डॉ. सतीश कुमार को ‘डायबिटीज इंडिया फेलोशिप’ से सम्मानित

Feb 14, 2026 - 21:58
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डॉ. सतीश कुमार को ‘डायबिटीज इंडिया फेलोशिप’ से सम्मानित

डॉ. सतीश कुमार को ‘डायबिटीज इंडिया फेलोशिप’ से सम्मानित

हैदराबाद में विश्व मधुमेह एवं मोटापा सम्मेलन 2026 का हुआ भव्य आयोजन

लखनऊ। विश्व स्तर पर मधुमेह और मोटापे जैसी तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों पर वैज्ञानिक चर्चा और समाधान खोजने के उद्देश्य से “वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ डायबिटीज एंड ओबेसिटी 2026” का भव्य आयोजन 13 से 15 फरवरी 2026 तक हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (HICC), हैदराबाद में किया गया। तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के प्रमुख वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं तथा स्वास्थ्य नीति निर्माताओं ने भाग लिया और मधुमेह नियंत्रण की नवीनतम रणनीतियों, तकनीकों और शोध उपलब्धियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह रहे। उन्होंने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि भारत आज मधुमेह की वैश्विक राजधानी बनने की चुनौती का सामना कर रहा है, इसलिए रोकथाम, प्रारंभिक पहचान और जीवनशैली सुधार पर विशेष ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डायग्नोस्टिक्स तथा प्रिसिजन मेडिसिन को भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं का आधार बताया। इस अवसर पर इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) की प्रेसिडेंट-इलेक्ट डॉ. नीती पlल ने वैश्विक स्तर पर मधुमेह के बढ़ते बोझ पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विकासशील देशों में जागरूकता, स्क्रीनिंग और किफायती उपचार व्यवस्था को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने भारत में हो रहे शोध कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय चिकित्सक वैश्विक मधुमेह प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में IDF 2027 के प्रोग्राम चेयर डॉ. जोनाथन शॉ उपस्थित रहे। उन्होंने मधुमेह के आधुनिक प्रबंधन में निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म और व्यक्तिगत उपचार योजनाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भविष्य का डायबिटीज केयर डेटा-ड्रिवेन और मरीज-केंद्रित होगा। डायबिटीज इंडिया के अध्यक्ष डॉ. एस.आर. अरविंद तथा सचिव डॉ. बंशी साबू ने सम्मेलन की वैज्ञानिक गतिविधियों का नेतृत्व किया।

उन्होंने बताया कि इस आयोजन में विश्व के 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और भारत के 150 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था। सम्मेलन में मधुमेह से जुड़ी नई दवाओं, मोटापा प्रबंधन, कार्डियो-मेटाबोलिक जोखिम, गट माइक्रोबायोम, तकनीकी नवाचार तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों पर अनेक वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। तीन दिनों तक चले इस सम्मेलन में प्लेनरी लेक्चर, पैनल डिस्कशन, केस-आधारित चर्चाएं, युवा शोधकर्ताओं के लिए विशेष सत्र तथा पोस्टर प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मधुमेह केवल एक बीमारी नहीं बल्कि बहु-प्रणाली (multisystem) विकार है, जिसका संबंध हृदय रोग, किडनी रोग, न्यूरोपैथी और मोटापे से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसलिए समग्र (holistic) दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण “डायबिटीज इंडिया फेलोशिप” सम्मान समारोह रहा, जिसमें देश और विदेश के प्रतिष्ठित डायबिटोलॉजिस्ट्स को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसी क्रम में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सतीश कुमार को मधुमेह के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय शोध, क्लिनिकल सेवा और अकादमिक योगदान के लिए “डायबिटीज इंडिया फेलोशिप” से सम्मानित किया गया। डॉ. सतीश कुमार पिछले कई वर्षों से मधुमेह, मेटाबोलिक सिंड्रोम तथा उससे जुड़ी जटिलताओं पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने विशेष रूप से युवा आयु वर्ग में बढ़ती मधुमेह की समस्या, जीवनशैली परिवर्तन, ग्लाइसेमिक नियंत्रण और रोगी शिक्षा पर महत्वपूर्ण शोध कार्य किए हैं। उनके द्वारा किए गए अध्ययनों ने मधुमेह प्रबंधन में व्यक्तिगत उपचार रणनीतियों और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता को उजागर किया है। सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. सतीश कुमार ने कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं बल्कि KGMU लखनऊ और भारतीय चिकित्सा समुदाय के सामूहिक प्रयासों की पहचान है। उन्होंने कहा कि भारत में मधुमेह की रोकथाम के लिए सामुदायिक स्तर पर जागरूकता, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि भारत में शहरीकरण, बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित आहार मधुमेह और मोटापे के प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं। बच्चों और युवाओं में बढ़ते मोटापे को भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी बताया गया। विशेषज्ञों ने स्कूल-आधारित स्वास्थ्य कार्यक्रमों और जनजागरूकता अभियानों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में नई एंटी-डायबिटिक दवाओं, GLP-1 आधारित थेरेपी, वेट मैनेजमेंट रणनीतियों और डिजिटल हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से मधुमेह नियंत्रण को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाया जा सकता है। सम्मेलन का समापन वैश्विक सहयोग, अनुसंधान साझेदारी और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मंच वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं और मधुमेह जैसी वैश्विक महामारी से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हैदराबाद में आयोजित यह विश्व स्तरीय सम्मेलन न केवल चिकित्सा जगत के लिए बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति निर्माण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ।

डॉ. सतीश कुमार को प्राप्त “डायबिटीज इंडिया फेलोशिप” ने उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के चिकित्सा समुदाय को गौरवान्वित किया है और युवा चिकित्सकों को अनुसंधान एवं उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा के लिए प्रेरित किया है। इस प्रकार “वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ डायबिटीज एंड ओबेसिटी 2026” ने वैश्विक विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर मधुमेह और मोटापे के खिलाफ सामूहिक प्रयासों को नई दिशा प्रदान की तथा भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली की नींव मजबूत करने का संदेश दिया। डॉ सतीश कुमार के इस उपलब्धि पर जय सिंह, आईआईएस, डॉ यशवंत विरोदय, प्रोफेसर, डॉ ज्ञान चंद, प्रोफेसर, पीजीआई सहित लखनऊ के अन्य कई गणमान्य व्यक्तियों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।