भारतीय रेल ने आधुनिकीकरण के बीच यात्री सुरक्षा को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी

Feb 13, 2026 - 20:23
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भारतीय रेल ने आधुनिकीकरण के बीच यात्री सुरक्षा को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी

भारतीय रेल ने आधुनिकीकरण के बीच यात्री सुरक्षा को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी

लखनऊ PIb। एक दशक में सुरक्षा व्यय तीन गुना किया, यह 2013-14 में 39,200 करोड़ रूपये से बढ़कर 2025-26 में 1,17,693 करोड़ रूपये हुआ*

*भारतीय रेल के सभी गोल्डन क्वाड्रिलैटरल, गोल्डन डायगोनल, हाई डेंसिटी नेटवर्क और चिन्हित खंडों में 23,360 प्रति किलोमीटर रेल के ट्रैकसाइड कवच का कार्यान्वयन आरंभ*

*संपूर्ण रेल नेटवर्क में यात्री सुरक्षा और संरक्षा बढ़ाने के लिए 12,300 कोच और 460 लोकोमोटिव में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए* केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में एक प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया कि भारतीय रेल परिचालन में यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। पिछले कुछ वर्षों में उठाए गए विभिन्न सुरक्षा उपायों से रेल दुर्घटनाओं में काफी कमी आई है।

उन्‍होंने कहा भारतीय रेल में सुरक्षा संबंधी व्यय में पिछले कुछ वर्षों में उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई है:- सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर व्यय/बजट (रुपये करोड़ में) 2013-14 - 39,200 2022-23 - 87,336 2023-24 - 1,01,662 2024-25 - 1,14,022 2025-26 - 1,17,693 कवच का कार्यान्वयन i. कवच स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। कवच अत्यंत तकनीकी रूप से उन्नत प्रणाली है, जिसके लिए उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रमाणन की आवश्यकता होती है। ii. कवच लोको पायलट को निर्दिष्ट गति सीमा के भीतर रेलगाड़ी चलाने में सहायता करता है, यदि लोको पायलट ऐसा करने में विफल रहता है तो यह स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देता है और खराब मौसम के दौरान ट्रेनों को सुरक्षित रूप से चलाने में भी मदद करता है। iii. यात्री रेलगाड़ी में इसका पहला परीक्षण फरवरी 2016 में आरंभ किया गया था। प्राप्त अनुभव और स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता द्वारा इस प्रणाली के स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर, 2018-19 में तीन फर्मों को कवच संस्करण की आपूर्ति के लिए अनुमोदित किया गया। iv. कवच को जुलाई 2020 में राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली के रूप में अपनाया गया। v. कवच प्रणाली के कार्यान्वयन में निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियां शामिल हैं: * प्रत्येक स्टेशन, खंड में स्टेशन कवच की स्थापना * ट्रैक की पूरी लंबाई में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग लगाई गई।

