हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी: पोषण और भविष्य का निर्माण
आंगनवाड़ी केंद्रों को सामुदायिक भागीदारी से सशक्त बनाने और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए पोषण माह 2026 के महत्व पर केंद्रीय मंत्री का विशेष लेख।
2047 के भारत का निर्माण वे बच्चे करेंगे जिन्होंने अभी स्कूल में कदम भी नहीं रखा है। एक स्वस्थ, आत्मविश्वासी और सक्षम वयस्क बनने की उनकी यह यात्रा जीवन के पहले 1,000 दिनों में ही शुरू हो जाती है। लाखों भारतीय बच्चों और उनकी माताओं के लिए इस यात्रा का सबसे बड़ा संबल उनके पड़ोस की एक जानी-पहचानी संस्था है: आंगनवाड़ी।
आज 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र नागरिक और सरकार के बीच पहले संपर्क बिंदु के रूप में काम कर रहे हैं, जो 8.9 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक अपनी पहुंच बनाए हुए हैं। यहां कार्यरत 25.2 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं उसी समाज से आती हैं जिसकी वे सेवा करती हैं। मार्च 2018 में जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 'पोषण अभियान' की शुरुआत की, तब यह संस्था एक राष्ट्रीय आंदोलन की आधारशिला बन गई। 9 सितंबर 2026 को ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी’ थीम के साथ 9वें 'राष्ट्रीय पोषण माह' का शुभारंभ हुआ।
लाभार्थी से भागीदार तक
समुदाय का स्वामित्व अक्सर केवल एक अपील बनकर रह जाता था, लेकिन इस वर्ष इसे एक संस्थागत रूप दिया गया है। आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियां माता-पिता, पंचायत प्रतिनिधियों और स्वयं सहायता समूहों को केंद्र से जोड़ती हैं। सोशल ऑडिट के माध्यम से समुदाय सेवाओं की समीक्षा करता है, जिससे जवाबदेही परिवारों की आंतरिक निगरानी में बदल जाती है। इस प्रक्रिया के केंद्र में माताएं हैं। 'पूरक पोषण कार्यक्रम' (SNP) का मेनू बोर्ड और 'टेक-होम राशन' की पारदर्शिता सुनिश्चित करती है कि हर मां को अपने बच्चे के अधिकार की जानकारी हो। पोषण माह 2026 के दौरान 'तिथि भोज' और व्यंजन विधियों के प्रदर्शन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इसे और अधिक सक्रिय किया जा रहा है।
पोषण और सर्वांगीण विकास
सुपोषित भारत के लिए संतुलित आहार अनिवार्य है, जिसमें श्रीअन्न (मिलेट्स), दालें, मौसमी फल और हरी सब्ज़ियां शामिल हैं। जुलाई 2026 के नए दिशानिर्देशों ने गर्म पके भोजन के मानकों को और सुदृढ़ किया है। पोषण के साथ-साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था की शिक्षा भी महत्वपूर्ण है। 'नवचेतना' और 'आधारशिला' पाठ्यक्रम पोषण और देखभाल को स्कूल जाने की तैयारी से जोड़ते हैं, जहां कार्यकर्ता बच्चे के शुरुआती तीन वर्षों में 34 विकासात्मक पड़ावों पर नज़र रखती हैं।
यह पोषण माह 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' के दस वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है। एक दशक में 4.65 करोड़ लाभार्थियों को सीधे लाभ मिला है। राजस्थान के 'कैश प्लस' मॉडल से स्पष्ट है कि जब वित्तीय सहायता को व्यवहार परिवर्तन संचार और पारिवारिक संवाद से जोड़ा जाता है, तो मातृ पोषण में उल्लेखनीय सुधार होता है।
सामुदायिक सहभागिता का आह्वान
इस पूरे तंत्र के केंद्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। सामुदायिक स्वामित्व का अर्थ उनका सहयोग करना और उन्हें सशक्त बनाना है। इस सितंबर, मैं प्रत्येक नागरिक से आग्रह करती हूं कि वे अपने क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्र का दौरा अवश्य करें। पिताओं, दादा-दादी और पंचायतों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। जो बच्चे आज आंगनवाड़ी में अपनी नींव रख रहे हैं, वे 2047 में भारत की प्रगति का नेतृत्व करेंगे। जब प्रत्येक समुदाय अपनी आंगनवाड़ी की ज़िम्मेदारी लेगा, तभी भारत अपने हर बच्चे के भविष्य की ज़िम्मेदारी सुनिश्चित कर सकेगा।
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