स्वच्छता के जनक संत गाडगे जी महाराज की 150वीं जयंती पर देशभर में भव्य आयोजन

Feb 23, 2026 - 09:22
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स्वच्छता के जनक संत गाडगे जी महाराज की 150वीं जयंती पर देशभर में भव्य आयोजन

स्वच्छता के जनक संत गाडगे जी महाराज की 150वीं जयंती पर देशभर में भव्य आयोजन

राम प्रसाद माथुर

आज 23 फरवरी को पूरे देश में धोबी समाज सहित विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक संगठनों द्वारा स्वच्छता और समाज सेवा के प्रतीक **संत गाडगे जी महाराज** की 150वीं जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश के कोने-कोने में श्रद्धांजलि सभाएं, शोभायात्राएं, स्वच्छता अभियान, भजन-कीर्तन और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। संत गाडगे जी महाराज का जीवन त्याग, तपस्या और सेवा का अद्भुत उदाहरण रहा है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज में फैली गंदगी, अंधविश्वास और कुरीतियों को दूर करने के लिए समर्पित कर दिया। वे गांव-गांव जाकर स्वयं झाड़ू लगाते थे और लोगों को स्वच्छता का महत्व समझाते थे। उनका मानना था कि स्वच्छता ही सच्ची पूजा और मानव सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।

गांव-गांव गूंजा स्वच्छता का संदेश -

दिल्ली, मुंबई, नागपुर, भोपाल, लखनऊ, जयपुर समेत अनेक शहरों में प्रभात फेरियां निकाली गईं। स्कूली बच्चों और युवाओं ने हाथों में झाड़ू लेकर स्वच्छता रैली निकाली और समाज को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया। कई स्थानों पर संत गाडगे जी महाराज के जीवन पर आधारित नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिन्हें लोगों ने भावभीनी श्रद्धा के साथ सराहा। वक्ताओं ने कहा कि संत गाडगे जी महाराज ने दशकों पहले जिस स्वच्छता आंदोलन की नींव रखी थी, वही आज राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप ले चुका है। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उस दौर में थे।

सामाजिक सुधार के अग्रदूत -

संत गाडगे जी महाराज केवल स्वच्छता के संदेशवाहक ही नहीं थे, बल्कि सामाजिक समानता और शिक्षा के भी प्रबल समर्थक थे। उन्होंने छुआछूत और जातिगत भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों की सेवा को उन्होंने अपना जीवन मिशन बना लिया। उनके प्रयासों से कई धर्मशालाएं, छात्रावास और सेवा केंद्र स्थापित हुए, जो आज भी समाज सेवा का कार्य कर रहे हैं। वे धार्मिक आडंबर के विरोधी थे और सादगीपूर्ण जीवन जीते थे। उनका मानना था कि यदि समाज को बदलना है, तो पहले स्वयं को बदलना होगा।

शेगांव में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब-

महाराष्ट्र में उनकी कर्मभूमि शेगांव क्षेत्र में भव्य आयोजन किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर संत गाडगे जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की। भजन-कीर्तन और प्रवचन के माध्यम से उनके जीवन दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। धोबी समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि संत गाडगे जी महाराज किसी एक समाज के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने मानवता को सर्वोपरि रखा और सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाया।

युवाओं ने लिया स्वच्छ भारत का संकल्प -

150वीं जयंती के अवसर पर कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण अभियान और सामूहिक स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किए गए। युवाओं ने सोशल मीडिया पर संत गाडगे जी महाराज के विचार साझा कर नई पीढ़ी को प्रेरित किया। कार्यक्रमों में यह भी कहा गया कि आज जब देश स्वच्छता और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब संत गाडगे जी महाराज के आदर्श मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धांजलि केवल माल्यार्पण से नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने से होगी।

नई चेतना का संकल्प -

देशभर में मनाई जा रही यह 150वीं जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण का संदेश है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वच्छता, समानता और सेवा ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव है। संत गाडगे जी महाराज का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। आज पूरे देश ने एक स्वर में संकल्प लिया है कि उनके विचारों को आत्मसात करते हुए स्वच्छ, समतामूलक और जागरूक भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाई जाएगी। स्वच्छता ही सेवा है — और सेवा ही सच्चा धर्म। यही संत गाडगे जी महाराज को सच्ची श्रद्धांजलि है।