कृषि से साकार होता ‘विकसित भारत @2047’ का सपना
कृषि से साकार होता ‘विकसित भारत @2047’ का सपना
भारत “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें प्रति व्यक्ति आय को विकसित देशों के स्तर तक ले जाना और “सबका विकास” सुनिश्चित करना प्रमुख उद्देश्य है। नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इस राष्ट्रीय परिवर्तन में कृषि क्षेत्र की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। देहरादून में 10–12 अक्टूबर 2025 को आयोजित 24वें अंतरराष्ट्रीय IASSI वार्षिक सम्मेलन में अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने बताया कि कृषि वर्तमान कीमतों पर देश की 19.73 प्रतिशत राष्ट्रीय आय में योगदान देती है और 46 प्रतिशत कार्यबल को रोज़गार प्रदान करती है, जिनमें 64 प्रतिशत महिलाएँ हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2004–05 के बाद कृषि और संबद्ध गतिविधियों के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में निरंतर तेज़ी देखी गई, जो 2014–15 के बाद और सुदृढ़ हुई। 2015–16 से 2024–25 के बीच कृषि क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर 4.45 प्रतिशत रही, जो अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है।
यह वृद्धि दर प्रमुख कृषि देशों में पिछले एक दशक में सबसे अधिक मानी जा रही है। इसी अवधि में भारत की कृषि वृद्धि 4.42 प्रतिशत रही, जो चीन की 4.10 प्रतिशत वृद्धि से अधिक है। कृषि क्षेत्र की स्थिरता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 1980 के दशक में जहाँ कृषि वृद्धि में अस्थिरता अपने चरम पर थी, वहीं हाल के वर्षों में यह उस स्तर का केवल एक-तिहाई रह गई है। 2015–16 से 2024–25 के दौरान कृषि आय में किसी भी वर्ष नकारात्मक वृद्धि नहीं दर्ज की गई। कोविड-19 महामारी के दौरान भी कृषि क्षेत्र ने मजबूती दिखाई और गैर-कृषि क्षेत्रों के विपरीत इस पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। संबद्ध क्षेत्रों में पशुपालन और मत्स्य पालन ने फसल क्षेत्र की तुलना में कहीं अधिक तेज़ वृद्धि दर्ज की। मत्स्य पालन क्षेत्र में लगभग 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो फसल क्षेत्र से तीन गुना अधिक है। 2014–15 के बाद वानिकी क्षेत्र की वृद्धि भी सकारात्मक रही और यह लगभग 4 प्रतिशत तक पहुँची। फसल क्षेत्र के भीतर चारा, मसाले, फल, दलहन और तिलहन जैसी उच्च मूल्य वाली उपज की वृद्धि दर अनाज की तुलना में अधिक रही, जिससे कृषि आय में विविधता आई। रिपोर्ट में कृषि संरचना में आए बदलावों को भी रेखांकित किया गया है। कुल कृषि उत्पादन में फसलों की हिस्सेदारी 63.75 प्रतिशत से घटकर 54.33 प्रतिशत रह गई है, जबकि पशुपालन और मत्स्य पालन की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
विशेष रूप से फलों और मसालों का योगदान तेज़ी से बढ़ा है, जो कृषि के मूल्य संवर्धन की दिशा को दर्शाता है। किसानों और कृषि उत्पादकों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2014–15 से 2023–24 के बीच कृषि उत्पादकों की आय में औसतन 10.11 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि हुई, जो विनिर्माण क्षेत्र और समग्र अर्थव्यवस्था से अधिक है। बीते दस वर्षों में किसानों की आय में लगभग 126 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सिंचाई क्षेत्र के विस्तार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, ई-नाम के माध्यम से मंडियों के एकीकरण, कृषि वित्त में बढ़ोतरी तथा दुग्ध, फल और सब्ज़ी उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि जैसे नीतिगत सुधारों ने कृषि क्षेत्र को नई गति दी है। बदलती उपभोग प्रवृत्तियों के साथ खाद्य मांग में भी निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने की संभावना है।