नये सिविल एन्क्लेव या एयरपोर्ट के निर्माण के लिए विधायकों और पार्षदों की मॉनिटरिंग कमेटी गठित हो

Feb 6, 2024 - 21:07
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नये  सिविल एन्क्लेव या एयरपोर्ट के निर्माण के लिए विधायकों और पार्षदों की मॉनिटरिंग कमेटी गठित हो
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केन्द्र को अंतरिम बजट में संशोधन कर आगरा के सांसद की बात माननी चाहिये नये सिविल एन्क्लेव या एयरपोर्ट के निर्माण के लिए विधायकों और पार्षदों की मॉनिटरिंग कमेटी गठित हो

आगरा। केन्द्र सरकार को आगरा के सांसद एवं केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रो. एस पी सिंह बघेल सिविल एन्क्लेव ने केंद्रीय अंतरिम बजट में आगरा एयरपोर्ट की शिफ्टिंग के लिये आवश्यक धन आवंटन की मांग कर अंतरिम बजट में आवश्यक संशोधन करना चाहिये।

श्री बघेल आगरा के सांसद हैं और उन्होंने नागरिकों की जरूरत और लम्बे समय से चली आ रही मांग के अनुरूप ही मुद्दा उठाया है। सिविल सोसायटी ऑफ आगरा ने कहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत तो यह और भी जरूरी हो जाता है,अगर सिविल एन्क्लेव शिफ्टिंग का काम मार्च 2024 से पहले शुरू नहीं हो सका तो आगामी लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मौजूदा सिविल एन्क्लेव को लेकर नागरिक एवं पर्यटन उद्यमियों की नाराजगी का सामना करना पड सकता है।

सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के जर्नरल सेक्रेटरी अनिल शर्मा ने कहा कि आगरा में सिविल एन्क्लेव को वायुसेना परिसर से बाहर लेजाकर आम नागरिक की सहज पहुंच वाला बनाया जाना आगरा के नागरिकों की एक बहुप्रचारित मांग है ,नागरिकों के द्वारा इसे पूरा करने की अपेक्षा स्वाभाविक ही है,केन्द्र सरकार को अपने अंतरिम बजट में संशोधन कर आगरा के सांसद की बात तो मान ही लेनी चाहिये।

आगरा में सिविल एयरपोर्ट वायु सेना परिसर में होने से जहां वायुयान का उपयोग करने वालों को अप्रत्याशित असुविधाओं का सामना रोज करना पडता है,वहीं रक्षा प्रतिष्ठान परिसर की सुरक्षा को दृष्टिगत भी उपयुक्त नहीं है।सिविल सोसायटी ऑफ आगरा ने कहा है कि अब जब कि वायुसेना परिसर के बाहर 141.13 एकड़ जमीन उपलब्ध हो चुकी है और उसके 49.8 एकड़ भाग पर टर्मिनल निर्माण की सभी औपचारिकताएं भी क्लियर हो चुकी हैं तो अविलम्ब टर्मिनल निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाना चाहिये।

सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा ने कहा है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी अब विलम्ब होने के कारण को दूर करना चाहिए और बताना चाहिये कि कि नये सिविल एन्क्लेव का निर्माण कब से शुरू होने जा रहा है। विधायकों और पार्षदों की मॉनिटरिंग कमेटी गठित हो सिविल सोसायटी ऑफ आगरा ने आगरा सिविल एयरपोर्ट निर्माण में होते रहे विलंब और अस्पष्ट स्थितियों को दृष्टिगत विधायकों, पार्षदों और जिला पंचायत सदन के प्रतिनिधियों की एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित किये जाने का अनुरोध किया है।

वर्तमान में नागरिक प्रतिनिधित्व करने के तौर पर गठित एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी का अधिकार क्षेत्र एयरपोर्ट पर नागरिक सुविधाओं और एयर कनेक्टिविटी बढवाये जाने को सुझाव देने तक ही सीमित है। जो जानकारी सामने आयी है कि सिविल एन्क्लेव /सिविल एयरपोर्ट के निर्माण के लिए जो टेंडर निकाला गया है उसमें प्रोजेक्ट कास्ट 441.79 करोड़ दर्शायी गयी है,एनवायरमेंट क्लीयरेंस जिस प्रोजेक्ट पर मिली है उसमें कीमत 300 करोड़ रुपये है ,जबकि एयरपोर्ट अथॉरिटी ने खुद अपनी ओर से आधिकारिक नवीनतम जानकारी में प्रोजेक्ट कास्ट 579 करोड़ बतायी गयी है।

हर जानकारी में सौ करोड़ (एक अरब) रुपये से ज्यादा का अंतर है। एयरपोर्ट अथॉरिटी एक जिम्मेदार शीर्ष कार्यदायी प्रतिष्ठान है इस लिये उससे सटीकता पूर्ण जानकारियां ही अपेक्षित हैं। जबकि जो जानकारियां अब तक आयी है, उनमें प्रोजेक्ट की कीमत को लेकर बहुत बडा अंतर है, सिविल सोसायटी का मानना है कि पूरी पारदर्शिता के साथ नागरिकों के समक्ष वस्तुस्थिति लायी जानी चाहिये।

