चुनावी साल में योगी सरकार का बड़ा दांव, सामाजिक योजनाओं व विकास परियोजनाओं पर फोकस
चुनावी साल में योगी सरकार का बड़ा दांव, सामाजिक योजनाओं व विकास परियोजनाओं पर फोकस
लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार अपने दसवें बजट में सामाजिक योजनाओं और विकास परियोजनाओं पर विशेष जोर देने की तैयारी में है। वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित लगभग नौ लाख करोड़ रुपये के बजट में ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि विकास कार्यों के लिए रखे जाने की संभावना है। सरकार युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों को साधने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान देगी। 11 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा पेश किए जाने वाले बजट में कई लोक-लुभावन घोषणाएं संभव हैं।
सूत्रों के मुताबिक वृद्धावस्था, विधवा, निराश्रित महिला और दिव्यांग पेंशन को एक हजार रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह किया जा सकता है। मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने का संकल्प इसी वर्ष पूरा होने की संभावना है। 1.43 लाख शिक्षा मित्रों का मानदेय 10 हजार से बढ़ाकर 17 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह किया जा सकता है, जिसके लिए 250 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन निशुल्क करने की घोषणा चुनाव के निकट की जा सकती है। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पुलिस विभाग को 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट मिल सकता है। इसमें साइबर अपराध नियंत्रण, वाहन खरीद और भवन निर्माण पर खर्च किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग को 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक मिलने की संभावना है। राज्य राजमार्ग, बाईपास, ग्रामीण सड़कें और सेतु निर्माण पर जोर रहेगा। जीरो फैटैलिटी योजना के तहत सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए 1300 करोड़ रुपये, बसों व बस स्टेशनों पर सीसीटीवी के लिए 100 करोड़ और ग्राम पंचायतों में बस स्टॉप निर्माण हेतु 1200 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।
इलेक्ट्रिक व डीजल बसों की खरीद के लिए 2000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। जेवर एयरपोर्ट सहित अन्य हवाई पट्टियों के विकास के लिए 2000 करोड़ तथा अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के लिए 500 करोड़ रुपये दिए जाने की संभावना है बेसिक शिक्षा को 81 हजार करोड़ और माध्यमिक शिक्षा को 25 हजार करोड़ रुपये मिल सकते हैं। शेष 140 विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए 1000 करोड़ और जर्जर स्कूलों के सुधार हेतु 300 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। शहरी अवस्थापना के लिए आवास विभाग को 8500 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत नई टाउनशिप विकसित करने के लिए 3500 करोड़ रुपये का प्रावधान संभव है। पूर्वांचल के लिए 1500 करोड़ और बुंदेलखंड के लिए 500 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं। खेल विकास के लिए 1000 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। कई जिलों में स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापना और मेरठ के मेजर ध्यानचंद्र खेल विश्वविद्यालय में स्पोर्ट्स साइंस लैब के लिए भी बजट प्रावधान संभव है।
हालांकि, चालू वित्तीय वर्ष में कई विभाग आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं कर सके हैं। लोक निर्माण विभाग अब तक केवल 40 प्रतिशत बजट खर्च कर पाया है, जबकि परिवहन, आवास और खेल विभाग की प्रगति भी संतोषजनक नहीं रही। पिछले बजट में घोषित ‘रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना’, नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर, कुकरैल नाइट सफारी और मंडलीय कार्यालय निर्माण जैसी परियोजनाएं अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। चुनावी वर्ष में पेश होने वाला यह बजट सरकार के लिए विकास और वादों को जमीन पर उतारने की परीक्षा साबित होगा।