खानकाहे व दरगाहें मानवता का प्रतीक और तर्जुमान है इंसानियत की : सज्जादा नशीन

Jan 07, 2026 - 10:50
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खानकाहे व दरगाहें मानवता का प्रतीक और तर्जुमान है इंसानियत की : सज्जादा नशीन

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खानकाहे व दरगाहें मानवता का प्रतीक और तर्जुमान है इंसानियत की : सज्जादा नशीन

*खानकाह मखदूम ए फतेहगढ़ में हज़रत मौला अली व सय्यद शहाबुद्दीन का मनाया गया जन्मदिन*

फतेहगढ़ /फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ शहर की एतिहासिक वा गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल की लोको स्थिति दरगाह हज़रत मखदूम शाह सय्यद शहाबुद्दीन औलिया अलैहि रहमा में रजब उल मुरज्ज़ब महीने की 16 वी शरीफ के मौके पर *हज़रत मौला अली व सय्यद शहाबुद्दीन औलिया का जन्मदिन* भी बड़े ही धूम धाम से मनाया गया साथ ही इस मौके पर दूर दराज से आए अकीदतमंदों ने अपने अपने तरीके से फूल वा चादर पेश की और हज़रत मौला अली व सय्यद शहाबुद्दीन औलिया के जन्मदिन के मौके पर जायरीनों ने 5 किलो केक बतौर तबर्रुख पेश किया।

 वहीं विलादत हज़रत मौला अली और विलादत हज़रत सय्यद शहाबुद्दीन औलिया 13 रजब यानी शनिवार को खानकाह शरीफ में मुनक़्क़िद हुई नज़रों नियाज़ कर लंगर तकसीम किया, सोलहवीं शरीफ के दिन जिसमे सभी मजहब के जायरीनों ने हाजिरी दी और अपनी अकीदत पेश की और लंगर भी तकसीम किया गया। दरगाह शरीफ के सज्जादा नशीन व जानशीन ए हुज़ूर मोहब्बत शाह हज़रत पीरजादा शाह मोहम्मद वसीम उर्फ मुहम्मद मियां साहब ने कहा ये दरगाहें मानवता का प्रतीक और तर्जुमान है इंसानियत का, सूफी संतों ने सदैव अमन संदेश देने के साथ सभी धर्मों का सम्मान करने की शिक्षा दी है आज सूफी संतो की शिक्षा से दूरी हमारे भाई चारगी को समाप्त कर रही है। हर दौर में औलिया ए कराम ने अमन भाई चारगी का सन्देश इनके आस्ताने पे आने वालों को रूहानी फैज़ के साथ साथ इंसानियत का भी पैग़ाम मिलता है, सूफ़ी संतों ने समाज से बुराइयों को मिटा कर एक साफ़ और सच्चे समाज की बुन्याद रख्खी है और चारों ओर मोहब्बत के हमेशा चिराग रोशन करते रहे। इस मौके पर अलीगढ़ के मशहूर शायर यूसुफ हातिफ ने हाले गेम दिल अपना रो रोके वही कहना हातिफ तेरे रहते है गमखार मदीने में।

 शायर बिलाल शफीकी साहब ने.... मेरे अली का जश्ने विलादत हरम में है, सारी फ़ज़ीलतों की फ़ज़ीलत हरम में है। जहां में बस इसी दिन है शहाबुद्दीन की आमद, मोहब्बत के परस्तारों की है तस्कीन की आमद। इस मौके पर कव्वाली पढ़कर समा बांधा और कमालुद्दीन ने कलाम पेश किये और जायरीन झूम उठे, ये कलाम .... हमारी दुनिया बदल के रख दी नज़र का मिलना हुआ बहाना, उधर निगाहें मिली किसी से इधर ये दिल बन गया निशाना। मौलाना शोयब आतिर, हाफिज फरहान, हाफिज अयान व आरिश साबरी, बिलाल साबरी ने बेहतरीन अंदाज में कुरान पाक की तिलावत की। इस मौके पर मुहम्मद हनीफ उर्फ बबलू भाई, हाजी अकरम, तनवीर खान, फहीम उर्फ राजू, फजल अहमद, रफत हुसैन, मोवीन सबरी राहुल,अंसार साबरी, आकाश, शिवम आदि मौजूद रहे।

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SuragBureau

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