छोड़ते जायें, मोड़ते जायें

Nov 19, 2023 - 11:05
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छोड़ते जायें, मोड़ते जायें

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छोड़ते जायें, मोड़ते जायें

जीवन में बहुत से मोड़ आते है हम सही से जीवन जीते हुए अच्छे गुणों से आगे बढ़े ग़लत को छोड़े । हर एक दिल में कोई ना कोई अरमान जरुर होते हैं और अपने अरमानो को पूरा करने के लिए हर इंसान कोशिश करता हैं ।कुछ अपने अरमानो को पूरा करने में सफल होते हैं और कुछ असफल होते है ।

अतः जो है, जो मिला है, उसी में संतोष करें,खुश रहें, पश्चाताप न करें, दुनिया को जितने वाला, सिकंदर के भी अरमान पुरे नहीं हुए, वो जो जब दुनिया से विदा हों के गया तो दोनों हाथ बाहर रखकर संदेश देकर गया । जब भी हम मन से सोचे हम ख़ुश है सुखी है तो शायद ही क‍िसी बाहरी संसाधन की जरूरत पड़ सकती है।

माना की हर कोई स्वस्थ, सुखी और संपन्न होना चाहता है। पर बहुत कम लोग जानते हैं कि स्वास्थ्य, सुख और संपन्नता का सबसे बड़ा आधार है मन की खुशी।भगवद‌्गीता में कहा गया है, ‘प्रसादे सर्वदुखानां’ अर्थात मन प्रसन्न है, तो सभी दुख दूर है । लोग सोचते हैं दुःख दूर होने पर ही वे प्रसन्न रह पाएंगे। यह सही नहीं है।

सुख आंतरिक चीज है। वह बाहरी व्यक्ति, वस्तु, साधन, संसाधन पर आश्रित नहीं है। न ही उसे रुपए से खरीदा जा सकता है। हम बस इतना करे अपनी तुलना किसी और के साथ नहीं, जो कुछ प्राप्त है, उसे परमात्मा की देन मानकर सहज स्वीकार करना है। संतुष्ट रहना है। दूसरों के स्वभाव, संस्कार, बोल, व्यवहार और हालात हमें दुखी या परेशान न करें।

क्योंकि जीवन का सबसे बड़ा खजाना संतुष्टि है। हम संतुष्ट रहना सीखें।इस तरह बातें छोड़ने-जोड़ने की और भी हैं। जैसे- जैसे यह अनुभव में आएँ, करते जाएँ। जहॉं जैसी जरूरत छोड़ते जाएँ, जिन्दगी को मोड़ते जाएँ। प्रदीप छाजेड़

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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