जनहित के बुनियादी मुद्दों पर विफल रही सरकार, ध्यान भटकाने की हो रही कोशिश: डिंपल यादव
जनहित के बुनियादी मुद्दों पर विफल रही सरकार, ध्यान भटकाने की हो रही कोशिश: डिंपल यादव
मैनपुरी (अजय किशोर) समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि शासन जनहित के वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है। मैनपुरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा में वंदे मातरम को लेकर छिड़ी बहस जैसे विवाद सिर्फ मूल समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए खड़े किए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राष्ट्रगीत पर कोई पाबंदी नहीं है, बल्कि अब इसकी सभी पंक्तियां सम्मानपूर्वक गाई जाती हैं। सांसद ने जोर देकर कहा कि सरकार को ऐसे गैर-जरूरी विवादों को तूल देने के बजाय देश के सामने मौजूद आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और महिला सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बिजली की बढ़ती कीमतों और ऊर्जा संकट को लेकर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए डिंपल यादव ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा फ्यूल सरचार्ज में की गई दस प्रतिशत की वृद्धि की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि महंगाई से त्रस्त जनता पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की मार के बाद अब महंगी बिजली का अतिरिक्त बोझ लादा जा रहा है। सांसद ने आरोप लगाया कि पिछले आठ-नौ वर्षों के कार्यकाल में राज्य सरकार उत्तर प्रदेश में बिजली का उत्पादन बढ़ाने के लिए कोई भी नया बड़ा संयंत्र स्थापित करने में पूरी तरह नाकाम रही है। सरकार द्वारा दूसरे राज्यों से ऊंचे दामों पर बिजली खरीदकर मांग को पूरा किया जा रहा है, जिसका सीधा आर्थिक नुकसान प्रदेश की आम जनता को उठाना पड़ रहा है। देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सपा सांसद ने नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं की तीव्र आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रशासनिक नाकामियों से देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है और पीड़ित महिलाओं व युवाओं की आवाज को दबाया जा रहा है। सरकार पर केवल कागजी नीतियां बनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि नई योजनाओं और लोक-लुभावन घोषणाओं को धरातल पर सही ढंग से लागू करने में शासन तंत्र पूरी तरह विफल साबित हुआ है। योजनाओं के इस कुप्रबंधन का खामियाजा आज देश के युवाओं और छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
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