Nepal News : नेपाल में Gen-Z आंदोलन की मांगें: जवाबदेही की नई लहर

Sep 11, 2025 - 14:00
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Nepal News : नेपाल में Gen-Z आंदोलन की मांगें: जवाबदेही की नई लहर

नेपाल में Gen-Z आंदोलन की मांगें: जवाबदेही की नई लहर

नेपाल में हाल ही में हुए Gen-Z आंदोलन ने अब धीरे-धीरे थमने का संकेत दिया है। गुरुवार को देश के कुछ इलाकों से छिटपुट उपद्रव की खबरें आईं, लेकिन व्यापक स्तर पर स्थिति नियंत्रण में है। अब मुख्य चुनौती एक नई सरकार के गठन की है, जिसे लेकर आंदोलनकारी युवाओं के समूह ने अपनी मांगों का एक विस्तृत ड्राफ्ट जारी किया है। Gen-Z आंदोलन ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य व्यवस्था को गिराना नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने अपने मांग पत्र में देश के शासन तंत्र में व्यापक सुधार की मांग की है। युवाओं की पहली और अहम मांग यह है कि वर्तमान संसद को भंग किया जाए और राष्ट्रपति के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार का गठन हो।

उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि इस सरकार की कार्यकारी प्रमुख पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की हों। जस्टिस आनंद मोहन भट्टाराई को भी इस अंतरिम ढांचे में शामिल करने की मांग की गई है। इस संयुक्त नागरिक-सैन्य संकट प्रबंधन परिषद का उद्देश्य केवल अगले आम चुनाव की तैयारियों तक सीमित रहेगा। सेना की भूमिका सुरक्षा और निगरानी तक सीमित रखी जाएगी। आंदोलनकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि सेना को नीति-निर्माण में किसी भी प्रकार की स्थायी भूमिका नहीं दी जानी चाहिए। युवाओं ने मांग की है कि अगले 6 से 12 महीने के भीतर पारदर्शी और निष्पक्ष लोकतांत्रिक चुनाव कराए जाएं। साथ ही भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग का गठन हो, जो नेताओं, नौकरशाहों और प्रशासनिक अधिकारियों की संपत्ति और फैसलों की जांच करेगा। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और आगजनी की घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि ऐसे तत्व उनके आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं। इन घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस कार्रवाई, खासकर युवाओं पर गोली चलाने के आदेश देने वाले अधिकारियों की भी जांच की मांग की गई है।

जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए पत्र में अस्पतालों, स्कूलों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इसके साथ ही हिंसा में जान-माल गंवाने वाले नागरिकों को मुआवजा देने की भी मांग की गई है। युवाओं ने यह भी कहा है कि मौजूदा समय में जो नेता सेना की सुरक्षा में हैं, उन्हें देश छोड़ने या जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सभी आरोपियों पर निष्पक्ष ट्रिब्यूनल के तहत मुकदमा चलाया जाए और यदि कोई आरोपी फरार है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया जाए। Nepal की सड़कों पर उतरी युवा पीढ़ी ने यह स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि न्याय, जवाबदेही और एक बेहतर भविष्य की नींव रखने के लिए है।

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