ऊर्जा क्षेत्र में भारत की नई उड़ान: 2025 में सुधारों से सशक्त भविष्य की ओर कदम

Dec 31, 2025 - 22:16
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ऊर्जा क्षेत्र में भारत की नई उड़ान: 2025 में सुधारों से सशक्त भविष्य की ओर कदम

ऊर्जा क्षेत्र में भारत की नई उड़ान: 2025 में सुधारों से सशक्त भविष्य की ओर कदम

ऊर्जा क्षेत्र में सुधार किसी एक घोषणा से नहीं, बल्कि वर्षों की नीतिगत तैयारी, कानूनों में बदलाव, संस्थागत सुधार और क्षमता विस्तार से आकार लेते हैं। भारत के लिए वर्ष 2025 ऐसा ही एक निर्णायक वर्ष साबित हुआ, जब बिजली, परमाणु ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और रणनीतिक खनिजों से जुड़े लंबे समय से लंबित सुधार जमीन पर उतरते दिखाई दिए। यह वह दौर है जब नीतिगत इरादे ठोस क्रियान्वयन में बदले। वर्ष 2008 में अमेरिका के साथ हुए असैन्य परमाणु समझौते को एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा गया था। संसद में इस पर लंबी बहस हुई और इसे भारत के परमाणु अलगाव के अंत के रूप में प्रचारित किया गया। हालांकि, उस समय के बाद भी जमीनी स्तर पर परमाणु क्षेत्र में अपेक्षित बदलाव नहीं आए। सख्त दायित्व कानूनों, निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी और पुराने कानूनी ढांचे के कारण भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र दशकों तक ठहराव में रहा। 2025 में यही ठहराव टूटता दिखाई दिया।

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में वर्ष 2025 का सबसे बड़ा कदम शांति (SHANTI) विधेयक का पारित होना रहा। इस कानून के जरिए छह दशकों से चली आ रही उन संरचनात्मक बाधाओं को दूर किया गया, जिन्होंने परमाणु ऊर्जा के विस्तार को रोक रखा था। नए प्रावधानों के तहत दायित्व नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्पष्ट किया गया है, जिससे सुरक्षा के साथ-साथ निवेश का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है। इससे घरेलू और विदेशी निजी निवेशकों के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी संभव हुई है। अनुमान है कि 2047 तक इस क्षेत्र में 100 से 150 अरब डॉलर का निवेश आएगा, जिससे परमाणु ऊर्जा उत्पादन में कई गुना वृद्धि होगी और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी। स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के संदर्भ में 2025 में एक और अहम बदलाव रणनीतिक खनिजों को लेकर हुआ। अब तक लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ जैसे खनिजों को केवल आयात और आपूर्ति का विषय माना जाता था। लेकिन वैश्विक आपूर्ति संकटों ने इनकी रणनीतिक अहमियत को उजागर किया। इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन की शुरुआत की गई, जिसके तहत 24 महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान कर घरेलू खोज, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और तकनीकी विकास पर जोर दिया गया है।

रेयर अर्थ मैग्नेट्स के घरेलू उत्पादन के लिए हजारों करोड़ रुपये की योजनाएं शुरू की गई हैं, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। बिजली क्षेत्र में भी 2025 में बड़े सुधार देखने को मिले। बिजली संशोधन विधेयक 2025 के जरिए वितरण प्रणाली में प्रतिस्पर्धा, नेटवर्क के आधुनिकीकरण और सेवा गुणवत्ता पर फोकस किया गया है। किसानों और कमजोर वर्गों के लिए सब्सिडी व्यवस्था को बनाए रखते हुए, पूरे सिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इससे बिजली आपूर्ति को कल्याणकारी योजना के बजाय मजबूत आर्थिक अवसंरचना के रूप में देखा जाने लगा है। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने 2025 तक केवल लक्ष्य ही नहीं तय किए, बल्कि उन्हें समय से पहले हासिल भी किया। सौर और पवन ऊर्जा क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। गैर-जीवाश्म स्रोतों से ऊर्जा उत्पादन का हिस्सा 2030 के लक्ष्य से पहले ही हासिल कर लिया गया है। इससे भारत ने न केवल अपने पेरिस जलवायु संकल्प पूरे किए, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी विश्वसनीयता भी मजबूत की। कुल मिलाकर, वर्ष 2025 भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक निर्णायक मोड़ बनकर उभरा है। यह वह साल रहा जब सुधारों ने सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर आकार लिया और भारत ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ता दिखाई दिया।