एनवायरमेंट क्लीयरेंस सिर्फ 49.8 एकड़ के प्रोजेक्ट को ही एनवायरमेंट क्लीयरेंस मिलना एक एक गंभीर मुद्दा है, जिस क्लीयरेंस को मिलने की जानकारी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक की गई है,वह 700 पैसेंजरों की क्षमता के टर्मिनल की है,जो कि 49.8 एकड़ जमीन में बनना है।यह प्रोजेक्ट तो 2018 का है,इसे ही सुप्रीम कोर्ट से भी क्लीयरेंस मिली है।जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट से मिली क्लीयरेंस के बाद जहां निर्माण शुरू हो जाना चाहिए था,वहीं इसके स्थान फिर यू पी सरकार से क्यों 92.5 एकड़ जगह मांगी गयी।

जो कि उप्र सरकार को आगरा तहसील के राजस्व गांव बल्हेरा, अभयपुरा और धनौली के 278 किसानों से 123.50 करोड़ की राशि से खरीद कर एयरपोर्ट अथॉरिटी को उपलब्ध करवानी पडी है। 92.5 एकड़ के लिये क्या अलग से प्रोजेक्ट बनेगा एयरपोर्ट अथॉरिटी को स्पष्ट करना चाहिये कि 92.5 एकड़ जमीन के लिये क्या अलग से प्रोजेक्ट बनेगा और क्लीयरेंस ली जाएगी अथवा 49.8एकड जमीन में एयरपोर्ट बनाये जाने के लिए ली गई अनुमति ही पर्याप्त होगी।

 नागरिक जानना चाहते हैं कि 141.13एकड ( 92.5+49.8 एकड़) जमीन के लिये नयी डीपीआर (प्लान) बनेगा या फिर 49.8 एकड़ पर निर्माण के लिये ली गयी क्लीयरेंसों से ही काम चल जायेगा।92.5 एकड़ के लिये अगर अलग से अनुमति ली जानी है तो फिर प्रोजेक्ट को प्रथम चरण और द्वितीय चरण के रूप में क्यों नहीं लिया जाता। जिससे कि पहले चरण के रूप में 49.8 एकड़ जमीन पर उन कार्यों को करवाया जाना कार्य करवाये जाना शुरू हो सके।

गति शक्ति मिशन पर अपलोड प्रोजेक्ट प्रोफाइल को लेकर संशय प्रधानमंत्री गति शक्ति मिशन योजना के पोर्टल पर अपलोड आगरा सिविल एयरपोर्ट की स्थिति क्या है ,इसमें निवेशकों को 700 पैसेंजरों की क्षमता वाले एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में ही निवेश करने को अवसर प्रदान किया गया है 92.5 एकड़ जमीन सहित 141.13 एकड के पूरे प्रोजेक्ट पर। गतिशक्त मिशन भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण मिशन व उसका पोर्टल है,इसके माध्यम से निवेशकों से संवाद का प्रयास होता है किंतु सिविल एयरपोर्ट ही नही किसी भी प्रोजेक्ट में अगर जमीन , डी पी आर और अनुमानित लागत स्पष्ट नहीं होती है तो निवेशक को तैयार करना आसान नहीं होता ।

जैसा कि प्रचारित है कि सरकार को अपने ही धन से बनाना है तो फिर प्रोजेक्ट को गति शक्ति मिशन पोर्टल पर डालने का औचित्य नहीं था। एडीए ने फिर कहा सुप्रीम कोर्ट जाने को आगरा विकास प्राधिकरण ने एयरपोर्ट अथॉरिटी को एक पत्र दिनांक 28-2-23 वीसी एडीए के द्वारा ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी के सेक्रेटरी के रूप में लिखा था ।

इस पत्र में पेड़ों को काट से पूर्व सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेने को कहा गया है। यह पत्र चूंकि जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट से प्रोजेक्ट की क्लीयरेंसो के बाद लिखा गया है, इस लिये एयरपोर्ट अथॉरिटी को स्पष्ट करना चाहिये कि पेड़ों को काटने की अनुमति के लिये क्या फिर से सुप्रीम कोर्ट जाना पडेगा।जिस डीपीआर को सुप्रीम कोर्ट और मौसम पर्यावरण ,वन और जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति ली गयी है, उसमें क्या उन पेड़ों का उल्लेख नहीं था जिनका एयरपोर्ट बनवाय जाने को पातन किया जाना है।

सर्वविदित है कि इस प्रकार की अनुमतियां लेने में अत्यधिक समय लगता है। विलंब आगरा के हितों प्रतिकूल एयरपोर्ट आगरा के आर्थिक विकास और नागरिक अवस्थापना सुविधाओं से सीधे तौर पर जुड़ा मुद्दा है, इस लिये एयरपोर्ट अथॉरिटी को जो भी औपचारिकताएं हैं,एकाधिकारी कार्यदायी निकाय (प्राधिकरण ) होने के नाते शीघ्र पूरी करवानी चाहिये। चूंकि आगरा के सिविल एयरपोर्ट का मामला एक न एक कारणों से 2012 से ही लटका चल रहा है इस लिये इसे लेकर अब अधिक विलंब नहीं किया जाना चाहिये।विलंव से जहां आगरा के हितो पर प्रतिकूल असर पड रहा है,वहीं दो सौ किमी एरियल डिस्टेंस के दायरे में स्थित एयपोर्टों को अतिरिक्त पैसेंजर फुटफॉल मिल रहा है।

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