एटा में आयोजित खरीफ किसान मेला: प्राकृतिक खेती और योजनाओं की जानकारी
एटा में आयोजित खरीफ किसान मेला एवं गोष्ठी में किसानों को प्राकृतिक खेती, पराली प्रबंधन, मृदा परीक्षण और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक किया गया।
जनपद एटा के जनेश्वर मिश्र सभागार में जिलाधिकारी अरविन्द सिंह के निर्देशन में एक दिवसीय जनपद स्तरीय खरीफ किसान मेला एवं गोष्ठी-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि एवं मारहरा विधायक वीरेन्द्र सिंह लोधी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने किसानों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
उप कृषि निदेशक सुमित पटेल ने स्वागत उद्बोधन में पराली न जलाने की अपील करते हुए कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आधुनिक विकल्प उपलब्ध हैं। पराली जलाने से न केवल भूमि की उर्वरता कम होती है, बल्कि कृषि विभाग की योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में शुरू हुए 'सेवा संकल्प अभियान' की चर्चा की गई, जिसके तहत वंचित पात्रों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया।
कृषि और तकनीकी नवाचार
गोष्ठी के दौरान विशेषज्ञों ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर किसानों का मार्गदर्शन किया:
- प्राकृतिक खेती: रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाने पर जोर दिया गया।
- मृदा परीक्षण: मृदा स्वास्थ्य कार्ड और गोबर की खाद के संतुलित प्रयोग पर विशेष चर्चा हुई।
- डिजिटल पहल: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फार्मर रजिस्ट्री और डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया गया।
उद्यान विभाग के पूर्व अधिकारी शुघर सिंह ने बताया कि आलू की खेती, बागवानी और स्प्रिंकलर इरिगेशन सेट पर सरकार द्वारा भारी अनुदान दिया जा रहा है। इसके साथ ही पशुपालन विभाग के डिप्टी सीवीओ प्रभात गुप्ता ने पशु टीकाकरण और लंपी बीमारी से बचाव की जानकारी दी। मत्स्य विभाग की ओर से तालाब निर्माण और मछली पालन के लिए 40 प्रतिशत तक की छूट और मोपेड-आइस बॉक्स जैसी सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया गया।
अधिकारियों का मार्गदर्शन
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि फसल चक्र में बदलाव और दलहन की खेती समय की मांग है। उन्होंने खेत तालाब योजना और संतुलित उर्वरक प्रयोग को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान कृषि गीत 'ऐसा अपना प्यारा गांव' की प्रस्तुति ने उपस्थित किसानों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनवीर सिंह ने आगामी रबी सीजन की तैयारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसानों को निशुल्क मिनीकिट और गेहूं, सरसों, चना एवं मटर के बीजों पर 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे डीएपी और यूरिया की अनावश्यक स्टॉकबाजी न करें और आवश्यकतानुसार ही इनका उपयोग करें। उन्होंने सभी किसानों से अनिवार्य रूप से 'फार्मर रजिस्ट्री' पूर्ण कराने का आग्रह किया ताकि भविष्य में सरकारी सहायता सीधे उनके बैंक खातों में बिना किसी बाधा के पहुंच सके। यह मेला किसानों के लिए नई तकनीकों को सीखने और विभागीय योजनाओं को समझने का एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हुआ।
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