सही सोच

Oct 10, 2023 - 14:28
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सही सोच

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सही सोच

जो अपनी सुविधानुसार बात करते हैं वे ही उड़ती हवा के बयार होते हैं ।जो हर वक्त आपके लिए तैयार होते हैं वे ही अपने होते हैं।ऐसी पहचान सबको रखनी चाहिए ।वक्त बहुत बुरा हो तो पहले अपनों की पहचान कर लो ।

कौन अपना है और कौन पराया यह बुरे वक्त में जान लो।अतः अपनो पे अपनापन सोच के जताए क्या पता कौन कब पराया हो जाए। हमारे लिये जीवन में जितने दिन लिखें हैं उतना ही समय हमारे पास होता है।सही से सोचने की बात यह है कि वो समय हम्हें कुछ क्रीएटिव कार्यों में लगाना चाहिये ना की गपशप या अन्य फ़िज़ूल के कार्यों में।हर इंसान का कभी ना कभी अच्छा वक्त ज़रूर आता है।

जब वक्त हमारे हक़ में हो तो ग़ुरूर नहीं करना चाहिये।क्योंकि वक्त का कोई भरोसा नहीं होता वह कब पलटी मार जाये।जिस भगवान राम का अगले दिन राज तिलक होना था उसी दिन उनको भी सन्यासी बनकर वनवास जाना पड़ा।इसलिए वक्त की क़दर करो।वक्त को अच्छे और सत्कर्म में नियोजित करें ।हम समझे की जिस मनुष्य के हृदय में सही दृष्टिकोण होगा उसकी सोच हमेशा यही होगी कि मुझे मिला हुआ दुःख किसी को भी नही मिले ।

मुझे मिला हुआ सुख सबको मिले ।मन कि सोच सुंदर है तो हमको सारा संसार सुंदर नज़र आएगा और जैसे विचार वैसे शब्दों के चयन में विनम्रता-श्रद्धा-आदर-समर्पण-निष्ठा आदि के भाव होगे ।क्योंकि विचार एक भावनात्मक उपचार हैं और आचार यह हमारे आत्मसम्मान के गुण को बढ़ाता हैं ।हम जब भी अपना पथ प्रशस्त कर लक्ष्य बनाते हैं तो उसे प्राप्त करने के सही तरीक़े सोचते हैं और सदाचार की राह में श्रद्धा-निष्ठा से सफलता प्राप्त करते हैं । यही सब समझ कर हम यदि रहेंगे सुखी तो किसी की नहीं मजाल कि हमें दु:ख कर सके।क्योंकि यही सही सोच की विधि है । प्रदीप छाजेड़ ( बोरावड़ )

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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