यूपी में बदल गए शराब के नियम, 6 साल बाद लिया निर्णय

यूपी में बदल गए शराब के नियम, 6 साल बाद लिया निर्णय

Feb 06, 2025 - 11:21
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यूपी में बदल गए शराब के नियम, 6 साल बाद लिया निर्णय

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उत्तर प्रदेश में शराब पीने वालों के लिए सरकार ने 10 नए नियमों को लागू करने का निर्णय लिया है, जिसे आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 से प्रभावी किया जाएगा। यह नए नियम राज्य में शराब की बिक्री और नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव ला रहे हैं। इस नीति के तहत, शराब के वितरण और बिक्री के लिए कई नई व्यवस्था और शुल्कों का प्रावधान किया गया है।

 1. शराब की दुकानों का आवंटन ई-लाटरी के माध्यम से: प्रदेश में शराब की दुकानों का आवंटन अब ई-लाटरी के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। इससे दुकानों के लाइसेंस का वितरण किसी भी पक्षपात या भ्रष्टाचार के बिना निष्पक्ष तरीके से होगा।

2. लाइसेंस शुल्क में 10% की वृद्धि: राज्य सरकार ने शराब दुकानदारों से लिए जाने वाले लाइसेंस शुल्क में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। इससे राज्य को राजस्व में वृद्धि होने की उम्मीद है।

 3. राजस्व लक्ष्य का निर्धारण: सरकार ने शराब की बिक्री से 55000 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र करने का लक्ष्य रखा है। यह राज्य के खजाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान होगा और प्रदेश के विकास में मदद करेगा।

4. कंपोजिट शॉप (दुकानें) खोलने का निर्णय: प्रदेश में पहली बार अंग्रेजी शराब, बीयर और वाइन की बिक्री के लिए "कंपोजिट शॉप्स" यानी विशेष दुकानों की स्थापना की जाएगी। इन दुकानों में इन सभी प्रकार की शराब की बिक्री की जाएगी और यह एक नया व्यापार मॉडल होगा। इससे ग्राहकों को एक ही जगह पर विभिन्न प्रकार की शराब की खरीदारी का मौका मिलेगा।

 5. शराब की दुकानों का लाइसेंस नवीनीकरण नहीं होगा: अब छह साल बाद शराब की दुकानों का लाइसेंस नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। यह निर्णय इस उद्देश्य से लिया गया है ताकि व्यापार में विविधता और प्रतिस्पर्धा बनी रहे और पुराने नियमों से जकड़ी हुई दुकानों को हटाकर नई दुकानों को लाइसेंस मिल सके।

6.कंपोजिट दुकानों को मॉडल शॉप में परिवर्तित करने की अनुमति: कंपोजिट दुकानों को अब मॉडल शॉप्स में परिवर्तित किया जा सकेगा, जो ग्राहकों को बेहतर सुविधा और एक उच्च गुणवत्ता का अनुभव प्रदान करेंगी। इसके लिए अलग से शुल्क लिया जाएगा, जो शराब की दुकानों को और आकर्षक और उपभोक्ताओं के लिए आरामदायक बनाएगा।

7. भारत निर्मित विदेशी मदिरा की बिक्री के लिए सेहत सुरक्षा प्रमाण पत्र: अब भारत निर्मित विदेशी मदिरा को एल्युमिनियम कैन में बेचना सिर्फ तब संभव होगा, जब केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) से सेहत सुरक्षा प्रमाण पत्र प्राप्त हो। यह कदम शराब की गुणवत्ता और उपभोक्ता स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

 8. शराब के गोदाम और निर्यात पास फीस: शराब के गोदाम के लिए 2 लाख रुपये शुल्क रखा जाएगा। इसके साथ ही, विदेशी शराब की निर्यात पास फीस 10 रुपये प्रति बल्क लीटर रखी गई है, जिससे राज्य सरकार को निर्यात में भी आय का एक स्थिर स्रोत मिलेगा।

 9. पर्यटन विभाग के लिए अतिरिक्त शुल्क: पर्यटन विभाग की तरफ से स्टार वर्गीकरण प्राप्त न करने वाले होटलों को लाइसेंस फीस के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा। यह नीति उन होटलों के लिए है जो पर्यटन क्षेत्र में शराब की बिक्री करते हैं लेकिन उच्च श्रेणी में नहीं आते हैं।

 10 .सीसीटीवी कैमरे और जियो फेंसिंग: प्रदेश में सभी शराब की दुकानों पर सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए दो-दो सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और दुकानों की जियो फेंसिंग की जाएगी। इस कदम से अवैध शराब की बिक्री और अन्य अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी। यह सुनिश्चित करेगा कि शराब की बिक्री पूरी तरह से नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से हो।

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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