सड़क चौड़ीकरण में कटे पेड़ों की लकड़ी पर उठे सवाल, वन विभाग पर मिलीभगत के आरोप

Jun 05, 2026 - 07:24
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सड़क चौड़ीकरण में कटे पेड़ों की लकड़ी पर उठे सवाल, वन विभाग पर मिलीभगत के आरोप

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सड़क चौड़ीकरण में कटे पेड़ों की लकड़ी पर उठे सवाल, वन विभाग पर मिलीभगत के आरोप

कायमगंज, फर्रुखाबाद। कोतवाली कायमगंज क्षेत्र के सलेमपुर ढूंढे माई रोड पर सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्य के दौरान काटे गए पेड़ों की लकड़ी के निस्तारण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग के कुछ कर्मचारियों पर सरकारी संपत्ति के संरक्षण में लापरवाही तथा निजी आरा मशीन संचालकों से मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। हालांकि आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण कार्य के लिए आम, शीशम और पीपल समेत कई पेड़ों की कटान की गई थी। आरोप है कि कटे हुए पेड़ों की लकड़ी को नियमानुसार सरकारी डिपो भेजने या संबंधित किसानों को सौंपने के बजाय एक निजी आरा मशीन तक पहुंचाया गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि खान पेट्रोल पंप के सामने स्थित आरा मशीन पर उक्त लकड़ी उतारी जा रही थी।

मामले में वन विभाग के दरोगा जहीर खान और डीएसओ राजेश कुमार शाक्य का नाम भी आरोपों के संदर्भ में सामने आया है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि सरकारी लकड़ी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत डिपो भेजने के बजाय निजी स्तर पर खपाने का प्रयास किया गया। हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब स्थानीय लोग और कुछ जिम्मेदार नागरिक मौके पर पहुंचे तो वन विभाग के कर्मचारी जल्दबाजी में दिखाई दिए। आरोप है कि पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने बाद में लकड़ी को सरकारी डिपो भेजने की बात कही। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान काटे गए सभी पेड़ों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना है कि पेड़ों की संख्या, प्रजाति, अनुमानित मूल्य और लकड़ी के अंतिम गंतव्य की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि किसी भी संभावित अनियमितता की सच्चाई सामने आ सके। सूत्रों के मुताबिक मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। नागरिकों ने जिलाधिकारी, प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) और अन्य संबंधित अधिकारियों से पूरे प्रकरण की पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग या किसी प्रकार की मिलीभगत की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और संभावित जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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SuragBureau

2020 से सुराग ब्यूरो वेब पोर्टल मैनेजमेंट टीम सदस्य

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