पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में लगभग 73 लोगों की मौत हो गई

Aug 27, 2024 - 07:31
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पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में लगभग 73 लोगों की मौत हो गई

पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में सोमवार को विद्रोहियों द्वारा हाईवे, रेलवे ब्रिज व पुलिस थाने पर किए गए हमलों में कम-से-कम 73 लोगों की मौत हो गई। वहीं, सुरक्षा बलों ने 21 हमलावरों को मार गिराने का दावा किया है।

 संसाधन संपन्न प्रांत पर नियंत्रण के लिए दशकों से चल रहे विद्रोह के तहत यह पिछले कई वर्षों में किया गया सबसे बड़ा हमला है। बुगती जनजाति के सम्मानित नेता नवाब अकबर बुगती की 18वीं बरसी पर बलूच विद्रोहियों ने इस हमले को अंजाम दिया है। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 2006 में उनकी हत्या कर दी थी। इस अभियान का आदेश पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने दिया था।

पाकिस्तान की सेना ने कहा कि संघर्ष में 14 सैनिक और पुलिस तथा 21 हमलावर मारे गए। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने कहा कि विद्रोहियों के हमले में 38 नागरिक भी मारे गए। इनमें से 23 लोग राजमार्ग पर हुए हमले में मारे गए। मूसाखेल जिले में विद्रोहियों ने सबसे बड़े हमले में बस यात्रियों को उतारकर उनका पहचान पत्र देखने के बाद 23 लोगों को गोलियों से भून डाला। इनमें अधिकांश पंजाबी थे। वहीं, राजधानी क्वेटा को प्रांत के अन्य हिस्से से जोड़ने वाले रेलवे ब्रिज पर हमले में छह लोगों की मौत हो गई।

घटनाओं की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली है। दावा किया है कि वह अभी और घटनाओं को अंजाम देगा। मूसाखेल जिले के सीनियर एसएसपी अयूब खोसो ने बताया कि बस यात्रियों पर हमले से पहले बंदूकधारियों ने जिले के राराशिम क्षेत्र में हाईवे को बाधित कर दिया था। मारे गए यात्रियों में अधिकांश दक्षिणी पंजाब के व कुछ खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के थे। कहा, बंदूकधारियों ने हमले के दौरान हाईवे पर 12 ट्रकों में भी आग लगा दी। प्रांतीय राजधानी को शेष पाकिस्तान से जोड़ने वाले रेल पुल पर हुए विस्फोटों के बाद क्वेटा के लिए रेल यातायात स्थगित कर दिया गया है।

 बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तान को ईरान से जोड़ने वाली रेलवे लाइन को भी निशाना बनाया। दरअसल, बलूच विद्रोही प्रांत के संसाधनों पर यहां के लोगों का अधिकार जताते हुए दशकों से संघीय सरकार का विरोध कर रहे हैं। वे दक्षिणी बलूचिस्तान में चीन द्वारा रणनीतिक रूप से विकसित किए जा रहे ग्वादर बंदरगाह, सोने व तांबे की खानों के विकास का भी विरोध करते रहे हैं।

सरफराज बुगती ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताई है। उन्होंने कहा कि घटना के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। मालूम हो कि चार महीने पहले भी मूसाखेल जिले में इसी तरह के हमले में पंजाब के नौ लोगों को मार दिया गया था। पिछले वर्ष बलूचिस्तान के केच जिले में भी पंजाब के छह श्रमिकों को निशाना बनाया गया था।

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