आपसी एकता का बल

Feb 16, 2024 - 21:21
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आपसी एकता का बल

आपसी एकता का बल

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 प्राचीन काल में बहुत घना एक कजरी बन था ।यह कजरी बन नाना प्रकार के फल फूल पौधों वृक्षों का रमणीक बन था। यह बन पूरब पश्चिम दक्षिण की ओर तलावों से घिरा हुआ था। जिस के उत्तरी भाग में विशाल हिमगर था। जिस से यह कजरी बन बहुत सुरक्षित था । इस घने बडे कजरी बन में नाना प्रकार के पक्षियों का विशाल समूह रहा करता था।

 इस कजरी बन के सभी पक्षियों में आपसी सद्भावना प्रेम का सुंदर वातावरण था । सभी पक्षी मिलजुल कर रहकर बन के मीठे फलों को खाया करते थे। बन के अंदर बह रही नदियों का शीतल जल पिया करते थे। इस कजरी बन में किसी राजा महाराजाओं द्वारा मंदिर मस्जिद भी बनी हुई थी ।जिन पर यह पक्षी अपनी भावनाओं के अनुसार बड़े आनंदपूर्वक बैठा करते और उनमें पूजा किया करते थे ।आपसी मंदिर मस्जिद का कोई भेदभाव नहीं रखते थे ।

इस प्रकार इन पक्षियों का कजरी बन में बड़ी सदभावना पूर्वक जीवन यापन हो रहा था ।आपसी बैर भाव का कोई वातावरण नहीं हुआ करता था। विद्वानों का कहना है कि मनुष्य जैसा भोजन करता है ।उसकी बुद्धि भी उसी प्रकार से हुआ करती है। दीपक अंधेरा खाता है इसीलिए काजल उगलता है। मांसाहारी की बुद्धि तामसी मनोवृति होती है और शाकाहारी कीबुद्धि प्रेम सद्भावना की होती है।

कजरी बन में कुछ पंछी फल फूल खाने वाले थे। वही कुछ पंछी ऐसे भी थे जो घृणित भोजन मांस मछली चीजों को खाया करते थे। इसीलिए फल खाने वाले तोता और मांसाहारी गंदी चीजे को खाने वाले कौवा में आपसी झगड़ा होने लगा। धीरे-धीरे यह झगड़ा चरम सीमा पर पहुंच गया ।कार्गो ने कजरी बन काबंटवारा कर लिया। अधिकांश कौवे अपना अलगहिस्सालेकर अलग रहने लगे ।

कौवा ने अपने हिस्से के कजरी बन से तोता मैना तमाम फल फूल खाने वाले पक्षियों को भगा दिया। इस कजरी बन का नाम पार्क बन रख दिया । कजरी बन के दूसरे हिस्से में सभी प्रकार के पक्षी रहने लगे। इस हिस्से के कुछ कौवे रह गए। इस कजरी बन का नाम रामबाग रखा गया। आगेचलकर रामबाग कजरी बन और कजरी बन पार्क मेंलोकतंत्र पद्धति पर अपने-अपने राज के प्रधानमंत्री चुने गए। कौवा के राज में कौवे को ही राजा बन गया ।

लेकिन फलाहारी शाकाहारी रामबाग कजरी बन में जो हर प्रकार के पंछी रह गए थे। उन सब ने चतुर मधुर वाणी बोलने वाली कोयल को अपना राजा चुन लिया ।कोयल ने रह गए कार्गो के बल पर बहुत दिनों तक राज किया ।तुष्टिकरण नीति के कारण चालक कोयल बहुत दिनों तक रामबाग कजरी बन में राज किया । एक बार ऐसा हुआ पांच छह कौवो का झुंड राम बाग कजरी बन में आ गया ।

बाग में आकर कौओ ने कोयल से कहा -दीदी हम तुम्हारे वंशज हैं ।कहीं तुमसे दूर चले गए थे ।अव तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं ।सभी पंछियों की पंचायत बैठी ।कोयल के कहने पर इन कौओ को कजरी बन राम बाग में शरण दे दी गयी। इन कौओ ने आसपास के गांव के अन्य कौओ को भी कजरी बन राम बाग में बुला लिया। कोयल इस बात से खुश थी की पक्षियों में अब उसका बहुमत है ।

