उपराष्ट्रपति चुनाव में गर्माई सियासत: 'इंडिया' गठबंधन ने जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को बनाया उम्मीदवार, 'संविधान बनाम विचारधारा' की लड़ाई तेज

Aug 28, 2025 - 08:54
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उपराष्ट्रपति चुनाव में गर्माई सियासत: 'इंडिया' गठबंधन ने जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को बनाया उम्मीदवार, 'संविधान बनाम विचारधारा' की लड़ाई तेज

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उपराष्ट्रपति चुनाव में गर्माई सियासत: 'इंडिया' गठबंधन ने जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को बनाया उम्मीदवार, 'संविधान बनाम विचारधारा' की लड़ाई तेज

नई दिल्ली । आगामी 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। जहां एनडीए ने तमिलनाडु के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ भाजपा नेता सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है, वहीं विपक्ष के 'इंडिया' गठबंधन ने एक बड़ा और चौंकाने वाला दांव चलते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतार दिया है। जस्टिस रेड्डी की उम्मीदवारी ने चुनाव को सिर्फ सत्ता की दौड़ नहीं, बल्कि **संविधान बनाम विचारधारा** की लड़ाई का स्वरूप दे दिया है। भले ही एनडीए को संसद में संख्याबल का फायदा है, लेकिन विपक्ष इस चुनाव को **नैतिक और वैचारिक लड़ाई** बना देने की पूरी कोशिश कर रहा है।

 बी. सुदर्शन रेड्डी ने आज सीपीआई (एम) नेताओं से समर्थन मांगा और संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता जताई। साथ ही समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद उन्हें सपा का भी समर्थन मिल गया। अखिलेश यादव ने इसे **"न्याय और संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई"** बताया और रेड्डी को सर्वोत्तम उम्मीदवार बताया। जस्टिस रेड्डी ने हाल ही में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और चेन्नई में एम.के. स्टालिन से भी समर्थन मांगा, जिससे यह स्पष्ट है कि विपक्ष इस चुनाव को 2029 की राजनीति की भूमिका के रूप में देख रहा है। एनडीए के पास भले ही वोटों का बहुमत है, लेकिन जस्टिस रेड्डी की निष्पक्ष और संविधानप्रिय छवि बीजेपी के लिए नैतिक चुनौती बन सकती है। विपक्ष की रणनीति यह है कि वे बीजेपी को ऐसे उम्मीदवार के खिलाफ वोट डालने की स्थिति में लाएं, जो जनता में **"संविधान के रक्षक"** की छवि रखता हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव जीतने से ज्यादा *राजनीतिक नैरेटिव** गढ़ने की कोशिश है।

'इंडिया' गठबंधन इस दांव से न सिर्फ 2029 की तैयारियों को धार देना चाहता है, बल्कि एनडीए के भीतर भी कुछ दरारों की उम्मीद लगाए बैठा है। अब देखना यह होगा कि क्या जस्टिस रेड्डी का नैतिक प्रभाव कुछ सांसदों को प्रभावित कर पाएगा और क्या विपक्ष इस चुनाव को एक बड़े राजनीतिक संदेश में बदल पाएगा।

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SuragBureau

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