एआइ का ज्यादा उपयोग बढ़ा रहा कार्बन उत्सर्जन

Jul 15, 2025 - 08:19
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एआइ का ज्यादा उपयोग बढ़ा रहा कार्बन उत्सर्जन

अगर आप भी बात-बात पर एआइ का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए है। एक नई स्टडी में सामने आया है कि एआइ इस्तेमाल से भी कार्बन का उत्सर्जन बढ़ रहा है। जर्मनी के होचस्चुले मुन्चेन यूनिवर्सिटी आफ एप्लाइड साइंसेज के शोधकर्ताओं द्वारा की गई स्टडी में सामने आया है। कि एआइ चैटबाट्स सीधे जवाब देने वाले माडल्स की तुलना में जटिल या तर्कसंगत जवाब देने में छह गुना ज्यादा कार्बन उत्सर्जित करते हैं।

 फ्रान्टियर इन कम्युनिकेशन नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के दौरान 14 जनरेटिव एआइ माडल्स (जैसे डीपसीक) के प्रदर्शन और पर्यावरणीय प्रभाव का विश्लेषण किया गया। इस दौरान एआइ को एक हजार सवाल दिए गए जिनमें 500 मल्टीपल च्वाइस और 500 व्याख्यात्मक उत्तर वाले शामिल थे जो दर्शनशास्त्र, हाइ स्कूल इतिहास, अंतरराष्ट्रीय कानून, एक्स्ट्रैक्ट एल्जेब्रा, हाई स्कूल गणित जैसे विषयों से लिए गए थे। शोधकर्ता मैक्सिमिलियन डाउनर ने बताया, "जो माडल तर्क और विश्लेषण करते हैं वे संक्षिप्त उत्तर देने वाले माडल्स की तुलना में 50 गुना तक ज्यादा कार्बन उत्सर्जन कर सकते हैं।" उन्होंने जवाब की सटीकता के बारे में बताया जो माडल 500 ग्राम कार्बन से कम उत्सर्जन करते हैं, वे 80 प्रतिशत से ज्यादा सटीकता नहीं दे पाए जबकि रीजनिंग करने वाले माडल ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए ज्याद सटीक जवाब दिए।

 हालांकि उसके उसी अनुपात में संक्षिप्त माडल्स की तुलना में तीन गुना अधिक उत्सर्जन किया। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि जरूरी नहीं है कि व्याख्यात्मक प्रश्नों के जवाब ज्यादा सटीक हों, यह सवाल पूछने के तरीके पर भी निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि शोध में वैकल्पिक प्रश्नों के जवाब एआइ ने ज्यादा सटीक दिए। विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट

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