भारत के 10 सबसे भ्रष्ट विभागों की सूची जारी, पुलिस विभाग सबसे ऊपर

Nov 13, 2025 - 09:16
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भारत के 10 सबसे भ्रष्ट विभागों की सूची जारी, पुलिस विभाग सबसे ऊपर

भारत के 10 सबसे भ्रष्ट विभागों की सूची जारी, पुलिस विभाग सबसे ऊपर

नई दिल्ली। देश में भ्रष्टाचार एक पुरानी और गंभीर समस्या बनी हुई है। हाल ही में **NCIB** द्वारा जारी एक रिपोर्ट में भारत के **10 सबसे भ्रष्ट विभागों** की सूची सामने आई है। यह रिपोर्ट जनता की शिकायतों, मीडिया रिपोर्टों, **ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल**, **लोकपाल** और **लोकायुक्त** जैसी संस्थाओं के डाटा के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक भ्रष्टाचार **पुलिस विभाग** में पाया गया है।

★★रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस विभाग में रिश्वतखोरी, फर्जी केस दर्ज करना, FIR न लिखना, सड़क चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली, जमीन विवादों में पक्षपात और न्याय के बदले पैसों की मांग जैसे गंभीर आरोप बार-बार सामने आए हैं।

★ दूसरे स्थान पर **राजस्व विभाग** है, जहां जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण, दाखिल-खारिज और खतौनी निकालने जैसे कामों में रिश्वतखोरी के आरोप लगते रहे हैं।

★ तीसरे स्थान पर - नगर निगम/नगर पालिका विभाग** को रखा गया है। यहां भवन नक्शा पास कराने, सफाई व्यवस्था, अवैध निर्माण को नजरअंदाज करने और रिश्वत लेकर अवैध निर्माण को बढ़ावा देने के मामले सामने आए हैं।

★ ग्राम पंचायत/ब्लॉक स्तर के विभाग** को चौथा स्थान मिला है। इस विभाग पर प्रधानमंत्री आवास योजना, शौचालय निर्माण, राशन कार्ड, वृद्धावस्था व विधवा पेंशन योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप हैं।

★ बिजली विभाग** पांचवें स्थान पर है। इस विभाग में मीटर रीडिंग और बिलिंग में हेराफेरी, कनेक्शन में देरी और बिना रिश्वत मरम्मत न करने की शिकायतें आम हैं।

★ सड़क परिवहन विभाग (RTO)** छठे स्थान पर है, जहां बिना टेस्ट ड्राइविंग लाइसेंस बनाना, वाहन पंजीकरण में घूसखोरी और अनफिट वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट देना प्रमुख शिकायतें हैं।

 ★ सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग** को सातवां स्थान दिया गया है। इस विभाग पर दवा आपूर्ति में घोटाले, डॉक्टरों की अनुपस्थिति, मरीजों को निजी अस्पताल भेजने और महंगी दवाओं से कमीशनखोरी जैसे आरोप हैं।

 ★ शिक्षा विभाग** आठवें स्थान पर है, जहां शिक्षक भर्ती घोटाले, स्कूलों में शिक्षकों की फर्जी उपस्थिति और निजी स्कूलों से सांठगांठ के मामले पाए गए हैं।

★ आवास एवं शहरी विकास विभाग** नौवें स्थान पर रहा है। इस विभाग में निर्माण ठेके और टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की शिकायतें दर्ज हुई हैं।

 ★ आयकर और जीएसटी विभाग** को दसवां स्थान मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस विभाग के कुछ अधिकारियों पर छापों से बचाव के लिए लेन-देन, फर्जी रिटर्न और व्यापारियों से अवैध वसूली के आरोप हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भ्रष्टाचार का स्तर राज्य और जिले के हिसाब से अलग-अलग होता है। कई बार इसमें स्थानीय नेताओं और बिचौलियों की भी भूमिका होती है, जिससे रिश्वत की रकम 2 से 5 गुना तक बढ़ जाती है। बिचौलियों और अधिकारियों के बीच यह रकम बंट जाती है, जिससे जनता को न्याय और सुविधा दोनों से वंचित रहना पड़ता है।

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