अब सब पक्षी उसकी बात मानेंगे ।इस प्रकार इन कागो की कजरी बन रामबाग में अच्छी भीड़ होने से कौवा सभी पक्षियों पर हावी होने लगे । बाग के पक्षियों को सताने लगे । कौओ की इस हरकत को देख कर पंछियों की पंचायत बैठी। कोयल की तुसीकरण नीति के कारण कोयल को राजा पद से हटा दिया गया और कोयल केस्थान पर राजहंस मोर को राजा चुन लिया गया और मोर ने तोतों के कहने पर अपना मंत्री जटायु गिद्धराज को बनाया।

जटायु महामंत्री ने इन झगड़ालू जमाती कार्गो से कहा की अगर तुम्हें इस रामबाग कजरी बन में रहना है तो रामबाग के पक्षियों के द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार चलना पड़ेगा । अगर ऐसा नहीं करते हो तो तुम्हें राम बाग से जाना पड़ेगा। लेकिन इन आए हुए कागो पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और उन्होंने साफ कह दिया - इस रामबाग पर मेरा भी अधिकार है। बाग में तो सभी पक्षियों का रहने का अधिकार होता है । फिर इन कौओ ने अपनी हेकड़ी के द्वारा उत्पात मचाना शुरू कर दिया।

बाग के पक्षियों को सताना शुरू कर दिया ।'साधु संतो द्वारा भेजें गए भोजन को छीन झपट कर खाना शुरू कर दिया और मयूर राजा की बात को ना सुनना इन कौऑ की आदत पड़ गयी । कौओ के आतंक उत्पातो से रामबाग कजरी बन में आने वाले साधु संत तथा सारे पक्षी परेशान हो उठे ।एक दिन ऐसा हुआ नाग पंचमी के दिन गांव वालों ने पक्षियों के खाने के लिए दो भगोना खीर रामबाग कजरी बन मंदिर को भोग लगाने के लिए भेजी ।

साधुओ ने भोग लगाने के बाद उस खीर को तमाम केलो के पत्तों पर रखकर मंदिर के सामने बने चबूतरे पर रख दिए ।सभी पक्षी प्रेम से खाने लगे ।तभी उत्पाती कौओ ने खा रहे पक्षियों की खीर की छीना झपट्टी करने लगे और भगोना की खीर पर अपनी टट्टी कर दी । जिससे उस खीर को साधुओं को फेंकना पड़ा । कौओ ने उस खीर बड़े मजे से खाया। कौओ की इस हरकत से सभी पंछी तथा साधु भूखे रह गए।

कौओकी रोज-रोज की इन हरकतों से परेशान होकर आने वाले साधु तथा रामबाग के सभी पक्षी परेशान रहने लगे । इस विषम स्थिति से सभी पक्षी परेशान हो उठे और उन्होंने एक आपात कालीन पंचायत की। पंचायत में निर्णय लिया गया की सभी कौओ को बाग से तत्काल निकाला जाए । साधुओं को मना कर उन्होंने लाया जाए। यह सब काम कबूतर जटायू और चील सैना को सौंपा गया।

 चील सैना ने अपनी चौच से मार-मार कर इन उत्पाती सभी,कौओ को घायल कर दिया और उन्हें भगा दिया कोयल ने इन कौवा के विषय में बहुत शोर मचाया लेकिन रामबाग के पंछियों के आपसी एकता के कारण कोयल की बात किसी ने नहीं सुनी और रामबाग में एक बार फिर शांति स्थापित हो गई। मयूर राजा ने स्पष्ट कह दिया जब हिंसा पर अहिंसा का काबू नहीं होता है तो अहिंसा भी हिंसा बन जाती है और जैसे को तैसा जवाब देती है।

रामबाग के पक्षियों की एकता तथा जटायु की कठोर नीति के कारण कजरी बन राम बाग में शांति वातावरण का रामराज आ गया । उत्पाती आतंकी कौओ को रामबाग से भागना पड़ा और जो रह गए वे सभी कौवे लाइन पर आ गए। एकता में बहुत बड़ा बल होता है ।

 बृज किशोर सक्सेना किशोर इटावी कचहरी रोड मैनपुरी

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