेदारी दी। 13 फरवरी 1983 को मध्य प्रदेश के भिंड जिले के एमजीएस कॉलेज में फूलन ने गैंग के साथ आत्मसमर्पण कर दिया।

1994 में फूलन देवी जेल से बाहर आईं और उनके जीवन की नई पारी शुरू हो गई। वह समाजवादी पार्टी से जुड़ गईं और 1996 से 1998 तक सांसद के तौर पर काम किया। 1999 में वह दोबारा चुनाव जीतीं। 25 जुलाई 2001 को राजधानी दिल्ली में ही उनके आवास के बाहर शेर सिंह राणा ने उन्हें गोली मार दी। शेर सिंह राणा ने हत्या के बाद कहा था कि अब जाकर बेहमई हत्याकांड का बदला पूरा हुआ।

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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