कायमगंज की तराई पर गंगा की बाढ़ का हमला, सिनौली समेत कई गांव जलमग्न; स्कूल, सचिवालय डूबे
कायमगंज की तराई पर गंगा की बाढ़ का हमला, सिनौली समेत कई गांव जलमग्न; स्कूल, सचिवालय डूबे
कायमगंज,/फर्रुखाबाद गंगा नदी का लगातार बढ़ता जलस्तर अब कायमगंज क्षेत्र के तराई इलाकों के लिए बड़ी आफत बनता जा रहा है। नरौरा बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी के चलते सोमवार को गंगा उफान पर पहुंच गई, जिससे सिनौली समेत कई तटीय गांवों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। खेतों में लहलहा रही सैकड़ों बीघा मक्के की फसल जलमग्न हो गई है, जबकि स्कूल, पंचायत सचिवालय और आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक पानी से घिर गए हैं। हालात ऐसे हैं कि कई जगह ग्रामीण बड़ी कढ़ाही को नाव बनाकर आने-जाने को मजबूर हैं। सबसे अधिक असर गांव सिनौली में देखने को मिला, जहां परिषदीय विद्यालय परिसर में बाढ़ का पानी भर जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो गई।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका वंदना सिंह ने बताया कि बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए उन्हें गांव के दूसरे प्राथमिक विद्यालय में स्थानांतरित कर पढ़ाई कराई जा रही है। बाढ़ का पानी पंचायत सचिवालय और आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक पहुंच चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गंगा का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो जल्द ही पानी रिहायशी मकानों में भी घुस जाएगा, जिससे बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित हो सकता है। गंगा का बढ़ता जलस्तर केवल सिनौली तक सीमित नहीं है। महादेवपुर सीघनपुर, महादेवपुर, अलीगढ़ और सुखा नगला सहित आसपास के कई गांवों की सीमाओं तक भी पानी पहुंच गया है। वहीं बूढ़ी गंगा का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर होती जा रही है। कई ग्रामीण बाढ़ के पानी को पार करने के लिए बड़ी लोहे की कढ़ाही का सहारा लेते नजर आए, जिसने लोगों की मजबूरी और प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर कर दिया। खेतों में खड़ी मक्के की फसल डूबने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। फसल पूरी तरह तैयार नहीं होने के बावजूद किसान नुकसान कम करने की उम्मीद में अधपकी फसल काटने में जुट गए हैं। दिव्यांग किसान जयकिशन ने बताया कि उनकी करीब 25 बीघा मक्के की फसल पानी में डूब चुकी है। मजबूरी में कच्ची फसल काटनी पड़ रही है, जिससे उन्हें लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है।
वहीं टिलियां सलेमपुर निवासी अमर सिंह ने भी बताया कि उनकी फसल भी पानी में समा रही है और नुकसान से बचने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा। पीड़ित किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी। अब फसल बर्बाद होने से लागत निकलना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। किसानों और ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने, प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने और फसल क्षति का उचित मुआवजा देने की मांग की है। गंगा का लगातार बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यदि पानी का स्तर और बढ़ा तो तराई क्षेत्र के कई और गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की राहत और बचाव व्यवस्था पर टिकी हुई हैं।
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