यह रेडियो तरंगों का उपयोग करके वस्तुओं, व्यक्तियों या जानवरों की वायरलेस तरीके से पहचान और ट्रैकिंग करती है * सभी सेक्‍शन में दूरसंचार टावरों की स्थापना * रेलवे ट्रैक के साथ-साथ ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना * भारतीय रेलवे पर चलने वाले प्रत्येक लोकोमोटिव पर लोको कवच की व्यवस्था vi. दक्षिण मध्य रेलवे पर 1465 प्रति किलोमीटर ट्रैक पर कवच संस्करण 3.2 के कार्यान्वयन और प्राप्त अनुभव के आधार पर, आगे सुधार किए गए। अंततः, कवच विनिर्देश संस्करण 4.0 को 16.07.2024 को भारतीय रेलवे के शीर्ष अनुसंधान एवं विकास संस्था है आरडीएसओ द्वारा अनुमोदित किया गया। vii. कवच संस्करण 4.0 में रेलवे के विविध नेटवर्क के लिए आवश्यक सभी प्रमुख विशेषताएं शामिल हैं। यह भारतीय रेलवे की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय रेल ने कम समय में ही, स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली विकसित, परीक्षण और उन्‍हें स्‍थापित करना शुरू कर दिया है। viii. संस्करण 4.0 में किए गए प्रमुख सुधारों में स्थान सटीकता में वृद्धि हुई है, बड़े यार्डों में सिग्नल पहलुओं की बेहतर जानकारी मिल रही है, ऑप्टिकल फाइबर केबल पर स्टेशन-टू-स्टेशन कवच इंटरफ़ेस और मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ सीधा इंटरफ़ेस शामिल हैं। इन सुधारों से कवच संस्करण 4.0 को भारतीय रेलवे में बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना है। ix. व्यापक और विस्तृत परीक्षण के बाद, कवच संस्करण 4.0 1297 किलोमीटर मार्गों पर सफलतापूर्वक आरंभ कर दिया गया है, जिसमें उच्च यातायात वाले दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा मार्ग शामिल हैं। दिल्ली-मुंबई मार्ग पर कवच संस्करण 4.0 को जंक्शन केबिन-पलवल-मथुरा-नागदा खंड (667 किलोमीटर) और अहमदाबाद-वडोदरा-विरार खंड (432 किलोमीटर) पर आरंभ किया गया है और दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर गया-सरमतानर (93 किलोमीटर) और बर्धमान-हावड़ा खंड (105 किलोमीटर) संचालित किया गया है। * इसके अलावा, भारतीय रेल के सभी स्वर्णिम चतुर्भुज,स्वर्णिम विकर्ण और उच्च घनत्व नेटवर्क तथा चिन्हित खंडों को शामिल करते हुए 23,360  प्रति किलोमीटर ट्रैक किनारे कवच कार्यान्वयन कार्य शुरू किया गया है ।

xi. दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर सहित उच्च यातायात वाले मार्गों पर कवच की प्रगति निम्नलिखित है: - ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना - 8570 किमी - ⁠दूरसंचार टावरों की स्थापना - 938 नग - ⁠स्टेशन डेटा केंद्र - 767 स्टेशन ट्रैक किनारे उपकरणों की स्थापना - 5672 आरकेएम - स्थानीय स्तर पर कवच का प्रावधान - 4154 xii. 6,300 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को कवच संस्करण 4.0 से लैस करने के लिए निविदा को अंतिम रूप दे दिया गया है और 2,679 डीजल लोकोमोटिव में इसे लगाने के लिए एक अन्य निविदा को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। xiii. भारतीय रेलवे के केंद्रीकृत प्रशिक्षण संस्थानों में कवच पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि सभी संबंधित अधिकारियों को इसके बारे में प्रशिक्षित किया जा सके। अब तक 48,000 से अधिक तकनीशियनों, ऑपरेटरों और इंजीनियरों को कवच तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें लगभग 45,000 लोको पायलट और सहायक लोको पायलट शामिल हैं। ये पाठ्यक्रम इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्युनिकेशंस के सहयोग से तैयार किए गए हैं। xiv. ट्रैक साइड में कवच सहित स्टेशन उपकरण उपलब्ध कराने की लागत लगभग 50 लाख रुपये प्रति किलोमीटर है और लोकोमोटिव पर कवच उपकरण उपलब्ध कराने की लागत लगभग 80 लाख रुपये प्रति लोको है। xv. कवच कार्यों पर दिसंबर 2025 तक अब तक 2,573.36 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है। वर्ष 2025-26 के दौरान 1673.19 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। इस कार्य की प्रगति के अनुसार आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।

 रेल डिब्‍बों और लोकोमोटिव में सीसीटीवी कैमरे लगाना भारतीय रेल ने यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से डिब्बों और इंजनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम आरंभ कर दिया है। सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था से शरारती तत्वों की गतिविधियों, तोड़फोड़ और चोरी रोकने में मदद मिलेगी और घटनाओं की जांच में भी सहायता मिलेगी। इसी अनुसार जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों ने डिब्बों और इंजनों में सीसीटीवी कैमरे खरीदने और लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक, भारतीय रेल नेटवर्क पर चलने वाले लगभग 12,300 कोच (वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के सभी परिचालन रेक सहित) और 460 लोकोमोटिव में सीसीटीवी कैमरे लगा दिएए गए हैं।