क्षमता से अधिक बंदियों का बोझ और जमानतियों के अभाव में जेलों में बंद बदियों की स्थिति सुधर नहीं पा रही!!

Jan 04, 2024 - 09:57
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क्षमता से अधिक बंदियों का बोझ और जमानतियों के अभाव में जेलों में बंद बदियों की स्थिति सुधर नहीं पा रही!!

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क्षमता से अधिक बंदियों का बोझ और जमानतियों के अभाव में जेलों में बंद बदियों की स्थिति सुधर नहीं पा रही!!

अधिकारी अपने स्तर से करने की बहुत कुछ चाह रखते..!! 

उत्तर प्रदेश की जेलों में बहुत से बंदी ऐसे हैं जो छोटे छोटे मामलों में भी जमानते न मिल पाने के कारण एक प्रकार से मानसिक यातनायें झेल रहें हैं!हालाकि जेलों को बन्दी सुधार ग्रह बनाने कोशिश तो परवान चढती हैं लेकिन जेलों में क्षमता से अधिक बन्दियों की संख्या ने पूरी व्यवस्था को पलिता लगाकर रखा है ।

जेल अधिकारी अपने स्तर से करने की बहुत कुछ चाह रखते है लेकिन बहुत कुछ ऐसा भी है जो उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।जेलों में बन्दियों में मानसिक व बौद्धिक सुधार लाने के उददेश्य से जेलों को बन्दी सुधार ग्रह तक की उपाधि दी गई है लेकिन यह उपाधि कुछ जिलों में केवल नाम तक ही सीमित रह गई!

सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हो सका कुछ अधिकारी इच्छा शक्त्ति दिखाकर एवं जेलों में बन्द बंदियों की हालत देखकर अपने स्तर से बहूत कुछ सुधारने का प्रयास करते हैं।जबकि सुधार ग्रह के नाम पर सरकार की तरफ से कोई भी ठोस योजना नही बन पाती है!अधिकारी अपने स्तर से करने की इच्छा तो रखते है लेकिन वर्क लोड इतना ज्यादा है कि उनकी यह सोच दबी रह जाती है।

मानवीय आधार पर चाहकर भी वह एक लिमिट से ज्यादा वह मदद नहीं कर सकते क्यूकि बहुत सी कानूनी बाध्यतायें आड़े आ जाती है हालाकि लगभग सभी जेलों का हाल एक सा नही हैं लेकिन यूपी की ज्यादातर जेल की बात करें तो यहाँ पर भी अधिकता से ज्यादा बंदी भरे पड़े है समय समय पर सामाजिक संस्थायें मदद को आगे भी आती रहती है लेकिन बंदियों के न्याय के सन्दर्भ में कुछ सवाल ऐसे है जो बार बार मन में उठते है!

स्थानीय स्तर पर छोटे मोटे मामलों में बन्दियों को जमानत तो मिल जाती है।और जमानती भी उपलब्ध हो जाते है लेकिन कुछ बन्दी ऐसे भी है जो जमानत हो जाने के बावजूद जमानतीयों के आभाव में बेवजह जेल काट रहे हैं!इनमें पुरूष बन्दियों के अलावा महिला बन्दी भी है सबसे ज्यादा दिक्कत उन बन्दियों की हैं जो दूसरे जिले से बाहर के कैदी और उनकी जमानत देने के लिए स्थानीय स्तर पर कोई जमानती तैयार नही होता या कोई देना नहीं चाहता।

हालाकि जेल में मजिस्ट्रेट ऐसे मामलों में बैठकर सुनवाई करते है और पर्सनल बोन्ड पर भी रिहाई कराते है लेकिन फिर भी बहुत से बन्दी ऐसे है जो जमानत होने के बावजूद भी जमानतीयों की आश में रिहा होने के लिए गेट पर टकटकी लगायें हसरतों और उम्मीदों से समय काटने पर विवश रहते है कि कोई आएगा और हमारी जमानत लेकर हमें बाहर निकलवाएगा!

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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