बिहार से 3 IAS फरार, खोज रही पुलिस/सरकार
बिहार के 3 IAS अधिकारी इन दिनों फरार बताए जा रहे हैं. तीनों के नाम का जिक्र राज्य के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में आया है. इसको लेकर बिहार पुलिस की स्पेशल विजिलेंस यूनिट बड़ा एक्शन लेते हुए 1997 बैच के IAS संजीव हंस के साथ-साथ 7 अन्य लोगों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। हालांकि, इस चार्जशीट में दो अन्य फरार IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर का नाम नहीं है।
स्पेशल विजिलेंस यूनिट के मुताबिक अब तक आईएएस अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर के खिलाफ टेंडर घोटाले में सीधे तौर पर शामिल होले के साक्ष्य नहीं हासिल हुए हैं. लेकिन ईडी की रिपोर्ट में उनपर निजी व्यक्ति से लाभ लेने का आरोप है. इस मामले में राज्य सरकार द्वारा दोनों आईएस अधिकारियों को 30 मई को ही निलंबित किया जा चुका है। इस बीच स्पेशल विजिलेंस यूनिट के कार्रवाई तेज होने के साथ ही IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर 19 जून से लापता हो गए हैं. वहीं, संजीव हंस को 27 मई से लेकर अब तक ट्रेस नहीं किया जा सका है।इसी दिन स्पेशल विजिलेंस यूनिट मामले के एक अन्य आरोपी रिशु श्री की गिरफ्तारी की थी, जिसका कनेक्शन तीनों IAS अधिकारियों से निकल कर सामने आया था।
स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने टेंडर हेराफेरी, कमीशनखोरी और आईएएस अधिकारियों को रिश्वत देने के मामले में 27 मई को रिशु श्री नाम के एक ठेकेदार और व्यवसायी को गिरफ्तार किया गया था. स्पेशल विजिलेंस यूनिट के मुताबिक इसने अलग-अलग सरकारी विभागों में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए ठेके हासिल किए. इसके बदले उसने अधिकारियों को कमीशन दिया. साथ ही उन्हें विदेश भेजने के साथ लग्जरी लाइफस्टाइल भी मुहैया कराई। संजीव हंस के साथ भी उसके कनेक्शन सामने आए हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक जब संजीव हंस जल संसाधन विभाग में सचिव थे, तो कोसी बेसिन विकास परियोजना से जुड़े कार्यों में अनियमितताएं हुईं. साल 2024 में एक मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत संजीव हंस के यहां छापेमारी हुई थी, तब पहली बार रिशु श्री का जिक्र आया था. एजेंसी को संजीव हंस द्वारा रिशु श्री की कंपनियों से कमीशन लेने के साक्ष्य भी मिले हैं।
एजेंसी का कहना है कि कई अन्य सीनियर और मिड-लेवल नौकरशाहों के उस गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं, जो ‘सरकारी कॉन्ट्रैक्ट के बदले कमीशन’ और दूसरी वित्तीय गड़बड़ियों शामिल रहे हों। अदालत में दाखिल की गई स्पेशल विजिलेंस यूनिट की चार्जशीट में आईएस संजीव हंस, रिशु श्री, मुमुक्षु कुमार चौधरी, तारिणी दास, उमेश कुमार सिंह, संतोष कुमार, पवन कुमार के नाम शामिल हैं. ऐसे में सवाल उठता है, तो फिर आईएस अभिलाषा और योगेश के ऊपर किस आधार पर कार्रवाई हो रही है. दअरअल, इन दोनों पर रिशु और उससे जुड़ी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी टेंडरों में हेरफेर करने का आरोप है. इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ. इसके बदले रिशु श्री की तरफ से उन्हें विदेशी यात्राएं, महंगे मोबाइल फोन और टैबलेट, इंटीरियर डेकोरेशन और अन्य सुविधाएं दी गईं।
30 मई को निलंबन से पहले2014 बैच की IAS अधिकारी अभिलाषा, सस्पेंड होने के समय MGNREGA (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) कमिश्नर और ‘जीविका’ ग्रामीण आजीविका योजना की एडिशनल चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के तौर पर काम कर रही थीं. वहीं, योगेश 2017 बैच के IAS अधिकारी हैं. सस्पेंड होने के समय वे समाज कल्याण विभाग में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे। फिलहाल, इस भ्रष्टाचार के मामले में तीनों IAS अधिकारी फरार है. ऐसे में सरकार के पास इन IAS अधिकारियों के निलंबन के साथ अनुशासनात्मक जांच कराने का विकल्प है। हालांकि, इसको लेकर बिहार सरकार की तरफ से पहले ही कदम उठाए जा चुके हैं. ऐसे में सरकार के पास अन्य विकल्प क्या है, जिसके जरिए इन अधिकारियों पर शिकंजा कसने के साथ-साथ उन्हें सजा दिलाई जा सके। सरकार इन अधिकारियों के फरार रहने की अवधि को ‘अनधिकृत अनुपस्थिति’ मान सकती है। इस आधार सरकार इन अधिकारियों का वेतन भत्ता रोक सकती है। अधिकारी हाजिर नहीं होता, तो अदालत से उसे उद्घोषित अपराधी (Absconder) घोषित करा सकती है संपत्ति कुर्क करने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी करवा सकती है।
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद इसे कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के पास भेज सकती है। इस रिपोर्ट में सरकार तरफ से IAS के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव विभाग को दिया जा सकता है। फिर अधिकारी की बर्खास्तगी का अंतिम फैसला कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग लेता है। करप्शन मामले में IAS की बर्खास्तगी का DoPT विभाग लेता है। IAS अधिकारियों की कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) पास होती है. वह अधिकारियों पर अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत कार्रवाई करती है. कदाचार, भ्रष्टाचार और सेवा नियमों के उल्लंघन के मामलों में IAS की बर्खास्तगी का DoPT ही अंतिम निर्णय लेता है. राज्य या केंद्र सरकार सिर्फ अधिकारियों का निलंबन और उनका वेतन रोकने का फैसला कर सकते हैं।
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