जिला प्रशासन सख्त: मंहगी किताबों पर नियंत्रण की तैयारी

Mar 31, 2026 - 19:57
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जिला प्रशासन सख्त: मंहगी किताबों पर नियंत्रण की तैयारी
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जिला प्रशासन सख्त: मंहगी किताबों पर नियंत्रण की तैयारी

स्कूलों की मनमानी पर लगेगा अंकुश, एनसीईआरटी पुस्तकें अनिवार्य

अलीगढ़ । जिले में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, किफायती एवं छात्र हितैषी बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक डा0 पूरन सिंह ने दोनों एडीआईओएस सहित प्रधानाचार्यों, विद्यालय प्रबंधकों को निर्देश निर्गत कर दिए हैं। सभी निजी विद्यालयों में पाठ्य पुस्तकों एवं सहायक पुस्तकों के चयन को लेकर निर्धारित मानकों एवं नियमों को सुनिश्चित कराया जाएगा। जिलाधिकारी संजीव रंजन ने कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्थिति में अभिभावकों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा। सभी विद्यालयों को प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य है, अन्यथा की दशा में संबंधित के विरूद्ध सख्ती से कार्यवाही की जाएगी।

उन्होंने डीआईओएस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थिति में विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी विद्यालयों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जिलाधिकारी संजीव रंजन ने कहा कि केंद्र सरकार एवं राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि कक्षा 1 से 12 तक एनसीईआरटी की पुस्तकों को ही मुख्य पाठ्य सामग्री के रूप में अपनाया जाए। किसी भी प्रकार से अभिभावकों पर अतिरिक्त भार डाला जाता है, तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। किसी भी विद्यालय द्वारा अनियमितता या कमीशन आधारित व्यवस्था को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों की जांच कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देशित किया कि सभी निजी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों की तत्काल जांच कराएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता दी जा रही है। किसी छात्र को निजी प्रकाशक की पुस्तक खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए। विद्यालयों एवं प्रकाशकों के बीच किसी प्रकार की अनियमित वित्तीय संलिप्तता न हो। डीआईओएस ने अभिभावकों से अपील है कि ऐसी किसी भी शिकायत की सूचना सीधे विभाग को दें।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत किए जा रहे पाठ्यक्रम सुधारों का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना है, न कि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालना है।